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Veena Gupta
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Veena Gupta commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नग़्मा (घटा ग़मों की वही....)
" ख़ूबसूरत नग़मा,मुबारकबाद क़ुबूल करें"
Mar 2
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सरस्वती वंदना

मात शारदे सुन ले विनती,ज्ञान चक्षु तू मेरे खोल मिट जाए सब कलुष हृदय का,वाणी में अमृत तू घोल बासंती मौसम आया है,नव-नव पल्लव रहे हैं डोल विश्व प्रेम का अंकुर फूटे,मंत्र कोई ऐसा तू बोल  ज्ञान की मन में जगे पिपासा,दे ऐसा आशीष अमोल विद्या धन ही सच्चा धन है,ऐसा न कोइ खजाना अनमोल आज खड़ी झोली फैलाए,मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल दो बूंदें दे ज्ञान सागर की,मॉं दे दे ये वर अनमोल मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल,मात शारदे कुछ तो बोल तेरी माँ अब तू ही जाने,हृदय दिया है मैंने खोल मात शारदे सुन ले विनती, ज्ञान चक्षु तू…See More
Feb 13
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post ज़िन्दगी
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 9
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ज़िन्दगी

जैसी भी हो बडी़ ख़ूबसूरत होती है ज़िन्दगी जिन्दगी में नित नए मोती पिरोती है ज़िन्दगी कहीं चंदा सी चमचम कहीं तारों सी झिलमिल और कहीं सूरज सी रौशन होती है ज़िन्दगी फूलों सी महकती कहीं, कहीं काँटों सी उलझ जाती ज़िन्दगी कहीं नदिया की चंचल धारा,कहीं सागर सी ठहरी ज़िन्दगी सुख दुख में अपने पराए की पहचान कराती है ज़िन्दगी  वक्त बदले तो राजा को भी रंक बनाती है ज़िन्दगी ना जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है ज़िन्दगी कभी सुख कभी दुख के समंदर में डुबाती है ज़िन्दगी जाने क्यों इतनी दुश्वारियों से भरी होती है…See More
Feb 7
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post प्यार का सागर
"आभार आपका कबीर जी ,रचना के अवलोकन के लिए धन्यवाद "
Dec 31, 2020
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post प्यार का सागर
"मुहतरमा वीणा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 30, 2020
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प्यार का सागर

इक मैं थी इक मेरा साथी,सुन्दर इक संसार था संसार नहीं था एक समंदर,बसता जहां बस प्यार था छोटे बडे़ सभी रिश्तों की,मर्यादा यहाँ पालन होती थी प्यार की हर नदिया का,सम्मान यहाँ पर होता था मिलती जब कोइ नदिया समुद्र से,हर्षोल्लास बरसता था बाहें फैला समुद्र भी अपनी,सबका स्वागत करता था ना जाने फिर इकदिन कैसा एक बवंडर आया था सारा समंदर सूख गया,बस मरुस्थल ही बच पाया था आज प्रयत्न मैं कर रही,मरुभूमि में कुछ पुष्प खिलाने का कुछ सुकूं जो दे सकें,स्वागत मरुभूमि में आने वालों का मौलिक/अप्रकाशित    वीणा See More
Dec 29, 2020
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धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,See More
Dec 28, 2020
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post अंतिम सत्य
"स्नेही कबीर जी एवं धामी जी,रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार "
Dec 27, 2020
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post रफ़्तारे ज़िन्दगी
"कबीर जी,रचना की सराहना के लिए धन्यवाद.आप ऐसे ही अपने सुझाव देते रहें,आभार आपका "
Dec 27, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Veena Gupta's blog post अंतिम सत्य
"आ. वीणा जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 23, 2020
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post मौन की भाषा
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 21, 2020
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post अंतिम सत्य
"मुहतरमा वीणा जी आदाब, सुंदर रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 21, 2020
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अंतिम सत्य

जीवन की इस नदिया को,बस बहते ही जाना है लक्ष्य यही है इसका इकदिन,सागर में मिल जाना है चाहे जितनी बाधाएँ हों,चाहे जितने हों भटकाव लक्ष्य प्राप्त करना ही होगा,होगा ना उसमें बदलाव मीठे पानी की नदिया इकदिन,खारा सागर बन जायेगी इसी तरह ये जीवन नदिया इकदिन,अमर आत्मा बन जायेगी पर जाने से पहले जीवन में,कुछ ऐसे मीठे काम करो नदिया जैसे सब याद करें,आत्मा अमर हो जाने दो मौलिक /अप्रकाशित    वीणा See More
Dec 19, 2020
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मौन की भाषा

