For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

साथियों,
"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -1) अत्यधिक डाटा दबाव के कारण पृष्ठ जम्प आदि की शिकायत प्राप्त हो रही है जिसके कारण "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2) तैयार किया गया है, अनुरोध है कि कृपया भाग -1 में केवल टिप्पणियों को पोस्ट करें एवं अपनी ग़ज़ल भाग -2 में पोस्ट करें.....

कृपया मुशायरे सम्बंधित अधिक जानकारी एवं मुशायरा भाग 2 में प्रवेश हेतु नीचे दी गयी लिंक क्लिक करें 

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)

Views: 13409

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

लम्हा-लम्हा छला गया है मुझे ।

सिर्फ़ झाँसा दिया गया है मुझे ।         

 

रात  से  डर  के  डूब  जाता  है

फिर से सूरज बता गया है मुझे ।         

 

मैं भटक जाता, दोस्त कोई मगर

राहे-मंज़िल बता गया है मुझे ।

 

क़त्ल करने की दे के धमकी वो

आज फिर से डरा गया है मुझे  ।   

     

ये नहीं करना, वो नहीं करना

कोई समझा-बुझा गया है मुझे  ।

     

मेरी आँखों को बख़्श कर सूरज

कोई अन्धा बना गया है मुझे  ।

     

चाहे जो भी हो मुतमईन हूँ मैं

[[सब्र करना तो आ गया है मुझे]]

 

जीत ‘आकाश’ फिर दिलाकर वो

आज फिर से हरा गया है मुझे ।

     

[मौलिक / अप्रकाशित]

आदाब। बेहतरीन अशआर के साथ बेहतरीन ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब अजीत शर्मा 'आकाश' साहिब।

बहुत-बहुत आभार आपका !!!

जनाब अजीत शर्मा 'आकाश' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

मैं भटक जाता, मगर दोस्त कोई'

ये मिसरा बह्र में नहीं है ।

बहुत-बहुत आभार, आ0 समर साहब। आपका मार्ग-निर्देश न जाने कितनों के पथ-प्रशस्त कर चुका होगा !!!

पुनराभार !!!

संशोधित शे'र हाज़िर करता हूँ :-

मैं भटक जाता, दोस्त कोई मगर     [संशोधित मिसरा]

राहे-मंज़िल बता गया है मुझे ।

बहतर है ।

जनाब अजीत शर्मा साहिब,

अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद पेश करता हूँ,

तीसरे शे'र का ऊला मिसरा बह्र में नहीं है,,

आयोजन में सहभागिता के लिए बधाई,,

बहुत-बहुत शुक्रिया अफ़रोज़ भाई !!!

मैं भटक जाता, दोस्त कोई मगर [संशोधित]

ये नहीं करना, वो नहीं करना

कोई समझा-बुझा गया है मुझे  बहुत ही उम्दा और आम ज़ुबान का शे'र ।

                   शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद आदरणीय अजीत शर्मा जी ।

हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत आभार आ0 आरिफ़ साहब !!!

ये नहीं करना, वो नहीं करना

कोई समझा-बुझा गया है मुझे  ।//

     

मेरी आँखों को बख़्श कर सूरज

कोई अन्धा बना गया है मुझे  ।// वाहह आ. अजीत शर्मा 'आकाश' जी क्या कहने, हार्दिक बधाई आपको इस ग़ज़ल के लिये

बहुत-बहुत आभार आ0 शिज्जू शकूर साहब !!!

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सारगर्भित छन्द रचे हैं । हार्दिक बधाई।"
18 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई चेतन जी , रचना पर उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद। //चाहते होना जरा से दूर कैस तुम…"
25 minutes ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
" नमस्कार,  भाई  लक्ष्मण  सिंह  धामी  मुसाफिर  साहब,  "…"
45 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
"ये गरीबी कम लगी क्या, प्रभु सताने के लिये जो महामारी भयंकर ,दी रुलाने के लियेबाँध मुखपट्टा…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"आ. भाई धर्मेंद्र जी, नये रूप में बिम्ब गढ़ने के लिए हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। कोरोना पर अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post लघुकथा-- नहले पर दहला
"आ. भाई चेतन जी, अच्छी लघुकथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post नज़्म: ख़्वाहिश
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, नज्म का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई ।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: जैसे जैसे ही ग़ज़ल रुदाद ए कहानी पड़ेगी
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, प्रयास के लिए हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post गरीबी ........
"आ. भाई सुशील जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई चेतन जी, मैंने टिप्पणी में आपकी योग्यता पर प्रश्न नहीं उठाया है। गीत आप अन्य सामान्य पोस्ट…"
13 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service