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Sharadindu mukerji's Blog – May 2013 Archive (2)

भारत-तीर्थ

भारत तीर्थ

 (कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कविता से क्षमायाचना सहित कुछ पंक्तियों का हिन्दी भावानुवाद)

ओ मेरे मन जागो जागो

पुण्य तीर्थ में धीरे,

भारत के जन-मानस के

सागर तीर में.

यहाँ खड़े कर बाहु प्रसारित

नर-नारायण को नमन करुँ मैं,

उदार छन्द में परम आनन्द से,

उनका आज वंदन करुँ मैं.

ध्यानमग्न है यह धरती -

नदियों की माला जपती,

यहीं नित्य दिखती है मुझको

पवित्र यह धरणी रे…

Continue

Added by sharadindu mukerji on May 10, 2013 at 12:50am — 6 Comments

तस्वीर

यह रोज़ ही की बात है

जब रात गए,

शबनम की बरसात हुआ करती है-

पात पात रात भर

वात बहा करती है,

चोरी छिपे मैंने भी देखा है

दोनों को,

जब रात से प्रभात की

मुलाक़ात हुआ करती है -

मैं तो बस दर्शक हूँ

यह एक तसवीर है.

(2)

रात की लज्जा,

चहारदीवारी के साये में,

मेरे आंगन में छुपे

कलियों के आंचल में

सिमट-सिमट जाती है -

लेकिन वह सूरज

अनायास मेरे घर की

प्राचीर को लांघ…

Continue

Added by sharadindu mukerji on May 7, 2013 at 9:30pm — 9 Comments

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