For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

- समान सवैया या सवाई छंद -

1-
हम विश्व शांन्ति के पोषक हैं, यह बात जगत में है जाहिर।
पर पाकिस्तान सदा से ही, आतंकवाद में है माहिर।।
पुलवामा में हमला करके, मारे हैं वीर बिना कारण।
इसलिए शांति अब और नहीं, हम भी कर पाऐंगे धारण।।
2-
हज करने की बातें करता, ये सौ-सौ चूहे भी खाकर।
अनजान बना बैठा रहता, जम्मू घाटी को दहलाकर।।
ये पाकिस्तान हमेशा से, भारत को है अति दुखदायक।
है अमन चैन के पथ में भी,अब बन बैठा ये खलनायक।।
3-
तीसरा नेत्र जब भारत ने, फड़काया भर ही है केवल।
तब दिखा जैश पर लगा हुआ, पूरा पाकिस्तानी लेवल।।
हो खबरदार ओ दुष्ट पाक, आतंकवाद का तू कारक।
अब जाएगा तू प्राणों से, संधान किया हमने मारक।
4-
यह बार-बार बेवजह हमें, कर देता हमलों से आहत।
अब बात विश्व ये समझ गया,इसको न शांति की है चाहत।।
सोते में सिंह जगाया है, इसने पुलवामा में आकर।
हम इसको सबक सिखाऐंगे, इसके घर के अंदर जाकर।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

Views: 510

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Hariom Shrivastava on March 4, 2019 at 10:50pm

हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी।

Comment by Hariom Shrivastava on March 4, 2019 at 10:49pm

हार्दिक आभार आदरणीय कबीर साहब।

Comment by Hariom Shrivastava on March 4, 2019 at 10:49pm

हार्दिक आभार आदरणीय मुसाफिर जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 27, 2019 at 4:20pm

आ. भाई हरिओम जी, सुंदर छंद हुए हैं । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on February 25, 2019 at 2:12pm

जनाब  हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on February 25, 2019 at 1:58pm

बहुत बढ़िया समसामयिक अभिव्यक्ति। हार्दिक बधाई आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Dayaram Methani जी, लघुकथा का बहुत बढ़िया प्रयास हुआ है। इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"क्या बात है! ये लघुकथा तो सीधी सादी लगती है, लेकिन अंदर का 'चटाक' इतना जोरदार है कि कान…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani जी, अपने शीर्षक को सार्थक करती बहुत बढ़िया लघुकथा है। यह…"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 शीर्षक — वापसी आज कोर्ट में सूरज और किरण के तलाक संबंधी केस का…"
3 hours ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"भड़ास'मुझे हिंदी सिखा देंगे?फेसबुक की महिला मित्र ने विकल जी से गुजारिश की।'क्यों…"
6 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"वतन में जतन (लघुकथा) : अमेरिका वाले ख़ास रिश्तेदार अपने युवा बच्चों को स्वदेश घुमाने और…"
9 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय चेतन प्रकाश जी "
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service