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गिरने की कीमत (लघुकथा)

दो गायक महीनों बाद सवेरे की सैर पर साथ निकले|

एक ने पूछा, "तुमने शास्त्रीय संगीत छोड़ कर ये घटिया राग अलापना क्यों शुरू किया?"

दूसरे ने कहा, "शास्त्रीय संगीत ने आत्मा को चैन और अमन की दौलत दी, लेकिन मेरी पत्नी और बच्चे भूखे रहे| अब मेरे गानों को गली में घूमने वाले गाते हैं, पान की दुकानों और वाहनों में बजता है, बच्चे उन पर नृत्य करते हैं.... और अब देखो कल ही ये खरीदा है|"

उसने एक बड़े से मकान की ओर इशारा किया, जिसे देखते ही पहले के फटे कपड़ों में से शास्त्रीय संगीत की आत्मा

निकल छूटी|

(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 21, 2017 at 9:27pm

बहुत बढ़िया आदरणीय चंद्रेश भैया | हार्दिक बधाई आपको इस कथा के लिए | सच में ऐसा ही हो रहा है |

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on August 13, 2015 at 11:48am
हृदय से आभार आदरणीय डॉ. नीरज शर्मा जी, आदरणीय ओमप्रकाश जी क्षत्रिय सर, आपने रचना को पसंद कर सकारात्मक टिप्पणी द्वारा मुझे प्रोत्साहन दिया|
Comment by Omprakash Kshatriya on August 12, 2015 at 9:27pm

आ चंद्रेश जी हर बार की तरह इस बार भी बढ़िया लघुकथा हुई है .

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on August 5, 2015 at 5:43pm

आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी, आपका हृदय से आभार आपने लघुकथा को पसंद किया और अपने शब्दों  द्वारा मेरा मनोबल बढाया|

Comment by Dr. (Mrs) Niraj Sharma on August 5, 2015 at 5:42pm

बहुत अच्छा विषय व प्रस्तुति आ.चंद्रेश कुमार जी

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on August 4, 2015 at 9:50pm

बेहतरीन लघुकथा हुई है!

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on August 4, 2015 at 8:43pm

रचना  को  पसंद  करने  और अपनी अमूल्य टिप्पणी देकर मुझे  कृतार्थ करने हेतु मैं आप सभी का हृदय से आभारी हूँ, आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, आदरणीया राजेश कुमारी जी, आदरणीया प्रतिभा पांडे जी, आदरणीया  अर्चना त्रिपाठी जी, आदरणीय तेजवीर सिंह जी सर|

Comment by TEJ VEER SINGH on August 4, 2015 at 10:17am

आदरणीय चंद्रेश जी, बहुत शानदार लघुकथा!हार्दिक बधाई!आज का कलाकार यह जान चुका है कि चूल्हा जलाना कितना अनिवार्य है केवल वाह वाही से पेट नहीं भरता!

Comment by Archana Tripathi on August 4, 2015 at 12:17am
उत्कृष्ट और दमदार कथा के लिए हार्दिक बधाई chandresh kumar ji
Comment by pratibha pande on August 3, 2015 at 7:50pm
आज के शास्त्रीय संगीत का सीन दस साल पहले के सीन से एकदम भिन्न हैं . कई ख्याति लब्ध बॉलीवुड गायक इस संगीत की अहमियत समझ इसकी ओर लौट रहे हैं लम्बे समय तक संगीत में टिके रहने के लिए इसकी कितनी अहमियत है ये सब गायक जानते हैं और मानते हैं चाहे वो रॉक गाते हैं या पॉप . और आज के समय में वो फटेहाल तो बिलकुल नहीं हैं . बधाई इस रचना के लिए आ० चंद्रेश जी

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