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कसमें चलो मासूम लें ....गीत /डॉ० प्राची

लिख दें इबारत इश्क की, 
आओ ज़रा सा झूम लें..

इक दूसरे को जी सकें, कब वक़्त ही इतना मिला 
बस दूरियाँ थामे रहीं नज़दीकियों का सिलसिला,
कुछ पल मिले हैं साथ के आओ इन्हें जी लें अभी 
हमको मिलें ये पल न जाने ज़िंदगी में फिर कभी,

ले उँगलियों में उँगलियाँ 
आओ ज़रा सा घूम लें ...

लिख दें...

जब प्यार के एहसास के पहलू कई हैं अनछुए 
क्यों पूछते हैं आप फिर गुमसुम भला हम क्यों हुए ?
सपने हमारे अश्क़ बन बहने लगें तो क्या करें 
जब अनसुनी हर बात हो तो हौसला कैसे धरें ?

अब छोड़ कर शिकवे गिले 
क़समें चलो मासूम लें।
लिख दें ...

लब कँपकपा कर थम गए, ख़ामोशियाँ कहने लगीं,
नज़रें मिलीं पलकें गिरीं, सरगोशियाँ बहने लगीं,
जब धड़कनों की ताल पर हर साँस का संगीत है,
तब क्या सही औ' क्या गलत, जो हो रहा है रीत है,

दिल चाहता है आज फिर 
थामें हथेली चूम लें।
लिख दें ...

मौलिक और अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 9, 2017 at 7:11am

आदरनीया प्राची जी , खूब सूरत प्रेम गीत के लिये आपको हार्दिक बधाई ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 7, 2017 at 7:06am

वाह वाह..
बहुत खूब गीत बना है ..
बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 6, 2017 at 6:27pm

सुंदर गीत लिखा प्रिय प्राची जी बहुत बहुत बधाई |

Comment by Mohammed Arif on April 5, 2017 at 9:58pm
आदरणीया प्राची सिंह जी आदाब, प्यार के रंग में शिद्दत से डूबे इस गीत लिए हार्दिक बधाई । सच्चा प्यार आज सबको कहाँ नसीब है, खुश नसीब होते हैं वो जो सच्चे प्यार का निर्वाह करते हैं ।

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