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Veena Gupta
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Veena Gupta's blog post सरल जीवन
"आ. वीणा जी, सादर अभिवादन। सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 14
Veena Gupta commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नवयुग की नारी (गीत)- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"सुंदर ,भावपूर्ण ,यथार्थ दर्शाती रचना "
Mar 10
Veena Gupta posted a blog post

सरल जीवन

अब न रहे वो चाँदी से दिन,सोने सी वो रातें हैं बाबुल का वो प्यारा अंगना,सपनो की सी बातें हैं इसी अंगने मेंभाई बहन संग ,खेल कूद कर बड़े हुए संग संग खाना,लड़ना झगड़ना,अब बस मीठी यादें हैं चैन न था इक पल जिनके बिन,जाने कैसे बिछुड़ गए अब सब अपनी अपनी उलझन अलग अलग सुलझाते हैं चाहे कितना हृदय दग्ध हो,चाहे कितना बड़ा हो संकटहम तो बिल्कुल ठीक ठाक हैं,सदा यही दर्शाते हैं इस दिखावटी युग में यदि हम,हृदय खोल सुख दुःख बाटें निश्चय सरल जीवन होगा,सम्भव है निज ख़ुशियाँ फिर से पा जाएँ मौलिक /अप्रकाशित See More
Mar 4
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post आज का सच
"अमीर जी रचना की सराहना के लिये धन्यवाद ।आप सब सुधिजनों की सराहना से ही हिम्मत अफजाई होती है।पुनः शुक्रिया "
Dec 4, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Veena Gupta's blog post आज का सच
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, यथार्थता पर आधारित अच्छी रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Dec 4, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Veena Gupta's blog post मिथ्या जगत
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Dec 2, 2021
Veena Gupta posted a blog post

आज का सच

लव यू -लव यू कहते रहो ,मिस यू -मिस यू जपते रहो पीठ फिरे तो गो टू हैल ,नारा भी बुलंद करो नहीं रहे वो सच्चे रिश्ते ,प्यार जहां पर पलता था आज के रिश्ते बस एक छलावा,सबकुछ एक दिखावा है मात-पिता का प्यार भी अब ,लगता ज़िम्मेदारी है भाई बहन का प्यार अब बस एक नातेदारी है रिश्तों का जहां मान नहीं ,कैसा युग ये आया है कहते हैं वे हमें पुरातन ,पर नवयुग से क्या पाया है ?पति-पत्नी के रिश्तों की भी ,गरिमा अब है कहाँ बची नित होते तलाक़ों ने,परिवारों का सुख चैन मिटाया है घायल होता बच्चों का मन,छिन जाता उनका…See More
Nov 30, 2021
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Veena Gupta's blog post मिथ्या जगत
"आदरणीया"
Nov 21, 2021
Veena Gupta posted a blog post

मिथ्या जगत

मिथ्या अगर जगत ये होता ,क्यूँ कर इसमें आते हम देवों को भी जो दुर्लभ है ,वह मानुष जन्म क्यों पाते हम ज्ञानी जन बस यही बताते ,मिथ्या जग के सुख दुःख सारे पर इस जग में आ कर ही तो ,मोती ज्ञान के पाए सारे ईश्वर की अद्भुत रचना ये सृष्टि ,नहीं जानता कोई कुछ भी फिर भी ज्ञान सभी जन बाटें ,मानो स्रषटा हैं बस वे ही  जगत सत्य है या है मिथ्या ,क्यूंकर इसपर करें बहस ईश्वर प्रदत्त अमूल्य जीवन को ,जिएँ सभी हम जी भरकर उस अद्भुत कारीगर की ,रचना में कोई त्रुटि नहीं जिसका जैसा भाव है होता ,उसको बस मिलता है वही जगत…See More
Nov 19, 2021
Samar kabeer commented on Veena Gupta's blog post मुस्कुराहटें
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 6, 2021
Veena Gupta posted a blog post

मुस्कुराहटें

कहते हैं सब यही ,बस मुस्कुराते रहिए लेकिन जनाब बड़ी शातिर होती है ये मुस्कुराहट दिल का सुकून होती है,किसी की मुस्कुराहट तो चैन छीन लेती दिलों का ,कोई मुस्कुराहट प्यार का दरिया बहाती बच्चे की मासूम मुस्कुराहट और विचलित कर जाती मन को,व्यंग भरी मुस्कुराहट ना जाने क्यों लोग बेवजह भी मुस्कुराते हैं ना जाने कौन सा ग़म उस हंसी में छुपाते हैं कभी ख़ुशी से खिलखिलाते चेहरेनमी आँखों की बन आंसू ले आते हैं तो दोस्तों ये मुस्कुराहट बड़ी फ़ितरती है जो सिर्फ़ ख़ुशी नहीं,ग़म का भी इज़हार करती है कभी छू जाती है…See More
Sep 5, 2021
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post आंखें
"स्नेही धामी जी ,आभार आपका"
Jul 10, 2021
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Veena Gupta's blog post आंखें
"आ. वीणा जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jul 10, 2021
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Veena Gupta's blog post आंखें
"आदरणीया वीणा गुप्ता जी आदाब, अद्भुत। आँखों की विभिन्न भाव-भंगिमाओं का सुन्दर और सजीव चित्रण किया है आपने, ढेरों बधाईयाँ स्वीकार करें। सादर।"
Jun 30, 2021
Veena Gupta posted a blog post

