For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

देखना तुझको मुसीबत तो नहीं

देखना तुझको मुसीबत तो नहीं
है मुहब्बत ये शरारत तो नहीं

मर मिटे उसके बदन पर वो मगर
चाहना बस हुश्न चाहत तो नहीं

हार बैठा हूँ जिगर पर ये बता
गैर से तुझको मुहब्बत तो नहीं

छोड़ आया हूँ सभी दुनिया-जहाँ
अब तुझे मुझसे शिकायत तो नहीं

तोड़ के रिश्ते मिले किसको सुकूं
इश्क चाहत है बगावत तो नहीं

देख कर क्यूँ आह भरते हो सनम
इश्क अंदाजे अदावत तो नहीं

खेलना दिल से नहीं आता मुझे
भूलना तेरी "प" आदत तो नहीं

सच छुपा कर झूठ कहना है खता
बात देगी दर्द राहत तो नहीं

जो तुझे रब ही मानता हो उसे
छोड़ जाना यूँ शराफत तो नहीं

मुस्कुराते हो बहुत क्यूँ दीप यूँ
ये छुपी सी दिल-ए-वहशत तो नहीं

संदीप पटेल "दीप"

Views: 360

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 2, 2012 at 11:15pm

तोड़ के रिश्ते मिले किसको सुकूं 
इश्क चाहत है बगावत तो नहीं 

देख कर क्यूँ आह भरते हो सनम
इश्क अंदाजे अदावत तो नहीं 

संदीप जी ये आप का अंदाज बड़ा प्यारा लगता है ...सुन्दर गजल   ..जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 

 

Comment by Rekha Joshi on July 2, 2012 at 12:36pm

जो तुझे रब ही मानता हो उसे
छोड़ जाना यूँ शराफत तो नहींउम्दा गजल संदीप जी,बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on July 1, 2012 at 11:58pm

जो तुझे रब ही मानता हो उसे
छोड़ जाना यूँ शराफत तो नहीं

देखना तुझको मुसीबत तो नहीं
है मुहब्बत ये शरारत तो नहीं

शानदार गज़ल में इन दो अश'आरों ने दाद देने को मजबूर कर दिया.

शक  हो  रहा  है  ,   जरा  सच कहो

मोहब्बत का पहला ये खत तो नहीं

Comment by Raj Tomar on July 1, 2012 at 7:49pm

उम्दा गज़ल है पटेल साब. और ये भी अच्छी बात है.
हार बैठा हूँ जिगर पर ये बता
गैर से तुझको मुहब्बत तो नहीं. "
मतलब अभी ही बता दो. कहीं हमारी सारी मेहनत पर पानी तो नहीं फिर जायेगा. :p
वाह वाह.. :)

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहा पंचक - आचरण

चाहे पद से हो बहुत, मनुज शक्ति का भान। किन्तु आचरण से मिले, सदा जगत में मान।। * हवा  विषैली  हो …See More
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई तिलक राज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। 9, 10…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। कुछ मिसरे और समय चाहते है। इस प्रयास के…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। आ. भाई तिलक राज जी के सुझाव से यह और…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई अजय जी, प्रदत्त मिसरे पर गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" आदरणीय तिलक राज कपूर साहब,  आप मेरी प्रस्तुति तक आये, आपका आभारी हूँ।  // दीदावर का…"
11 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई लक्ष्मण सिंह धानी ' मुसाफिर' साहब हौसला अफज़ाई के लिए  आपका बहुत-बहुत…"
12 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आपने खत लिखा उसका ही असर है साईंछोड़ दी अब बुरी संगत की डगर है साईं धर्म के नाम बताया गया भाई…"
15 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"ग़ज़ल पर अपनी बारीक़-नज़र से टिप्पणी करने के लिए आपका आभार आदरणीय तिलकराज जी।  एक प्रश्न है: इस…"
16 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"भूल जाता हूँ ये अक्सर कि उसे भूलना है अब किसी बात का भी होश किधर है साईं। इस पर एक उदाहरण देखें भूल…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" सुना ही था "बड़ी मुश्किल ये डगर है साईं"  राह-ए-ईमाँ का तो गुल तक भी शरर है…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service