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संतान (क्षणिकाएं ) ....

संतान (क्षणिकाएं ) ....

बुझ गए बुजुर्ग
करते करते
रौशन
अपने ही चिराग

.....................

कर रही
वृक्षारोपण
वृद्धाश्रम में
वृद्धों की हाथों
उनकी ही संतान

.......................

हो गया
संस्कारों का
दाहसंस्कार
मौन बिलखता रहा
कहकहों में
संतान के


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 544

Comment

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Comment by Sushil Sarna on August 17, 2019 at 7:17pm

आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। 

Comment by Samar kabeer on August 16, 2019 at 11:29am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत अच्छी क्षणिकाएँ लिखीं आपने,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on August 14, 2019 at 8:05pm

आदरणीय  vijay nikore जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। 

Comment by vijay nikore on August 14, 2019 at 1:30pm

बहुत ही खूबसूरत लिखी हैं....हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी।

Comment by Sushil Sarna on August 12, 2019 at 1:13pm

आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन पर आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का दिल से आभार। 

Comment by TEJ VEER SINGH on August 10, 2019 at 6:19pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।लाज़वाब क्षणिकायें।

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