For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

1222 1222 122
अना की बात में कुछ दम नहीं है ।
कहा किसने तेरा परचम नहीं है ।।

मिलेंगी कब तलक ये स्याह रातें ।
मेरी किस्मत में क्या पूनम नही है ।।

अभी तक मुन्तजिर है आंख उसकी ।
वफ़ा के नाम पर कुछ कम नहीं है ।।

चिरागे इश्क़ पर है नाज़ उसको ।
उजाला भी कहीं मध्यम नहीं है ।।

सजा देंगे हमे ये हुस्न वाले ।
हमारे हक़ का ये फोरम नहीँ है ।।

तेरी जुल्फों की मैं तश्वीर रख लूँ।
मगर मुद्दत से इक अल्बम नही है ।।

मिरे घर आ गयी हैं भूल से वह । मिरे घर आज फिर बेगम नहीं हैं ।।

समझदारी बड़ी कच्ची है साहब ।
ये व्हिस्की है ये कोई रम नही है ।।

मिटा बैठा है वो उल्फ़त में हस्ती ।
उसे बर्बादियों का गम नहीं है ।।

अनासिर से मुकम्मल है बदन वो । कहा कसने बदन संगम नहीं है ।।

सँभल के चल जमाने की नज़र से । अभी घर पर तेरा बालम नहीं है ।।

अभी तक प्यार का मौसम नहीं है । तुम्हारी तिश्नगी में दम नहीं है ।।

बरसती रात का सच है बयां सब । तेरे चेहरे पे वो शबनम नहीं है ।।

सहर को मान लूँ मैं सच भी कैसे । गुलों पर रात की शबनम नहीं है ।।

अना के साथ मत यूँ पेश आओ।
मेरी ग़ज़लों का तू उदगम नहीं है ।।

मुहब्बत जीत जाएगी तुम्हारी ।
छुपा कोई यहाँ रुस्तम नहीं है ।।

है गर जज़्बा तो मेरे पास आओ ।
जिगर तक रास्ता दुर्गम नहीं है ।।

किसी का जख़्म मत पूछा करो यूँ ।
तुम्हारे पास जब मरहम नहीं है ।।

अजब क़ातिल से उसका वास्ता है ।
सजाये मौत पर मातम नही है ।।

----नवीन मणि त्रिपाठी

मौलिक अप्रकाशित

Views: 412

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on May 24, 2017 at 1:42am
आ0 कबीर सर और आ0 गिरिराज सर बीच मे एक शेर ऐसा गया जो मतले की तरह था । मैंने कुछ अनावश्यक शेर हटा कर ग़ज़ल में संसोधन किया है अब नई ग़ज़ल यह होगी ।

1222 1222 122
अना की बात में कुछ दम नहीं है ।
कहा किसने तेरा परचम नहीं है ।।

मिलेंगी कब तलक ये स्याह रातें ।
तेरी किस्मत में क्या पूनम नही है ।।

अभी तक मुन्तजिर है आंख उसकी ।
वफ़ा के नाम पर कुछ कम नहीं है ।।

चिरागे इश्क़ पर है नाज़ उसको ।
उजाला भी कहीं मध्यम नहीं है ।।

सजा देंगे हमे ये हुस्न वाले ।
हमारे हक़ का ये फोरम नहीँ है ।।

तेरी जुल्फों की मैं तश्वीर रख लूँ।
मगर मुद्दत से इक अल्बम नही है ।।

मिटा बैठा है वो उल्फ़त में हस्ती ।
उसे बर्बादियों का गम नहीं है ।।

अनासिर से मुकम्मल है बदन वो ।
कहा कसने बदन संगम नहीं है ।।

नहीं है वस्ल का मौसम कहो मत ।
तुम्हारी तिश्नगी में दम नहीं है ।।

सहर को मान लूँ मैं सच भी कैसे ।
गुलों पर रात की शबनम नहीं है ।।

अना के साथ मत यूँ पेश आओ।
मेरी ग़ज़लों का तू उदगम नहीं है ।।

बहुत मुमकिन मुहब्बत जीत जाए ।
छुपा कोई वहाँ रुस्तम नहीं है ।।

है गर जज़्बा तो मेरे पास आओ ।
जिगर तक रास्ता दुर्गम नहीं है ।।

किसी का जख़्म मत पूछा करो यूँ ।
तुम्हारे पास जब मरहम नहीं है ।।

अजब क़ातिल से उसका वास्ता है ।
सजाये मौत पर मातम नही है ।।

----नवीन मणि त्रिपाठी
Comment by Samar kabeer on May 22, 2017 at 3:14pm
जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,आपने एक साथ दो ग़ज़लें पोस्ट कर दीं, 11वें शैर के बाद दूसरी ग़ज़ल शुरू हो गई है,ज़ियादा तर अशआर में क़ाफ़िया पैमाई के अलावा कुछ नहीं है,मैं जनाब गिरिराज भंडारी जी से सहमत हूँ,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 21, 2017 at 2:13pm

आदरणीय नवीन भाई , अच्छी गज़ल कही है , हार्दिक बधाइयाँ ।  कुछ शेर जो आपकी समझ से कमज़ोर हों कम कर दीजिये .. मै भी सीखने वाला हूँ ... और कुछ कहने के लायक मै ख़ुद को नही समझता ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122, 1212, 112**बिसलरी पा  नदी को भूल गयाहर अधर तिस्नगी को भूल गया।१।*पथ की हर रौशनी को भूल…"
5 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन।"
9 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला वो किसी को भूल गय इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा रात को इक और फिर रात…"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन "
4 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"स्वागतम"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति का सहज संशोधित स्वरूप।  हार्दिक बधाई"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत्त चित्र को आपने पूरे मनोयोग से परखा है तथा अंतर्निहित भावों को…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपने प्रस्तुति के माध्यम से प्रदत्त चित्र को पूरी तरह से शाब्दिक किया है…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद  परन्तु, रचना सोलह मात्राओं खे चरण…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, चौपाई छंद में आपने प्रदत्त चित्र को उपयुक्त शब्द दिये हैं. सुगढ़ रचना के…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। तुकांतता के दोष में…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service