For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,

विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही है । विगत दिनों एक अनौपचारिक बातचीत के क्रम में आदरणीय तिलक राज कपूर जी का सुझाव आया कि क्यों न सभी चारों लाइव आयोजनों को माह के प्रथम सप्ताह में लगा दी जाय और एक साथ पूरे माह के लिए लाइव कर दिया जाय, जिससे सदस्यों की सहभागिता बढ़ सकेगी ।

मित्रों, इस विषय पर आप सभी अपना मंतव्य, नवीन विचार रखें ताकि कुछ बेहतर किया जा सके ।

सादर

Views: 1168

Reply to This

Replies to This Discussion

सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार,

एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की पात्र है।

मेरे विचार में सुझाव उत्तम है कि सभी आयोजन एकसाथ खोल दिए जाएँ। किंतु एक महीने का समय बहुत अधिक होता है और यह प्रविष्टियाँ आमंत्रित करने की अपेक्षा लापरवाही का कारण न बन जाये, देखना होगा। किंतु यह भी है कि रचनाकार का अपना रचनाक्रम इस व्यवस्था से बाधित नहीं होगा और अपनी सुविधा से वो किसी भी आयोजन में सम्मिलित हो सकता है।

दूसरा, प्रविष्टियाँ आने और उनपर प्रतिक्रिया व्यक्त करने का अलग-अलग समय निर्धारित हो तो उत्तम। 

एक और बात मैं रखना चाहूँगा कि इस मंच का उद्देश्य केवल रचनाकर्म नहीं है, अपितु नया सीखना भी है। नए छंद, नई विधाएँ, नई बहर यदि सीखने को न मिलें तो उत्साह क्षीण होने लगता है। 

आशा है प्रबंधन समिति के प्रयास सफल होंगें और मंच पर पुनः बसंत आयेगा।

सादर 

तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा लेकिन ग़ज़ल की बहुत कम बहर हैं जो सामान्यतः चलन में हैं। इसकी पृष्ठभूमि में मुख्य कारण है प्रवाह सरलता। देखा जाए तो अभी सामान्यतः प्रचलित सरल बहरों पर भी शेर बांधने में कठिनाई देखी जाती है अगर कठिन बहर दे दी तो काम और मुश्किल हो जाएगा।
साहित्य में कहन की शुद्धता और नवीनता महत्वपूर्ण हो जाते हैं। शेर, शेर जैसा होना चाहिए और अभ्यास स्तर पर बहुत कम शेर होते हैं जो पहली बार में ही शानदार या अच्छा शेर कहे जा सकें। समय मिलने से अच्छे शेर कहे जा सकेंगे। एक बार शायर को अच्छे शेर कहना आ गया तो अन्य बहरों पर भी वह स्वतः ही कह सकेगा। दो दिन की सीमा में पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाती है, इसी कारण से चर्चा का समय बढ़ाना आवश्यक लग रहा है।

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार।


आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा दिया गया सुझाव अत्यंत सामयिक और व्यावहारिक है। वर्तमान में सदस्यों की घटती भागीदारी को देखते हुए आयोजनों के स्वरूप में परिवर्तन करना आवश्यक प्रतीत होता है। कपूर सर के प्रस्ताव और उस पर हुए विमर्श के आधार पर मेरी ओर से कुछ बिंदु इस प्रकार हैं-

1. महीने के प्रथम सप्ताह में आयोजन की घोषणा और 14 तारीख से माह के अंत तक यदि आयोजन को रचना और कमेन्ट पोस्ट करने हेतु खोला जाता है तो सदस्यों को भागीदारी में सहजता और उनकी उपस्थिति में वृद्धि होगी।


2. वर्तमान में शनिवार और रविवार को आयोजन होने से पारिवारिक और सामाजिक व्यस्तताओं के कारण कई सदस्य चाहकर भी भाग नहीं ले पाते। प्रस्तावित योजना में आयोजन को 14 तारीख से महीने के अंत तक खुला रखने से कार्यदिवसों का भी लाभ मिलेगा, जिससे सदस्य अपनी सुविधानुसार समय निकाल सकेंगे।


3. महीने के प्रथम सप्ताह में घोषणा और 14 तारीख से आयोजन खुलने के बीच जो 7 दिनों से अधिक का अंतराल मिलेगा, वह रचनाकारों को रचनाकर्म और परिमार्जन के लिए पर्याप्त समय देगा। इससे रचनाओं की गुणवत्ता में भी निश्चित रूप से सुधार होगा।


