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अभी तुम्हारे दिल में भीड बहुत है

अभी तुम्हारे दिल में 
भीड बहुत है
काफी शोर-शराबा है
नशा -ए -दौलत का  
अदा-ए-हुस्न का 
जोश-ए-जवानी का
आना जाना भी बहुत है
दिल फेंक प्रेमियों का
अभी तुम भी परेशान हो 
सोच-सोचकर 
किसको दिल में रखूँ 
किसे नहीं 
..
मगर 
जब ये भीड छट जाये
दिल हो जाये 
खाली खाली
उस वक्त मुझे कहना 
अपने दिल में रहने को 
मैं रहुंगा तुम्हारे दिल में
क्योंकि
मुझे अकेलापन 
बहुत पसन्द है

उमेश कटारा
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 540

Comment

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Comment by umesh katara on April 13, 2015 at 8:13am

आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया जी आभार

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 12, 2015 at 9:08pm

दिल को छू जाती कविता. बधाई आदरणीय उमेश जी.

Comment by umesh katara on April 12, 2015 at 6:26pm

Dr. Vijai Shanker ji shukriya

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 12, 2015 at 5:15pm
सुन्दर प्रस्तुति , बधाई ,आदरणीय उमेश कटारा जी, सादर।

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