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सरकारी अनुदान - ( लघुकथा ) -

सरकारी अनुदान - ( लघुकथा )  -

"अरी ओ कुसुमा, अभी तू इधर ही खड़ी है! जल्दी से फारिग होकर आजा! देख सूरज निकल आया है"!

"वही तो सोच रही हूं अम्मा, किधर जायें,चारों तरफ़ तो खेत खलिहान में आदमी लोग दिख रहे हैं"!

"इसलिये तो कहते हैं बिटिया कि अंधियारे में ही हो आया करो"!

"अम्मा, तुम तो खुद ही देख चुकी हो कि पिछले महीने दो लड़कियों को जंगली जानवर उठा ले गये"!

"अरे बिटिया, गाँव देहात में यह सब कहानी किस्से तो चलते ही रहते हैं!कौन जाने सच क्या है"!

"पर अम्मा, तुम घर में शौचालय क्यों नहीं बनवा लेती!अब तो सरकार भी अनुदान देती है"!

"सोच तो हम भी यही रहे हैं, बिटिया!पर वह अनुदान मंजूर करवाने के लिये जो अनुदान देना पड़ता है, वह कहाँ से लायें"!

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on August 3, 2016 at 11:53am

हार्दिक आभार आदरणीय डॉ विजय शंकर जी!लघुकथा को समय देने एवम उसके विषय की विस्तृत विवेचना हेतु विशेष आभार!

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 2, 2016 at 10:18pm
बजट / अनुदान के वितरण की एक कार्यशैली होती है।
- " बजट /अनुदान चाहिए ?"
- " आइये , हमारा हिस्सा दे जाइये , "
- " अपना हिस्सा ले जाइये। "
प्रस्तुति पर बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह जी , सादर।
Comment by TEJ VEER SINGH on August 2, 2016 at 9:52pm

 हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 1, 2016 at 9:32pm

भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर क्ररारा कटाक्ष करती हुई बेहतरीन लघु कथा हार्दिक बधाई आद० तेजवीर सिंह जी |

Comment by TEJ VEER SINGH on August 1, 2016 at 8:52pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब  जी!

Comment by Samar kabeer on August 1, 2016 at 1:49pm
जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,"वो अनुदान मंज़ूर करवाने के लिये जो अनुदान देना पड़ता है वो कहाँ से लाएं"
वाह बेहतरीन तंज़, क्या बात है, इस शानदार लघुकथा के लिये दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by TEJ VEER SINGH on August 1, 2016 at 12:37pm

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on August 1, 2016 at 12:36pm

हार्दिक आभार आदरणीय नीता कसार जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on August 1, 2016 at 12:36pm

हार्दिक आभार आदरणीय कल्पना जी!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 1, 2016 at 12:14pm

भ्रष्टाचार यहाँ  जोंक की तरह फ़ैल चुका है | इसके चलते सारी  सरकारी प्रयास नाकाम  हो  रहे  है  | अच्छी सन्देश देती लघु कथा 

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