For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126

परम आत्मीय स्वजन,

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 126वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है| इस बार का मिसरा -ए-तरह जनाब अहमद फ़राज़ साहब की ग़ज़ल से लिया गया है|

"वो मुझे छोड़ गया शाम से पहले पहले "

2122           1122            1122                22

फ़ाइलातुन   फ़इलातुन      फ़इलातुन           फ़इलुन/फ़ेलुन

बह्र:  रमल मुसम्मन् मख्बून मक्तुअ रूप

रदीफ़ :-  से पहले पहले
काफिया :- आम( नाम, आम, काम, नाकाम, ईनाम, पैगाम, जाम, शाम आदि)

मुशायरे की अवधि केवल दो दिन है | मुशायरे की शुरुआत दिनाकं 25 दिसंबर दिन शुक्रवार  को हो जाएगी और दिनांक 26 दिसंबर दिन शनिवार समाप्त होते ही मुशायरे का समापन कर दिया जायेगा.

 

नियम एवं शर्तें:-

  • "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" में प्रति सदस्य अधिकतम एक ग़ज़ल ही प्रस्तुत की जा सकेगी |
  • एक ग़ज़ल में कम से कम 5 और ज्यादा से ज्यादा 11 अशआर ही होने चाहिए |
  • तरही मिसरा मतले को छोड़कर पूरी ग़ज़ल में कहीं न कहीं अवश्य इस्तेमाल करें | बिना तरही मिसरे वाली ग़ज़ल को स्थान नहीं दिया जायेगा |
  • शायरों से निवेदन है कि अपनी ग़ज़ल अच्छी तरह से देवनागरी के फ़ण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें | इमेज या ग़ज़ल का स्कैन रूप स्वीकार्य नहीं है |
  • ग़ज़ल पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे ग़ज़ल पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं | ग़ज़ल के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें |
  • वे साथी जो ग़ज़ल विधा के जानकार नहीं, अपनी रचना वरिष्ठ साथी की इस्लाह लेकर ही प्रस्तुत करें
  • नियम विरूद्ध, अस्तरीय ग़ज़लें और बेबहर मिसरों वाले शेर बिना किसी सूचना से हटाये जा सकते हैं जिस पर कोई आपत्ति स्वीकार्य नहीं होगी |
  • ग़ज़ल केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, किसी सदस्य की ग़ज़ल किसी अन्य सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी ।

विशेष अनुरोध:-

सदस्यों से विशेष अनुरोध है कि ग़ज़लों में बार बार संशोधन की गुजारिश न करें | ग़ज़ल को पोस्ट करते समय अच्छी तरह से पढ़कर टंकण की त्रुटियां अवश्य दूर कर लें | मुशायरे के दौरान होने वाली चर्चा में आये सुझावों को एक जगह नोट करते रहें और संकलन आ जाने पर किसी भी समय संशोधन का अनुरोध प्रस्तुत करें | 

मुशायरे के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है....

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो 25 दिसंबर दिन शुक्रवार लगते ही खोल दिया जायेगा, यदि आप अभी तक ओपन
बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.comपर जाकर प्रथम बार sign upकर लें.


मंच संचालक
राणा प्रताप सिंह 
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम

Views: 5623

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

मुहतरम नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, उम्दा ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। मतले के ऊला में 'आराम' लफ्ज़ खटक रहा है। तीसरा, पाँचवा और छठा अशआर शानदार हुए हैं। सादर। 

आ0 अमीर साहब ग़ज़ल तक आने के लिए तहेदिल से बहुत बहुत शुक्रिया । आपके सुझाव का पूरा सम्मान है । 

बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है नवीन जी मुबारकबाद कुबूल करें।

आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी प्रणाम बहुत उम्द: ग़ज़ल हुई हैं 

हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! तीसरा शैर ख़ास तौर पे बहुत पसंद आया 

बहुत बहुत बधाई आपको 

आदरणीय नवीन जी नमस्कार

 ग़ज़ल बहुत अच्छी हुई

बधाई स्वीकार कीजिये।

आदरणीय भाई Naveen Mani Tripathi  जी
सादर अभिवादन
शानदार तरही ग़ज़ल के लिए दाद और मुबारक़बाद क़ुबूल करें। आपने  गिरह का मिसरा भी खूब लगाया है .

जनाब नवीन त्रिपाठी साहिब, आदाब! बढ़िया ग़ज़ल कही आपने मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएँ। 

आदरणीय नवीन जी नमस्ते, वाह बहुत ख़ूब उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय हर शेर कमाल, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

जनाब नवीन जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है, मुबारकबाद, कुबूल फरमाएं 

आद0 नवीन मनी त्रिपाठी जी सादर अभिवादन।।अच्छी ग़ज़ल पर मेरी मुबारकबाद कुबूल करें। सादर

आदरणीय नवीन जी  बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें

जनाब नवीन मणि त्रिपाठी साहब अच्छी ग़ज़ल हुई है बहुत-बहुत बधाई

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"आदरणीय अवनीश जी सादर धन्यवाद"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी सुधार किए हैं...हाँ मआनी के लिए कुछ उचित अभी कर नहीं पाया...लेकिन उसमें भी…"
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post राखी पर कुछ दोहे. . . .
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । रक्षा बंधन की हार्दिक…"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post राखी पर कुछ दोहे. . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर दोहे हुए है। हार्दिक बधाई।"
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

राखी पर कुछ दोहे. . . .

राखी पर कुछ दोहे. . . .भाई बहिन के प्यार का, राखी है त्योहार ।पावन धागों में छुपी , बहना की मनुहार…See More
13 hours ago
Sushil Sarna and Anita Maurya are now friends
13 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post गज़ल
"कृपया मतले के सानी  मिसरे को  कुछ  यूँ  पढ़ें, " बहतर ख़ुदा क़सम …"
yesterday
Chetan Prakash commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post गज़ल
"कृपया, मतले के सानी  मिसरे  को कुछ  यूँ  पढ़ें :  " बहतर ख़ुदा क़सम…"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-अलग है

122     122     122     122हक़ीक़त जुदा थी कहानी अलग है सुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग  है ये गरमी की…See More
yesterday
Awanish Dhar Dvivedi posted photos
yesterday
Awanish Dhar Dvivedi posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash posted a blog post

गज़ल

गज़ल221 2121 1221 212उम्मीद अब नहीं कोई वो दीदावर मिले बहतर खुुदा कसम वही चारागर मिले ( मतला )लगता…See More
yesterday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service