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Veena Gupta's Blog (9)

सरस्वती वंदना

मात शारदे सुन ले विनती,ज्ञान चक्षु तू मेरे खोल 

मिट जाए सब कलुष हृदय का,वाणी में अमृत तू घोल 

बासंती मौसम आया है,नव-नव पल्लव रहे हैं डोल 

विश्व प्रेम का अंकुर फूटे,मंत्र कोई ऐसा तू बोल  

ज्ञान की मन में जगे पिपासा,दे ऐसा आशीष अमोल 

विद्या धन ही सच्चा धन है,ऐसा न कोइ खजाना अनमोल 

आज खड़ी झोली फैलाए,मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल 

दो बूंदें दे ज्ञान सागर की,मॉं दे दे ये वर अनमोल 

मॉं तू अपना ख़ज़ाना खोल,मात शारदे कुछ तो बोल 

तेरी माँ अब…

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Added by Veena Gupta on February 13, 2021 at 1:21am — No Comments

ज़िन्दगी

जैसी भी हो बडी़ ख़ूबसूरत होती है ज़िन्दगी 

जिन्दगी में नित नए मोती पिरोती है ज़िन्दगी 

कहीं चंदा सी चमचम कहीं तारों सी झिलमिल 

और कहीं सूरज सी रौशन होती है ज़िन्दगी 

फूलों सी महकती कहीं, कहीं काँटों सी उलझ जाती ज़िन्दगी 

कहीं नदिया की चंचल धारा,कहीं सागर सी ठहरी ज़िन्दगी 

सुख दुख में अपने पराए की पहचान कराती है ज़िन्दगी  

वक्त बदले तो राजा को भी रंक बनाती है ज़िन्दगी 

ना जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है ज़िन्दगी 

कभी सुख कभी दुख के…

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Added by Veena Gupta on February 7, 2021 at 3:25am — 1 Comment

प्यार का सागर

इक मैं थी इक मेरा साथी,सुन्दर इक संसार था 

संसार नहीं था एक समंदर,बसता जहां बस प्यार था 

छोटे बडे़ सभी रिश्तों की,मर्यादा यहाँ पालन होती थी 

प्यार की हर नदिया का,सम्मान यहाँ पर होता था 

मिलती जब कोइ नदिया समुद्र से,हर्षोल्लास बरसता था 

बाहें फैला समुद्र भी अपनी,सबका स्वागत करता था 

ना जाने फिर इकदिन कैसा एक बवंडर आया था 

सारा समंदर सूख गया,बस मरुस्थल ही बच पाया था 

आज प्रयत्न मैं कर रही,मरुभूमि में कुछ पुष्प खिलाने का 

कुछ सुकूं…

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Added by Veena Gupta on December 26, 2020 at 10:54pm — 2 Comments

मौन की भाषा

मौन की भाषा सुनो,मौन मुखरित हो रहा है 

जाने कितने शिकवे छिपे हैं,जाने कितने हैं फसाने 

अपने अंतर में छुपाये,जाने कब से सह रहा है 

खामोशी चारों तरफ है,अब न कोइ शोर है 

कोइ नहीं है पास में अब,एकाकीपन का ये दौर है 

लग रहा है फिर भी ऐसा,ज्यों गूंजता कानों में कोइ शोर है 

ध्यान और एकांत ने,धीरे से फिर समझा दिया 

मौन तो इक शक्ति है विश्वास है 

नयी राहों पर देता ज्ञान का प्रकाश है 

एकांत मौन में मिलती नयी उर्जा सदा 

मौन चिंतन ही…

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Added by Veena Gupta on December 18, 2020 at 3:33am — 1 Comment

अंतिम सत्य

जीवन की इस नदिया को,बस बहते ही जाना है 

लक्ष्य यही है इसका इकदिन,सागर में मिल जाना है 

चाहे जितनी बाधाएँ हों,चाहे जितने हों भटकाव 

लक्ष्य प्राप्त करना ही होगा,होगा ना उसमें बदलाव 

मीठे पानी की नदिया इकदिन,खारा सागर बन जायेगी 

इसी तरह ये जीवन नदिया इकदिन,अमर आत्मा बन जायेगी 

पर जाने से पहले जीवन में,कुछ ऐसे मीठे काम करो 

नदिया जैसे सब याद करें,आत्मा अमर हो जाने दो 

मौलिक /अप्रकाशित  

  वीणा 

Added by Veena Gupta on December 18, 2020 at 3:00am — 3 Comments

रफ़्तारे ज़िन्दगी

बड़ी तेज़ रफ़्तार है ज़िन्दगी की,मुट्ठी से फिसलती चली जा रही है 

उम्र की इस दहलीज़ पर जैसे,ठिठक सी गयी है,सिमट सी गयी है 

बीते हुए पुराने मौसम याद आ रहे हैं,हासिल क्या किया तूने समझा रहे हैं 

ऐ ज़िन्दगी तू ज़रा तो ठहर जा,जीने की कोई राह बता जा 

बचे जो पल हैं चंद ज़िन्दगी के,कैसे संवारूँ ज़रा तू बता जा 

जिन्दगी ने कहा कुछ यूँ मुस्कुरा कर,प्यार ख़ुद से तू कर ले दुनिया भुला कर 

परमात्मा से लौ तू लगा ले,जीवन का सच्चा आनन्द पा ले 

स्वर्णिम ये पल मत…

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Added by Veena Gupta on December 2, 2020 at 2:37am — 2 Comments

आइना

आइना हूं मैं तो बस ज़िन्दगी का,कहते हो तुम बुढ़ापा जिसे

जिन्दगी के सफ़र में जो भी खोया या पाया,पलटकर देखो नज़र भर उसे 

ज़िन्दगी से सदा तूने सदा ये ही शिकवे किये,ए ज़िंदगी तूने सदा दुख है दिये 

सच ये नहीं छुपेगा आइने से बिखरी थीं ख़ुशियाँ,तेरी ज़िन्दगी में 

ग़मों को सदा तूने गले से लगाया,ख़ुशियों के पल क्यों ना याद किये 

आइने में देखोगे जो ख़ुशियों के वो पल,ग़मों में भी फिर जल उठेंगे दिये

जीवन जीने की कला आप कहते हैं जिसे

उम्र का ये दौर ही है…

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Added by Veena Gupta on November 28, 2020 at 9:09am — 3 Comments

शून्य (ज़ीरो)

पूर्णता का जो है प्रतीक ,वह तो बस एक शून्य है 

शून्य है जीवन का सत्य ,शून्य ही सम्पूर्ण है 

जिस बिंदु से आरम्भ होता ,होता वहीं वह पूर्ण है 

आरम्भ जीवन का शून्य से और अंत भी बस शून्य है 

शून्य में जोड़ दो ,चाहे जितने शून्य तुम 

या निकालो शून्य में से चाहे जितने शून्य तुम 

शून्य फिर भी शून्य…

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Added by Veena Gupta on November 20, 2020 at 3:20am — 6 Comments

दीपावली

दीपोत्सव हम मना रहे

जगमग जग ये हो सारा

ज्ञान का ऐसा दीप जलायें

अज्ञान दूर हो जग से सारा

सौहार्द प्रेम का हो प्रसार

वसुधैव कुटुम्बकम का सच हो नारा

दीपक ऐसा एक जलायें

फैले प्रेम का उजियारा

(मौलिक/अप्रकाशित)

Added by Veena Gupta on November 14, 2020 at 2:00am — 4 Comments

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