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शहर में आ गया पर भूला नहीं गाँव दोस्तों

२१२२ १२२२ २१२२ १२१२

शहर में आ गया पर भूला नहीं गाँव दोस्तों 

भूल सकता नहीं पीपल की मैं वो छाँव दोस्तों 

खेल के नाम पे होती है सियासत ही बस यहाँ 

चल नहीं सकता मेरा कोई यहाँ दाँव दोस्तों 

सजदा करने में भी आती है शरम सबको आजकल 

कोई बूढों के झुक के छूता नहीं पाँव दोस्तों 

माँ ने जिस बाँध के सहरा है बसाया मेरा जहाँ 

मैं उसी माँ की भी बैठा ही नहीं ठाँव दोस्तों 

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 6, 2015 at 12:51pm

प्रिय कृष्णा जी ..आप सब के इस स्नेह से ही मन कुछ न कुछ लिखने को प्रेरित करता रहता है ..रचना पर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद सादर 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on October 5, 2015 at 6:15pm
कठिन काफिये में..बेहतरीन गजल कही है आदरणीय आशुतोष सर..शेर दर शेर दाद काबुल फरमायें।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 5, 2015 at 12:41pm

आदरणीय डॉ रूपेंद्र जी ..रचना को आपका स्नेह मिला इससे मुझे रचनाधर्मिता की उर्जा मिली है ..आपको सादर धन्यवाद 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 5, 2015 at 12:39pm

आदरणीय श्याम जी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 5, 2015 at 12:39pm

आदरणीय गिरिराज भाईसाब ..रचना पर आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभारी हूँ, बहर के बिषय में मुझे भी जानकारी नहीं है बिद्वत जनो की प्रतिक्रिया से ही जानकारी होगी ..उसकी प्रतीक्षा रहेगी सादर प्रणाम के साथ 

Comment by Dr.Rupendra Kumar Kavi on October 3, 2015 at 5:04pm
kya khoob likha hai janab ne
Comment by Shyam Narain Verma on October 3, 2015 at 2:53pm

"क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को "

सादर 


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Comment by गिरिराज भंडारी on October 3, 2015 at 1:35pm

आदरणीय आशुतोष भाई , अच्छी ग़ज़ल हुई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ! बहर मान्य है नहीं मै नही कह सकता , मै पहली बार इस बहर मे गज़ल पढ़ रहा हूँ , जानकार ही बता सकते हैं ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 3, 2015 at 9:56am

महर्षि जी ..रचना पर आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 3, 2015 at 9:55am

आदरणीय डॉ कँवर जी ..रचना पर आपकी प्रतिक्रिया से मैं उत्साहित हूँ स्नेह यूं ही बनाये रखियेगा सादर धन्यवाद के साथ 

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