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संजय गुंदलावकर
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गिरिराज भंडारी commented on संजय गुंदलावकर's blog post उम्र
"आदरनीय संजय भाई , कविता के लिये बधाई .. हाँ ये बात ज़रूर है भाव संप्रेषित सही हो पाये हैं !"
Jul 10
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on संजय गुंदलावकर's blog post उम्र
"आद0 संजय जी सादर अभिवादन। कविता सृजन का अच्छा प्रयास। बधाई।"
Jul 9
Samar kabeer commented on संजय गुंदलावकर's blog post उम्र
"जनाब संजय गुंदलावकर जी आदाब,कविता का प्रयास अच्छा है लेकिन कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया कि आप क्या कहना चाहते हैं'उस उम्र से ये उम्र की उम्र हो गई'क्या बात हुई ? बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें,और अच्छा लिखने का प्रयास करते रहें ।"
Jul 8
PARDEEP KUMAR commented on संजय गुंदलावकर's blog post उम्र
"पढ़कर अच्छा लगा । बहुत अच्छा लिखा है आपने। बधाई स्वीकार करें । धन्यवाद।।"
Jul 7
Mohammed Arif commented on संजय गुंदलावकर's blog post उम्र
"आदरणीय संजय जी आदाब ,अच्छा प्रयास लेकिन वर्तनीगत काफी अशुद्धियाँ हैं । बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 7
संजय गुंदलावकर posted a blog post

उम्र

उसने मिलते ही कहा.. उस उम्र से ये उम्र की उम्र हो गई जाने कहाँ कब कैसे वो उम्र खो गई मीठे लम्हों से जो निखरी थी खट्टे लफ्ज़ो से जो बिख़री थी जहाँ मैं तुं नहीं सिर्फ हम थे वहाँ हम नहीं सँभल पायें  चलो फिर कही ढुंढते है जिस उम्र की उम्र हो गई तुम अपने जिस्म को तराशो मै अपने बदन को खरोच कर देख लुं. शायद कोई दम घुंट कर मरा पडा सदमा मिल आये.. शायद कोई सदमा हमें देख कर जीने को तिलमिलाये चलो यहीं से उस उम्र के वापसी की निंव डाले. चलो यहीं से इस उम्र के आश की डोर सँभाले. ~संजय गुंदलावकर मौलिक और…See More
Jul 7
संजय गुंदलावकर replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक 27 में स्वीकृत लघुकथाएँ
"सारी लघुकथाओ का आलेखन बढीया तरीके से हुआ है.. मैं यहां नया ही जोईंट हुआ हुं. ज्यादातर कथाए मैने गुजराती में लिखी है. हिंदी में अभी ट्राय करुंगा. सुश्री कल्पना भट्ट जी की कठपुतली मुझे बेहद पसंद आयी. धन्यवाद."
Jul 1
संजय गुंदलावकर is now a member of Open Books Online
Jun 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Virar
Native Place
Gundlav, Dist.: Valsad, Gujarat
Profession
Management Representative

संजय गुंदलावकर's Blog

उम्र

उसने मिलते ही कहा..

उस उम्र से ये उम्र की उम्र हो गई

जाने कहाँ कब कैसे वो उम्र खो गई

मीठे लम्हों से जो निखरी थी

खट्टे लफ्ज़ो से जो बिख़री थी

जहाँ मैं तुं नहीं सिर्फ हम थे

वहाँ हम नहीं सँभल पायें 

चलो फिर कही ढुंढते है

जिस…

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Posted on July 7, 2017 at 10:30am — 5 Comments

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