For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इस गीत के साथ ओबीओ परिवार के सभी मनीषियों को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं

सारा जग उजियारा कर दे
दीप कहाँ से लाऊँ

अंधकार ने फन फैलाया
मैला हर इक मन है
सूरज भी गुमसुम सा बैठा
विस्मित नील गगन है
मन को मनका मोती कर दे
सीप कहाँ से लाऊँ
सारा जग उजियारा कर दे
दीप कहाँ से लाऊँ

गली गली में घूमे रावण
हर घर में इक लंका
प्यार मुहब्बत भाईचारा
मिटने की आशंका
कण कण राम बिराजें ऐसा
द्वीप कहाँ से लाऊँ
सारा जग उजियारा कर दे
दीप कहाँ से लाऊँ
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 879

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 9, 2018 at 10:12am

बहुत बहुत आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी...सादर

Comment by TEJ VEER SINGH on November 8, 2018 at 6:50pm

हार्दिक बधाई आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज'जी। बेहतरीन गीत।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 8, 2018 at 4:50pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय डा. साहब..सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 8, 2018 at 4:49pm

आदरणीय शेख साहब आपके सुन्दर शब्दों से अति प्रसन्नता हुई..सादर आभार

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 8, 2018 at 4:48pm

आदरणीय समर जी रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 8, 2018 at 4:47pm

स्वागत संग आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी..

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 8, 2018 at 4:46pm

तहेदिल से शुक्रिया ज़नाब राज साहब...

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 7, 2018 at 9:27pm

आदरणीय बृजेश जी बहुत अच्छी रचना लिखने के लिए बहुत बहुत बधाई

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 7, 2018 at 8:19pm

//मन को मनका मोती कर दे , सीप कहाँ से लाऊँ। सारा जग उजियारा कर दे , दीप कहाँ से लाऊँ।// बेहतरीन शुभकामनाएं। बेहतरीन सृजन। हार्दिक बधाई और दीपोत्सव पर हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब।

Comment by Samar kabeer on November 7, 2018 at 5:08pm

जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब,बहुत उम्दा गीत हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

आपको भी दीपोत्सव की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
18 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service