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गोधूलि की बेला में (लघु रचना ) ....

मैं
आस था
विश्वास था
अनभूति का
आभास था
पथ पथरीला प्रीत का
लम्बा और उदास था
जाने किसके हाथ थे
जाने किसका साथ था
गोधूलि की बेला में
अंतिम जीवन खेला में
आहटों की देहरी पर
अटका
मेरा
श्वास था

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 923

Comment

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Comment by Sushil Sarna on August 14, 2018 at 2:30pm

आदरणीय मिर्ज़ा जावेद बैग साहिब प्रस्तुति को आत्मीय मान देने का दिल से शुक्रिया।

Comment by Samar kabeer on August 14, 2018 at 12:11pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत सुंदर लघु रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on August 14, 2018 at 8:00am

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,

                            बहुत ही सुंदर और पावन अनुभूति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by mirza javed baig on August 13, 2018 at 8:22pm

आदर्णीय सुशील सरना जी आदाब "बहतरीन प्रस्तुति "बधाई स्वीकार करें ।

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