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ग़ज़ल-गूँगा कर दिया

2122 2122 2122 212

1

 उसने मेरे ज़ख़्मों का ऐसे मुदावा कर दिया

सी के आहों का मुहाना उनको गूँगा कर दिया

2

जिसने मेरा कद बढ़ा कर सबसे ऊँचा कर दिया

 उसने सी कर लब मेरे किरदार बौना कर दिया

3

घर जलाकर अपना जिसके दर प कर दी रौशनी

उसने घबरा कर धुँएँ से शोर बरपा कर दिया

4

ख़त्म होते ही नहीं हैं ज़िन्दगी के मसअले

बैठते ही इक के दूजे ने तमाशा कर दिया

5

साथ देता ही नहीं है मेरे दिल का हौसला 

ज़िन्दगी ने ऐसे मुझको पारा पारा कर दिया

6

कर गया घर ख़ौफ़ दिल में तीरगी हुजरे में है

साफ़गोई ने ज़हाँ में इतना रुसवा कर दिया

7

ख़ास ये 'निर्मल ' ख़ुदा का हो गया तुझ पर करम

मेरे इस बीमार-ए-दिल को जो तूने अच्छा कर दिया

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Rachna Bhatia on June 11, 2022 at 7:55am

आदरणीय नाथ सोनांचली जी, ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने का हार्दिक धन्यवाद।

Comment by नाथ सोनांचली on June 9, 2022 at 5:52pm

आद0 रचना भाटिया जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by Rachna Bhatia on June 8, 2022 at 9:29pm

आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार।सर् , आपने सहीह कहा

"साथ देता नहीं है मेरे दिल का हौसला" इसमें ही शब्द छुट गया है।

"साथ देता ही नहीं है मेरे दिल का हौसला"

बाक़ी सुधार आपके कहे अनुसार कर लिए हैं।

हौसला बढ़ाने तथा इस्लाह देने के लिए बेहद शुक्रिय: सर्। 

Comment by Samar kabeer on June 8, 2022 at 3:52pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I 

 

साथ देता नहीं है मेरे दिल का हौसला ---ये मिसरा बह्र में नहीं है, शायद लिखते समय कोई शब्द छूट गया है I 

कर गया घर ख़ौफ़ दिल में और अँधेरा हुजरे में---इस मिसरे को उचित लगे तो यूँ कहें :-

'कर गया घर ख़ौफ़ दिल में तीरगी हुजरे में है '

वक़्त का "निर्मल" करम था या ख़ुदा की मर्ज़ियाँ

मेरे इस बीमार-ए-दिल को जो तूने अच्छा कर दिया---इस शे`र का सानी मिसरा बह्र में नहीं है ' इस शे`र को उचित लगे तो यूँ कहें :-

'ख़ास ये 'निर्मल ' ख़ुदा का हो गया तुझ पर करम 

तेरे इस बीमार दिल को उसने अच्छा कर दिया '

Comment by Rachna Bhatia on June 1, 2022 at 9:42pm

भाई लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी, हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 1, 2022 at 1:49pm

आ. रचना बहन सादर अभिवादन।। बहुत अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई। 

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