मौन की भाषा सुनो,मौन मुखरित हो रहा है जाने कितने शिकवे छिपे हैं,जाने कितने हैं फसाने अपने अंतर में छुपाये,जाने कब से सह रहा है खामोशी चारों तरफ है,अब न कोइ शोर है कोइ नहीं है पास में अब,एकाकीपन का ये दौर है लग रहा है फिर भी ऐसा,ज्यों गूंजता कानों में कोइ शोर है ध्यान और एकांत ने,धीरे से फिर समझा दिया मौन तो इक शक्ति है विश्वास है नयी राहों पर देता ज्ञान का प्रकाश है एकांत मौन में मिलती नयी उर्जा सदा मौन चिंतन ही देता नये आयाम है मौन मानो खुद से खुद की इक नयी पहचान है मौन की भाषा अनूठी दे रही नव…See More
Dec 18, 2020
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post रफ़्तारे ज़िन्दगी
"मुहतरमा वीणा जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 4, 2020

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
India
Profession
House wife
About me
I live in Lucknow but last year my husband passed away so I am here with my son

Mera desh

हिंदुस्तानी नाम है मेरा,हिंदी है मेरी पहचान

भरतमाता माँ है मेरी,बसते जिसमें मेरे प्राण

प्राण बिना ज्यों व्यर्थ है जीवन,तन हो जाता है निष्प्राण

भारतीय कहलाने में ही,दुनिया में है मेरी शान

मानो या ना मानो पर,भारत है दुनिया का दिल

देख सको तो देखो,आकार भी दिल जैसा बिल्कुल

मौलिक ऐवम अप्रकाशित

           वीणा

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सरस्वती वंदना

मात शारदे सुन ले विनती,ज्ञान चक्षु तू मेरे खोल 

मिट जाए सब कलुष हृदय का,वाणी में अमृत तू घोल 

बासंती मौसम आया है,नव-नव पल्लव रहे हैं डोल 

विश्व प्रेम का अंकुर फूटे,मंत्र कोई ऐसा तू बोल  

ज्ञान की मन में जगे पिपासा,दे ऐसा आशीष अमोल 

विद्या धन ही सच्चा धन है,ऐसा न कोइ खजाना अनमोल 

आज खड़ी झोली फैलाए,मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल 

दो बूंदें दे ज्ञान सागर की,मॉं दे दे ये वर अनमोल 

मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल,मात शारदे कुछ तो बोल 

तेरी माँ अब…

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Posted on February 13, 2021 at 1:21am

ज़िन्दगी

जैसी भी हो बडी़ ख़ूबसूरत होती है ज़िन्दगी 

जिन्दगी में नित नए मोती पिरोती है ज़िन्दगी 

कहीं चंदा सी चमचम कहीं तारों सी झिलमिल 

और कहीं सूरज सी रौशन होती है ज़िन्दगी 

फूलों सी महकती कहीं, कहीं काँटों सी उलझ जाती ज़िन्दगी 

कहीं नदिया की चंचल धारा,कहीं सागर सी ठहरी ज़िन्दगी 

सुख दुख में अपने पराए की पहचान कराती है ज़िन्दगी  

वक्त बदले तो राजा को भी रंक बनाती है ज़िन्दगी 

ना जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है ज़िन्दगी 

कभी सुख कभी दुख के…

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Posted on February 7, 2021 at 3:25am — 1 Comment

प्यार का सागर

इक मैं थी इक मेरा साथी,सुन्दर इक संसार था 

संसार नहीं था एक समंदर,बसता जहां बस प्यार था 

छोटे बडे़ सभी रिश्तों की,मर्यादा यहाँ पालन होती थी 

प्यार की हर नदिया का,सम्मान यहाँ पर होता था 

मिलती जब कोइ नदिया समुद्र से,हर्षोल्लास बरसता था 

बाहें फैला समुद्र भी अपनी,सबका स्वागत करता था 

ना जाने फिर इकदिन कैसा एक बवंडर आया था 

सारा समंदर सूख गया,बस मरुस्थल ही बच पाया था 

आज प्रयत्न मैं कर रही,मरुभूमि में कुछ पुष्प खिलाने का 

कुछ सुकूं…

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Posted on December 26, 2020 at 10:54pm — 2 Comments

मौन की भाषा

मौन की भाषा सुनो,मौन मुखरित हो रहा है 

जाने कितने शिकवे छिपे हैं,जाने कितने हैं फसाने 

अपने अंतर में छुपाये,जाने कब से सह रहा है 

खामोशी चारों तरफ है,अब न कोइ शोर है 

कोइ नहीं है पास में अब,एकाकीपन का ये दौर है 

लग रहा है फिर भी ऐसा,ज्यों गूंजता कानों में कोइ शोर है 

ध्यान और एकांत ने,धीरे से फिर समझा दिया 

मौन तो इक शक्ति है विश्वास है 

नयी राहों पर देता ज्ञान का प्रकाश है 

एकांत मौन में मिलती नयी उर्जा सदा 

मौन चिंतन ही…

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Posted on December 18, 2020 at 3:33am — 1 Comment

 
 
 

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