For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सांझ की सौतेली दुहिता....निशा,
अति हृष्ट-पुष्ट,
द्वेष में लिप्त अति उर्वरा
सघन तम में भी फलती है,
असंख्य नखत
अभावों में जीते, रह-रहकर चमकते
दम्भ में हठी
राहू-केतु-भद्रा सी उप-िस्थति
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को विचलित करते
चन्द्र अति शक्तिशाली किन्तु क्षीण
विपक्ष का नेता शशि शापित
उच्चताप में भी चन्दन
विषधारियों से आच्छादित
क्षण भर की लापरवाही से सौरभ छीन लेता
......बुद्धि-मन-प्राण भी,
तन.....बर्फ सा कठोर
चॉदनी उफ तक नहीं करती
रजनी, स्वछन्द विचरती
अनन्त आकाश से वियावान वन में,
जल में
अन्तर्मन के आंगन में खेलती.
सत्य, सजग सावधान,
समाधि में लीन
रजनीचर अति उत्तेजित,
यज्ञ विध्वंश करते
बचा न पाते अशोक वाटिका
हनुमान की पूंछ सी लिपी-पुती सड़क
धधक कर जल उठती
चॉदनी असहाय ...नित्य राख सी उड़कर
स्याह मन की तख्ती पर लिखना चाहती
आत्मा का दर्द
पूस की रात इन्तजार नहीं करती
गला देती है,
कठोर अस्थि भी,
आत्मा कराह उठती
दामिनी चित्र सी चिपक जाती
यत्र-तत्र, सर्वत्र....दीवारों से झांकती
तारे जमीन पर झिलमिलाते.....
समूहों में
खोजते स्वयं का भविष्य!
आक्रोशित इंडिया गेट ........किंकर्तव्यविमूढ!
सहसा स्वर गूंजा.....
अब न सहेंगे।

के0पी0सत्यम/ मौलिक व अप्रकाशित

Views: 780

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 10, 2015 at 9:37pm

आ0 सौरभ सरजी, आपका हार्दिक आभार. सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 6, 2015 at 2:01am

भाई केवल प्रसादजी, आपकी कविता से निस्सृत आक्रोश सदिह आक्रोश है इस क्रोध का समाज में व्यापना आवश्यक है. अतः स्वागत है.  
परन्तु कविता की भाषा आक्रोश और उसके तेवर को सँभाल नहीम् पाती. सहज शब्दों में वैचारिक प्रवाह को सस्वर करना था.
आपकी प्रस्तुति के भाव वस्तुतः सच्चे हैं. हार्दिक बधाई स्वीकारें भाईजी.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 24, 2015 at 7:31pm
आपका हार्दिक आभार, जान भाई जी....मेरा तात्पर्य नारी का अस्थित्व, सुरक्षा,और स्वतंत्रता के सापेक्ष उसकी दुर्दशा से है. सादर
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 21, 2015 at 9:34am

आ० केवल सर आपके विचार इतने सघन हो गये है की मै समझने में असमर्थ महसूस कर रहा हूँ! मेरी कमी है!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 19, 2015 at 6:16pm

आ0 महिर्शि भाई जी  प्रणाम! आपका बहुत-बहुत आभार, सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 19, 2015 at 6:15pm

आ0 गोपाल भाई जी  प्रणाम! आपका बहुत-बहुत आभार, सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 19, 2015 at 6:13pm

आ0 समर भाई जी  प्रणाम! आपका बहुत-बहुत आभार, सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 19, 2015 at 6:12pm

आ0 कांता  जी  प्रणाम! आपका बहुत-बहुत आभार, सादर

Comment by maharshi tripathi on June 18, 2015 at 7:28pm

चॉदनी असहाय ...नित्य राख सी उड़कर
स्याह मन की तख्ती पर लिखना चाहती
आत्मा का दर्द,,,,,बहुत बहुत बधाई आ. Kewal Prasad जी |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 18, 2015 at 6:39pm

बड़ा ही बौखलाया आक्रोश है जो आजकल आपकी कविता में देखने को मिल रहा है . आ० केवल जी  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Monday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Sunday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
Sunday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service