For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज़बाँ दिल की सुख़नवर बोलता है (ग़ज़ल)

1222 1222 122

ज़बाँ दिल की सुख़नवर बोलता है
वो सारी बातें खुलकर बोलता है

हमारी खाक़सारी की बदौलत
जिसे देखो, अकड़कर बोलता है

वो, जिसको पूजती है सारी दुनिया
ये नादाँ उसको पत्थर बोलता है

सियासत से जो वाकिफ़ ही नहीं है
सियासी मसअलों पर बोलता है

ज़ुबाँ का ज़ह'र बाहर आ न जाए
वो ले के मुँह में शक्कर, बोलता है

जुबानें कट चुकी हैं क़ायदों की
यहाँ अब सिर्फ पॉवर बोलता है

तुम्हारा शीशा-ए-दिल चूर होगा
ज़माना मुझसे अक़्सर बोलता है

Views: 559

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 18, 2016 at 10:40pm

अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय जयनित जी, दाद कुबूल करें

Comment by Ravi Shukla on July 4, 2016 at 2:48pm

आदरणीय जयनित जी बहुत ही अच्‍छी गजल कही है आपने बधाई स्‍वीकार करेंं

हमारी खाक़सारी की बदौलत
जिसे देखो, अकड़कर बोलता है बढिया बात कहीे आने बधाई ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 4, 2016 at 2:38pm

भाई जय्नित जी ..इस सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें .

Comment by जयनित कुमार मेहता on June 15, 2016 at 6:33pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, आपकी उपस्थिति व सराहना के लिए आभारी हूँ।
सादर!
Comment by जयनित कुमार मेहता on June 15, 2016 at 6:32pm
आदरणीया राजेश कुमारी जी,मेरी रचना पर उपस्थित होने व अपना विचार रखने के लिए हार्दिक आभारी हूँ आपका।
सादर!!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 15, 2016 at 9:46am

आदरणीय जयनित भाई , शुरू त आखिर हरेक शे र के लिये आपको दिल से बधाइयाँ ! लाजवाब गज़ल हुई है ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 13, 2016 at 11:53am

वो, जिसको पूजती है सारी दुनिया
ये नादाँ उसको पत्थर बोलता है----वाह वाह बहुत खूब 

बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही है जयनित भैया हार्दिक बधाई 

चौथे शेर में तकाबुले रदीफ़ दोष देख लें 

सियासत से जो वाकिफ़ ही नहीं है---नहीं वो कर सकते हैं 

मकते के उला की बह्र पर संदेह हैं 

Comment by जयनित कुमार मेहता on June 12, 2016 at 7:40pm
क्षमा चाहता हूँ,
"मौलिक व अप्रकाशित" लिखना भूल गया।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
8 hours ago
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
9 hours ago
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service