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ईद कैसी आई है ! ये ईद कैसी आई है !
ख़ुश बशर कोई नहीं, ये ईद कैसी आई है !

जब नमाज़े - ईद ही, न हो, भला फिर ईद क्या,
मिट गये अरमांँ सभी, ये ईद कैसी आई है!

दे रहा कोरोना कितने, ज़ख़्म हर इन्सान को,
सब घरों में क़ैैद हैं, ये ईद कैसी आई है!

गर ख़ुदा नाराज़ हम से है, तो फिर क्या ईद है,
ख़ौफ़ में हर ज़िन्दगी, ये ईद कैसी आई है!

रंज ओ ग़म तारी है सब पे, सब परीशाँ हाल हैं,
फ़िक्र में रोज़ी की सब, ये ईद कैसी आई है!

बच्चे, बूढ़े, सब जवां भी, देखते हैं हैफ़ से,
बेकसी का हाल है, ये ईद कैसी आई है!

हम गले मिलकर, मुबारकबाद भी न दे सके,
हाल ए दिल सुन न सके, ये ईद कैसी आई है!

अब न बच्चों की धमक वो, अब न है वो शोर ग़ुल,
चहचहाहट भी नहीं ! ये ईद कैसी आई है!

दोस्तों का आना जाना, महफ़िलों का दौर वो,
सब जुदा है इस बरस, ये ईद कैसी आई है!

जैसी भी है, जितनी भी है, ईद तो बस ईद है,
हो ग़रीबों पर करम, ये ईद कैसी आई है!

मुआ़फ़ कर दे या ख़ुदा, हम हैं तिरे मुजरिम बड़े,
बख़्श दे रब ईद है ! ये ईद कैसी आई है!

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on June 1, 2020 at 8:30am

रूपम जी हैफ़ का मतलब अफ़सोस, दुख, ज़ुल्म है। 

Comment by Samar kabeer on May 26, 2020 at 2:22pm

जनाब अमीरुद्दीन ख़ान 'अमीर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन इसके क़वाफ़ी ग़लत हैं ।

2122 2122 2122 212 पर कही गई इस ग़ज़ल का ये मिसरा:-

'जब नमाज़े - ईद ही, न हो, भला फिर ईद क्या'

बह्र से ख़ारिज हो रहा है,देखियेगा ।

बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 25, 2020 at 7:21pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब ।रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिये हृदय तल से आभार। सादर। 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 25, 2020 at 7:18pm

जनाब राम अवध विश्वकर्मा जी, आदाब। रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिये हृदय तल से आभार। सादर। 

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on May 25, 2020 at 6:39pm

आदरणीय भाई अमीरद्दीन जी ईद पर बहुत खूबसूरत रचना हुई है। बहुत मुबारकबाद

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 25, 2020 at 4:02pm

आ. भाई अमीरद्दीन जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 25, 2020 at 2:21pm

आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत जी 'तुरंत' जी, अहक़र की ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से शुक्रिया ।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 25, 2020 at 12:35pm

आदरणीय अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "  साहेब , आदाब | रचना में ईद के अवसर पर मन की व्यथा शिद्दत से व्यक्त हुई है , बधाई | 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 25, 2020 at 10:35am

आदरणीय भाई योगराज प्रभाकर जी, आदाब। ख़ाक़सार की ग़ज़ल "ईद कैसी आई है" को फीचर ब्लॉग में जगह मरहमत फ़रमाने के लिए आपका तहे-दिल से शुक्रिया। सादर। 

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