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अब भी कुछ संभावनाएँ शेष हैं (ग़ज़ल)

2122 2122 212

जानता हूँ आपदाएँ शेष हैं।
क्यों डरूँ?जब तक दुआएँ शेष हैं।

जन्म लेते ही रहेंगे राम-कृष्ण,
जब तलक धरती पे माँएँ शेष हैं।

कोशिशें तो आप सारी कर चुके,
अब तो केवल प्रार्थनाएँ शेष हैं।

सूर्य ढलने को अभी कुछ वक़्त है,
अब भी कुछ संभावनाएँ शेष हैं।

बोलिये! इस दौर में कैसे जिये?
जिसके दिल में भावनाएँ शेष हैं।

मंदिरों से देवता ग़ायब हुए,
मूर्तियों में आस्थाएँ शेष हैं।

बस्तियाँ तो बाढ़ में गुम हो गयीं
हाँ! मगर, परियोजनाएँ शेष हैं।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 18, 2016 at 4:24pm

बोलिये, इस दौर में..  इस शेर के मूल विन्यास को यदि बहुवचन कर दिया जाय तो यह वाकई बहुआयामी शेर हो सकता है. भाई जयनित अच्छी ग़ज़ल हुई है. कई शेर अच्छे बन पड़े हैं और आपके दौर और माहौल का प्रतिनिधि हैं. यह क़ाबिले-ग़ौर बात है.

शुभेच्छाएँ 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 17, 2016 at 9:39pm

badhiaa prasytuti , vaa---h

Comment by जयनित कुमार मेहता on August 17, 2016 at 6:33pm
आदरणीया कल्पना जी, हार्दिक धन्यवाद आपको।
Comment by जयनित कुमार मेहता on August 17, 2016 at 6:07pm
आदरणीय धर्मेन्द्र जी, हार्दिक धन्यवाद आपको।
Comment by जयनित कुमार मेहता on August 17, 2016 at 6:06pm
आदरणीय शेख जी, आपके उद्गारों के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ।
Comment by जयनित कुमार मेहता on August 17, 2016 at 6:04pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, आपकी सराहना पाकर अत्यधिक प्रसन्नता हुई। बहुत बहुत आभारी हूँ आपका। सादर!
Comment by Samar kabeer on August 17, 2016 at 3:36pm
जनाब जयनित कुमार मेहता जी आदाब,बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई है, हर शैर क़ाबिल-ए-दाद है, ढेरों मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
'सूर्य ढलने को अभी कुछ वक्त है'इस मिसरे में "को"की जगह "में" करने से शैर और सुंदर हो सकता है, देखियेगा ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 17, 2016 at 9:13am
बहुत खूब आदरणीय जयनित जी । हार्दिक बधाई ।
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on August 16, 2016 at 10:17pm

बहुत ख़ूब आदरणीय जयनित जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है, दाद कुबूल कीजिए।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 16, 2016 at 6:02pm
अब रहा क्या शेष है?? ग़ज़ल बन पड़ी विशेष है । खेद है, रोष है, शिक़ायत है, परामर्श है, बेहतरीन ग़ज़लकार को अब कहना क्या शेष है। बहुत बहुत हार्दिक बधाई आपको आदरणीय जयनित कुमार मेहता जी।

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