For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

किसी रिश्ते में हों गर तल्ख़ियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर   (१७ )

किसी रिश्ते में हों गर तल्ख़ियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
शजर पर गर हैं सूखी पत्तियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
**
बसाने को बसा लो ज़ुर्म की अपनी हसीं दुनिया
मगर बदनाम जो हों बस्तियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
***
नुमाइश कर रहे हो जिस्म की अच्छी नज़र चाहो
हुज़ूर ऐसी कभी ख़ुशफ़हमियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
***
मुसीबत, मुश्किलें, आफ़ात, चिंता और ग़म भी संग
घरोंदे में घुसी ये मकड़ियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
***
नहीं फ़र्ज़न्द को हासिल अगर कुछ काम थोड़े दिन  
मिलें  उसको हमेशा झिड़कियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
***
जलाना दिल किसी का भी कभी अच्छा नहीं होता
नमी आखों में या नम लकड़ियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
***
यही अच्छा करें बातें किसी औरत से बा-इज़्ज़त
कसोगे बे-वज़ह गर फब्तियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
***
रवैया सख़्त होगा कारगर कहना बड़ा मुश्किल
हदों से बढ़ गई गर सख़्तियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
***
दरो दीवार इज़्ज़त के सलामत रख 'तुरंत'अपने
खुली हों बिन ज़रूरत खिड़कियाँ हरगिज़ नहीं बेहतर 
***
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' बीकानेरी |
(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 733

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 27, 2019 at 12:06pm

आदरणीय Samar kabeer साहेब ,आदाब | हालाँकि आम बोल चाल के शब्द न चाहते हुए भी शायरी में घुस ही जाते हैं | उर्दू भाषा के बारे में कहा जाता है ये फौजियों की बोल चाल के कारण ही जन्मी है | लेकिन मेरे लिए आपकी बात बहुत महत्व रखती है | इसलिए इस लाइन  को इस तरह परिवर्तित कर रहा हूँ -नहीं फ़र्ज़न्द को हासिल अगर कुछ काम  थोड़े दिन | 

***

अच्छीं अगर बहुवचन में मान्य नहीं है जैसा कि मुझे भी लग रहा था | क्या रदीफ़ =हरगिज़ नहीं बेहतर सही रहेगा ?  

Comment by Samar kabeer on January 27, 2019 at 10:30am

"रोज़गार" शब्द का मुख़फ़्फ़फ़ु 'रूज़गार' लेना मेरे नज़दीक उचित नहीं,अगर आम बोलचाल के शब्द भी शाइरी में आने लगे तो,इसकी सूरत क्या से क्या हो जाएगी ,ये मेरा निजी मत है ।

'अच्छी' को "अच्छीं" नहीं किया जा सकता,

और 'अच्छी' एक वचन है,और इसके आगे पीछे ऐसा कोई शब्द नहीं जो इसे बहुवचन बना सके,इसलिए रदीफ़ कुछ और सोचियेगा ।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 26, 2019 at 11:04pm

आदरणीय Ravi Shukla जी , खाकसार का कलाम पसन्द करने और हौसला आफजाई का बेहद शुक्रिया | मुझे लगता है यदि ग़ज़ल कही जाती है तो कुछ शब्दों को बोलचाल के आधार पर प्रयोग किया जा सकता है बशर्ते उनका कोई और अर्थ न निकले | मात्रा के लिए कुछ लफ्जों के दोनों रूप ही प्रचलित है | रास्ता /रस्ता ,राह गुज़र /रहगुज़र ,राहबर /रहबर ,आदि | 

Comment by Ravi Shukla on January 26, 2019 at 10:19pm

आदरणीय गिरधारी सिंह जी  बहुत अच्छी गजल आपने कही शेर दर शेर मुबारकबाद पेश करता हूं आपने रोजगार को रुजगार की तरह इस्तेमाल किया है इस पर विद्वत जन की राय जानना चाहूंगा

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 25, 2019 at 3:12pm

आदरणीय Hariom Shrivastava जी | आप की  स्नेहिल सराहना के लिए ह्रदय तल से आभार | मुझे कुछ शब्दों में कन्फ्यूज़न रहता है कि ये शब्द हैं भी या नहीं | जैसे अच्छीं ,होतीं ,करतीं आदि | खैर आपने कन्फर्म कर दिया इसलिए रदीफ़ में संशोधन कर दिया है | यहाँ पर आपको देखकर ख़ुशी हुई | सादर नमन | 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 25, 2019 at 3:02pm

आदरणीय Samar kabeer जी पहले यही रदीफ़ लिया था जो आपने बताया है- "अच्छी नहीं हरगिज़" लेकिन गेयता के हिसाब से अंत में हरगिज़ ठीक नहीं लग रहा था | इसलिए अंत में अच्छी किया | अच्छी बीच में लेने से क्या  बहुवचन का प्रभाव ख़त्म  हो जाएगा ? इससे तो अच्छा है अगर अच्छीं शब्द है तो फिर यही कर देता हैं | 

Comment by Hariom Shrivastava on January 25, 2019 at 1:36pm

वाह,वाहहह,बहुत सुंदर ग़ज़ल। आपका हार्दिक स्वागत आदरणीय  गहलोत जी। 'अच्छी' की जगह 'अच्छीं' होना चाहिए। 'अच्छीं' बहुवचन है।

Comment by Samar kabeer on January 25, 2019 at 10:31am

इसका उपाय है कि रदीफ़ इस तरह कर लें 'अच्छी नहीं हरगिज़'

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 25, 2019 at 9:14am

आदरणीय Samar kabeer जी , आदाब | आपकी हौसला आफजाई के लिए शुक्रगुज़ार हूँ | दरअसल में असमंजस में हूँ कि अच्छीं कोई शब्द है या नहीं | ज्यादातर अच्छी और अच्छा यही शब्द प्रयुक्त होते देखा है | आपकी बातें सुनने में अच्छी लगती हैं | यहाँ बातें बहुवचन के साथ अच्छी ही प्रयोग हुआ | हालाँकि हैं से बहुवचन का काम हो गया | तन्हाईयाँ किसको अच्छी लगने वाली हैं |हमने लोगों को अच्छी अच्छी बातें बताई | यहाँ भी अच्छी प्रयोग हुआ | इसलिए मुझे भ्रम हो जाता है कि अच्छीं शब्द है या नहीं | कृपया मार्गदर्शन करें |  इसी तरह होती और होतीं में भी मुझे कन्फ्यूजन रहता है |मिलें सही कर रहा हूँ | सादर आभार | 

Comment by Samar kabeer on January 24, 2019 at 11:32pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें 

एक बात बताइयेगा कि ग़ज़ल का क़ाफ़िया बहुवचन में है और रदीफ़ 'अच्छी' एक वचन है?

'मिले उसको हमेशा झिड़कियाँ हरगिज़ नहीं अच्छी'

इस मिसरे में 'मिले' की जगह "मिलें" होना चाहिए न ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
yesterday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Tuesday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service