आंखें

आंखें आंखें अद्भुत आंखें,नित नए रूप बदलती आंखेंसबकुछ कहतीं पर चुप रहतीं,नित नए रूप दिखाती आंखें कहीं तो ज्वालामुखी हैं आँखें,कहीं झील सी गहरी आंखें मंद मंद मुस्काती आँखें,कहीं उपहास उडा़ती आंखें हिरनी सी चंचल ये आँखें,डरी डरी सहमी सी आंखें लज्जा से भरी अवगुंठित आँखें,फिर टेढी चितवन वाली आंखें कहीं प्यार बरसाती आंखें,कहीं पर सबक सिखाती आंखें ममता भरी वो भीगी आँखें,सजदे में झुक जाती आंखें क्रोध से लाल धधकती आँखें,मेघों सी वो बरसती आंखें दैन्य भाव दर्शाती आंखें,हठ और गर्व भरी वो आंखें एक दृष्टि…See More
Jun 29, 2021
Veena Gupta commented on Veena Gupta's blog post मेरा भारत
"स्नेही चेतन जी,धामी जी,एवं समीर जी आप सभी का बहुत बहुत आभार.चेतन जी आपके सुझाव का स्वागत है आगे भी अपना योगदान देते रहें "
Jun 28, 2021

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
India
Profession
House wife
About me
I live in Lucknow but last year my husband passed away so I am here with my son

Mera desh

हिंदुस्तानी नाम है मेरा,हिंदी है मेरी पहचान

भरतमाता माँ है मेरी,बसते जिसमें मेरे प्राण

प्राण बिना ज्यों व्यर्थ है जीवन,तन हो जाता है निष्प्राण

भारतीय कहलाने में ही,दुनिया में है मेरी शान

मानो या ना मानो पर,भारत है दुनिया का दिल

देख सको तो देखो,आकार भी दिल जैसा बिल्कुल

मौलिक ऐवम अप्रकाशित

           वीणा

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सरल जीवन

अब न रहे वो चाँदी से दिन,सोने सी वो रातें हैं 

बाबुल का वो प्यारा अंगना,सपनो की सी बातें हैं 

इसी अंगने मेंभाई बहन संग ,खेल कूद कर बड़े हुए 

संग संग खाना,लड़ना झगड़ना,अब बस मीठी यादें हैं 

चैन न था इक पल जिनके बिन,जाने कैसे बिछुड़ गए 

अब सब अपनी अपनी उलझन अलग अलग सुलझाते हैं 

चाहे कितना हृदय दग्ध हो,चाहे कितना बड़ा हो संकट

हम तो बिल्कुल ठीक ठाक हैं,सदा यही दर्शाते हैं 

इस दिखावटी युग में यदि हम,हृदय खोल सुख दुःख बाटें 

निश्चय सरल…

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Posted on March 4, 2022 at 12:30am — 2 Comments

आज का सच

लव यू -लव यू कहते रहो ,मिस यू -मिस यू जपते रहो 

पीठ फिरे तो गो टू हैल ,नारा भी बुलंद करो 

नहीं रहे वो सच्चे रिश्ते ,प्यार जहां पर पलता था 

आज के रिश्ते बस एक छलावा,सबकुछ एक दिखावा है 

मात-पिता का प्यार भी अब ,लगता ज़िम्मेदारी है 

भाई बहन का प्यार अब बस एक नातेदारी है 

रिश्तों का जहां मान नहीं ,कैसा युग ये आया है 

कहते हैं वे हमें पुरातन ,पर नवयुग से क्या पाया है ?

पति-पत्नी के रिश्तों की भी ,गरिमा अब है कहाँ बची 

नित होते तलाक़ों…

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Posted on November 30, 2021 at 1:09am — 2 Comments

मिथ्या जगत

मिथ्या अगर जगत ये होता ,क्यूँ कर इसमें आते हम 

देवों को भी जो दुर्लभ है ,वह मानुष जन्म क्यों पाते हम 

ज्ञानी जन बस यही बताते ,मिथ्या जग के सुख दुःख सारे 

पर इस जग में आ कर ही तो ,मोती ज्ञान के पाए सारे 

ईश्वर की अद्भुत रचना ये सृष्टि ,नहीं जानता कोई कुछ भी 

फिर भी ज्ञान सभी जन बाटें ,मानो स्रषटा हैं बस वे ही  

जगत सत्य है या है मिथ्या ,क्यूंकर इसपर करें बहस 

ईश्वर प्रदत्त अमूल्य जीवन को ,जिएँ सभी हम जी भरकर 

उस अद्भुत कारीगर की ,रचना…

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Posted on November 19, 2021 at 4:43am — 3 Comments

मुस्कुराहटें

कहते हैं सब यही ,बस मुस्कुराते रहिए 

लेकिन जनाब बड़ी शातिर होती है ये मुस्कुराहट 

दिल का सुकून होती है,किसी की मुस्कुराहट 

तो चैन छीन लेती दिलों का ,कोई मुस्कुराहट 

प्यार का दरिया बहाती बच्चे की मासूम मुस्कुराहट 

और विचलित कर जाती मन को,व्यंग भरी मुस्कुराहट 

ना जाने क्यों लोग बेवजह भी मुस्कुराते हैं 

ना जाने कौन सा ग़म उस हंसी में छुपाते हैं 

कभी ख़ुशी से खिलखिलाते चेहरे

नमी आँखों की बन आंसू ले आते हैं 

तो दोस्तों ये…

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Posted on September 5, 2021 at 12:41am — 2 Comments

 
 
 

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"शंका निवारण करने के लिए धन्यवाद आदरणीय धामी भाई जी।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, निम्न पंक्तियों को गूगल करें शंका समाधान हो जायेगा।//अपने सीपी-से अन्तर में…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। अच्छी समसामयिक गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post गज़ल
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई इन्द्रविद्यावाचस्पति जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
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indravidyavachaspatitiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जमाने को अच्छा अगर कर न पाये, ग़ज़ल के लिए धन्यवाद।करता कहना।काश सभी ऐसा सोचते?"
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