For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पत्ता जब शाख से गिरा होगा(गजल)/सतविन्द्र

गजल
2122 1212 22/112
पत्ता जब शाख से गिरा होगा
दर्द कुछ तो उसे हुआ होगा

अब्र से आस क्या करे कोई
खुद भी प्यासा तड़प रहा होगा

हाथ में जिसके आज पत्थर हैं
कौन कल उसका रहनुमा होगा?

सिर्फ बातें नहीं अमल भी हो
ऊंचा फिर तेरा मर्तबा होगा।

दिल से राणा निकल गया हर शक
सोच लोगे भला,भला होगा

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 590

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 23, 2017 at 10:05am

वाह वाह ..
अच्छी ग़ज़ल हुई  है.
.
अब्र से आस क्या करे कोई
खुद जो प्यासा तड़प रहा होगा..... अब्र से नहीं तो किससे आस करेगा प्यासा?? 
.
अगर ख़ुद भी प्यासा करेंगे तो अब्र के प्यासे होने का भाव आयेगा .
.
हाथ में जिसके आज पत्थर हैं
उसका कल कौन रहनुमा होगा
... यानी कौन नामक व्यक्ति रहनुमा होगा???
यूँ कहें ..
कौन कल उन का रहनुमा होगा ..
मक़ते में भी भाव स्पष्ट   नहीं हैं...

मैंने बहुत महीन बातें कहीं हैं ..इनपर चिन्तन करेंगे और अभ्यास करेंगे तो ग़ज़ल और निखरेगी ..
सादर 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on April 23, 2017 at 6:51am
आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी,सादर नमन,प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन के लिए सादर आभार!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on April 23, 2017 at 6:08am
आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब सादर वन्दन,प्रयास का अनुमोदन कर प्रोत्साहित करने के लिए तह-ए-दिल से शुक्रिया।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 22, 2017 at 8:30pm
जनाब सतविंदर कुमार साहिब, अच्छी गज़ल हुई है ,शेर दर शेर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें --शेर 2 के सानी मिसरे "खुद जो" की जगह "वह तो "ज़्यादा सही लग रहा है---सादर
Comment by Mohammed Arif on April 22, 2017 at 1:48pm
पत्ति जब शाख से गिरा होगा
दर्द कुछ तो उसे हुआ होगा । वाह!वाह!!वाह!!! लाजवाब शे'र
हाथ में आज जिसके पत्थर है
उसका कल कौन रहनुमा होगा । वाह!वाह!!सच है आज कश्मीर के हाथों में पत्थर ही तो है । बिल्कुल सामयिक शे'र कहा ।
ढेरों मुबारकबाद आदरणीय सतविंद्र जी ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"शुभ प्रभात,  आदरणीय! चौपाई छंद:  भेदभाव सच सदा न होता  वर्ग- भेद कभी सच न…"
36 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद +++++++++ करे मरम्मत जूते चप्पल। काम नित्य का यही आजकल॥ कटे फटे सब को सीता है। सदा…"
43 minutes ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
12 hours ago
Admin posted discussions
12 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Feb 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service