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क्षणिकाएं।

इतने बड़े जहां में,
क्यों तू ही नहीं छिप सका,
ऐसा क्या खास तुझमें हुआ किया,
कि, हर नए ज़ख्म पर,
नाम तेरा ही छपा पाया।............. 1

सुना-सुना सा लगता है,
वो सदा है उसके वास्ते,
जीया-जीया सा सच है,
वो खुद ही है खुद के वास्ते,
हाँ, और कोई नहीं, कोई नहीं।............. 2

कहते थे,
भरोसा करके देखो।
किया, तो,
नज़ारा ही बदल गया।......... 3

अजीब हो दोस्त,
रिश्ते की परतें उधेड़ रहे हो,
पर ख़्याल रहे,
परत जो ज़िन्दगी ने बदली,
सह न पाओगे ।............. 4

मौलिक व अप्रकाशित।

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Comment

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Comment by Usha on December 4, 2019 at 6:50pm
आदरणीय महेन्द्र सर, आपको मेरी क्षणिकाएं पसंद आयी, प्रसन्नता हुई। साभार।
Comment by Mahendra Kumar on December 4, 2019 at 5:59pm

अच्छी क्षणिकाएँ हैं आदरणीया उषा जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।

Comment by Usha on November 29, 2019 at 2:55pm
आदरणीय समर कबीर सर, आदाब। मेरी क्षणिकाएं आपको पसंद आयी, मेरे लिए हर्ष की बात है। ह्रदय से आपका आभार । सादर ।
Comment by Usha on November 29, 2019 at 2:53pm
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' सर, क्षणिकाओं पर बधाई के लिए आभार।सादर ।
Comment by Usha on November 29, 2019 at 2:51pm
आदरणीय विजय शंकर सर, आपको क्षणिकाएं पसंद आयीं। ह्रदय से आभार। सादर ।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 29, 2019 at 10:34am

आदरणीय सुश्री उषा जी , अच्छी क्षणिकाएं बनी है , जीवन के अनुभवों को सांकेतिक करती हुयी , बधाई , सादर।

Comment by नाथ सोनांचली on November 28, 2019 at 8:47pm

आद0 उषा जी सादर अभिवादन। बेहतरीन क्षणिकाएँ बन पड़ी हैं। बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by Samar kabeer on November 28, 2019 at 10:35am

मुहतरमा ऊषा जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Usha on November 27, 2019 at 6:49pm
आदरणीय प्रदीप सर, ख़्याल आपको पसंद आया।आभार । जी अवश्य, प्रयास जारी है इस आशा के साथ कि अच्छा कर सकूँ। सादर ।
Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on November 27, 2019 at 6:43pm

उषा जी ख्याल खूबसुरत हैं प्रयास जारी रक्खे, लिखते लिखते कवित्व भी आता जाएगा। -एक विद्यार्थी-

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