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शृंगारिक दोहे :

शृंगारिक दोहे :


नैनों से बरखा बहे, जब से छूटा हाथ।
नींदें दुश्मन हो गईं, कब आओगे नाथ।1।

एक श्वास तुम साथ हो, एक श्वास तुम दूर।
कैसी है ये दिल्लगी, कुछ तो कहो हुज़ूर।2।

कातिल हसीन शोखियाँ, हैं आपकी हुजूर।
नज़र न कर बैठे कहीं , बहका हुआ कुसूर।3।

सावन की बौछार में, भीगा हुआ शबाब।
बहके रिंदों की कहीं, नीयत हो न ख़राब ।4।

तुम तो साजन रात के, तुम क्या जानो पीर।
भोर हुई तुम चल दिए, नैन बहाएँ नीर।5।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on May 24, 2019 at 5:35pm

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी दिलकश प्रशंसा का दिल से आभार। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 23, 2019 at 6:34am

आ. भाई सुशील जी, सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on May 22, 2019 at 7:11pm
आदरणीय narendrasinh chauhan
जी सृजन पर आपकी दिलकश प्रशंसा का दिल से आभार।
Comment by narendrasinh chauhan on May 21, 2019 at 6:54pm

हार्दिक बधाई आदरणीय । बेहतरीन दोहे।

Comment by Sushil Sarna on May 21, 2019 at 12:33pm

आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan  जी सृजन पर आपकी दिलकश प्रशंसा का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 21, 2019 at 12:33pm

आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन पर आपकी दिलकश प्रशंसा का दिल से आभार। 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 21, 2019 at 12:18pm

जनाब भाई सुशील सरना साहिब, सुंदर दोहे हुए हैं मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं 

Comment by TEJ VEER SINGH on May 21, 2019 at 10:28am

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी। बेहतरीन दोहे।

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