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Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
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Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय जैफ भाई जी ग़ज़ल पसंद करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
yesterday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय आशीष यादव भाई जी ग़ज़ल पसंद करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
yesterday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय समर कबीर सर प्रणाम, गजल पर आपकी सराहना और उत्साह वर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार । आपके सुझाव के अनुसार मैं ग़ज़ल में संशोधन कर लूंगा। आभार"
yesterday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय आशीष यादव जी अच्छी गजल हुई बहुत-बहुत बधाइयां हम लिखें हुस्न पर? हुंह! अजी छोड़िए  हैं जमीन और भी शाइरी के लिए ... अंदाज ए बयां अच्छा है पर शायद इस शहर में तक़ाबुल रदीफ दोष है। बाकी गुणीजन बताएंगे"
yesterday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीया राखी जैन जी गजल अच्छी हुई बधाइयां"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय सालिक जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बहुत-बहुत शुभकामनाएं"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"लाख एहसास हैं जिंदगी के लिए,फिर भी बेकल है दिल आप ही के लिए।।१।। जान लेते तुम्हें दोस्त हम भी अगर,साथ चलते घड़ी दो घड़ी के लिए।।२।। मन में उम्मीद का दीप जलता रहे,इतना काफी है हर रोशनी के लिए।।३।। मखमलौं के दरीचे भी बेकार हैं,पेट खाली हो तो हर…"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय अमीर उद्दीन अमीर जी बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाइयां"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय नादर खान जी अच्छी ग़ज़ल भाई बहुत-बहुत बधाइयां"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय जयनित कुमार मेहता जी बहुत ही खूबसूरत गजल कही बहुत-बहुत बधाइयां। दूर जितना भी चाहे निकलना पड़ेएक रस्ता भी हो वापसी के लिए......बहुत खूब "
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीया रचना भाटिया जी बहुत ही बेहतरीन गजल हुई दिली मुबारकबाद कबूल करें"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय अमित जी बहुत ही खूबसूरत गजल कही शेर दर शेर दादॅ कबूल करें"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय अजय गुप्ता अजय जी बहुत-बहुत बधाइयां एक बेहतरीन ग़ज़ल कहने के लिए"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय दयाराम मथानी जी गजल का अच्छा प्रयास हुआ बहुत-बहुत बधाइयां"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी शेर दर शेर दाद कबूल करें बहुत-बहुत बधाई"
Saturday
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-151
"आदरणीय नीलेश भाई जी एक अच्छी ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गीत - मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।

तुम मुझको चाहे जो भी समझो लेकिन सुनो प्रिय।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।



तुम अमृत जैसी दुर्लभ हो, तुम गंगाजल सी पावन हो।

तुम खुशबू से लबरेज पवन, तुम बहका-बहका सावन हो।

तुम कलियों में कचनार प्रिय, तुम नील गगन में चंदा हो।

उर्वशी-मेनका से सुंदर, जो जग पूजे वो वृंदा हो।



उस जीवन दाता रब का मुझ पर फजल समझता हूं।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।१।।



सांसो की मधुमय हाला से मदहोश सदा हो जाता हूं।

इन नैनो की मधुशाला… Continue

Posted on July 19, 2019 at 6:09pm — 3 Comments

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

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At 7:42am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार अमित जी
At 10:31am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

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