4. जब चारों आयोजन एक साथ 15 दिनों के लिए लाइव होंगे, तो ओबीओ पर एक साहित्यिक कुंभ जैसा वातावरण बनेगा। इससे न केवल रचनाओं की संख्या बढ़ेगी, बल्कि आपसी चर्चा और समालोचना हेतु अधिक समय मिलेगा जिससे इनका स्तर भी बेहतर होगा।

अतः मेरा मंतव्य है कि इस नवीन प्रयोग को आगामी माह से लागू किया जा सकता है।
सादर।

सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और शुभकामनाएं।

 मेरा विचार है कि दस-दस दिन के लिए प्रत्येक आयोजन हेतु एक अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार को अतिथि मंच-संचालन का दायित्व दिया जा सकता है, जिससे किसी एक पर मासिक दायित्व न रहे और संचालन और टिप्पणियों में विविधता आती रहे। एक माह अवधि यदि अधिक हो, तो पखवाड़े अनुसार आयोजनों का प्रयोग कर साप्ताहिक संचालन दायित्व सौंपे जा सकते हैं वरिष्ठ अतिथि साहित्यकार को। सोशल मीडिया पर समूहों पर अग्रिम सूचनायें जारी की जा सकती हैं। नये उभरते लेखकों और कवियों को आमंत्रित किया जा सकता है सदस्यता हेतु। मन में अभी यही सुझाव आये, हो साझा किए। शुक्रिया।

हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम में रुचि कम होती जा  रही है और समान प्रभाव यहॉं भी स्पष्ट है। कार्यक्रम के दौरान रचनाओं पर टिप्पणी से मंच संचालन का आशय है तो मंच संचालन कुछ के लिये सम्मान का विषय हो सकता है लेकिन अधिकॉंश के लिये अब यह अनुभव अच्छा होगा इसमें मुझे शंका है। फिर भी सुझाव अनुसार ऐसे अतिथि साहित्यकारों की एक सूची तैयार कर उनकी सहमति मंच संचालन के लिये प्राप्त की जा सके तो विचार स्वागत योग्य है। मंच संचालन के विषय पर व्यवहारिक स्थिति  यह है कि मंच संचालन कार्यकारिणी ही कर रही है। जाे नाम मंच-संचालक के रूप में दिखता है, उसका दायित्व पोस्ट तैयार कर प्रबंधन को भेजने भर का है, उसके बाद मंच संचालन के नाम पर प्रबंधन द्वारा इवेंट खोलना और बंद करना ही रहता है। प्राप्त रचनाओं पर उपस्थिति तो सबके लिये खुली रहती है और उनकी टिप्पणियों के लिये कोई सीमा निर्धारित नहीं है।  ऐसे में सदस्यता प्राप्त कर कोई भी मंच पर सहभागी हो सकता है। 
सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिये सभी सदस्य अपने स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिये अपना सहयोग दे सकते हैं। 

 कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।

सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । 

आदरणीय, नमस्कार 

यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है

तथा हमें अधिकाधिक सीखने को भी मिलेगा जितनी जल्दी शुरुआत हो उतना अच्छा 

इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो प्रतिक्रियाएं घट सकती हैं। कौन कब-कब आयोजन को खोल कर देखेगा कि नई रचना आई है या नहीं।

 

1. यूँ भी यदि कैलंडर सही समय पर आ जाए तो रचना के लिए उचित समय मिल ही जाता है। अतः यह कहना मुझे उचित प्रतीत होता है कि अत्यावश्यक है कि कैलंडर समय से आए। 

2. आयोजन की तारीखें 2-3 दिन के लिए ही ओपन की जाएँ वो भी महीने के अंतिम 8-10 दिनों में। 

3. रचनाओं पर प्रतिक्रिया और चर्चा के लिए एक अलग दिन रखा जाए। 

धन्यवाद 

सभी आदरणीय को नमस्कार।
आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक कार्यक्रम प्रति सप्ताह कर दिया जाये। इससे भी लाभ होगा। कुछ दिनों तक ऐसा भी करके देखा जा सकता है। सादर।

आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन एक साथ चलें अगले पन्द्रह दिनों तक।आशा है ये नया प्रारूप आयोजनों में फिर से उत्साह ले आयगा।

चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ पर, और आयोजनों को भी, खूब समय दिया है। 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
3 hours ago
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
4 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
6 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
10 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
10 hours ago
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
10 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
11 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
May 24
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
May 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service