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Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
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"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई जी ग़ज़ल पसंद करने और होसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय सालिक गणवीर भाई जी ग़ज़ल पसंद करने और होसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दंड पानी नाहक जी ग़ज़ल पसंद करने और होसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी ग़ज़ल पसंद करने और होसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय समर कबीर सर गजल पर मार्गदर्शन करने और हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इस मिसरे को यूँ कहें:- 'वो भी था इक दौर थी हर शय दिवानी आप की' क्या इस को ऐसे कह सकता हूं ? एक था वो दौर जब हर शय दिवानी आपकी याद तब-तब आई मुझको बेइमानी…"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय डाक्टर छोटे लाल जी गजल पसन्द करने और हौसला आफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"गुम गया वो दौर थी हर शय दिवानी आप की,अब यहां कहता नहीं कोई कहानी आप की।।१।। जो दिया जब भी दिया औकात से बढ़कर दिया,भूल जाऊं कैसे मैं जर्रा-बखानी आपकी।।२।। भूल तो जाता मगर मैं क्या करूं इस बार फिर,दिख गई ई-मेल में फोटो पुरानी आपकी।।३।। झूठ-सच जो भी…"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी अच्छी ग़ज़ल कही बहुत-बहुत बधाइयां"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी बहुत अच्छी गजल हुई बधाइयां स्वीकार करें"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"मोहतरमा अंजुमन जी बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां बाकी आदरणीय समर कबीर सर के सुझाव पर ध्यान दें।"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय रवि शुक्ला जी बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी बहुत ही बेहतरीन गजल कही बहुत-बहुत मुबारकबाद"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दंड पानी नाहक साहब जी गजल का बहुत अच्छा प्रयास हुआ बहुत-बहुत बधाइयां"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय सालिक गणवीर साहब जी बेहतरीन गजल हुई बहुत और बधाइयां। इस शेर के मिश्रा ऊला और मिश्रा सानी, दोनों के अंत में "की" शब्द आया है क्या कोई दोष उत्पन्न हो रहा है कृपया मार्गदर्शन करें। आभार क्यों न नाले में बहा दूँ अब ये है किस काम कीआज…"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"अमित कुमार"
Dec 29, 2021
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय संजय शुक्ला जी अच्छी गजल हुई बहुत-बहुत बधाइयां"
Dec 28, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गीत - मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।

तुम मुझको चाहे जो भी समझो लेकिन सुनो प्रिय।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।



तुम अमृत जैसी दुर्लभ हो, तुम गंगाजल सी पावन हो।

तुम खुशबू से लबरेज पवन, तुम बहका-बहका सावन हो।

तुम कलियों में कचनार प्रिय, तुम नील गगन में चंदा हो।

उर्वशी-मेनका से सुंदर, जो जग पूजे वो वृंदा हो।



उस जीवन दाता रब का मुझ पर फजल समझता हूं।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।१।।



सांसो की मधुमय हाला से मदहोश सदा हो जाता हूं।

इन नैनो की मधुशाला… Continue

Posted on July 19, 2019 at 6:09pm — 3 Comments

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

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At 7:42am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार अमित जी
At 10:31am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

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