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मचल उठा जो दिल जवां ख़ुदा न ख़्वास्ता (ग़ज़ल 'राज')

1212  1212  1212  12

बहक गया अगर समां ख़ुदा न ख़्वास्ता 
बिखर गया अगर जहाँ ख़ुदा न ख़्वास्ता

चिराग़ हम लिये खड़े यही तो सोचकर 
भटक गया जो कारवाँ ख़ुदा न ख़्वास्ता 

उठाना मत सनम निकाब मुझको देखकर 
मचल उठा जो दिल जवां ख़ुदा न ख़्वास्ता

पता चमन का तुम उसे न देना दोस्तों 
इधर मुड़ी अगर खिजाँ ख़ुदा न ख़्वास्ता

किया क्या इंतज़ाम आग को बुझाने का 
अगर उठा कहीं धुआँ ख़ुदा न ख़्वास्ता

उड़ी हुई मेरी है नींद इस ख़याल से 
बढ़ी जो अपनी दूरियां ख़ुदा न ख़्वास्ता

मिलेगा ख़ास इक सुकूं मेरे रफ़ीक को 
गिरे मेरा जो ये मकां ख़ुदा न ख़्वास्ता 

राजेश कुमारी राज 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 15, 2018 at 10:18pm

आद० सतविन्द्र भैया आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लेखन सार्थक हुआ दिल से शुक्रगुज़ार हूँ 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on June 13, 2018 at 7:55pm

आदरणीया राजेश दीदी, उम्दा गजल हुई है। हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 12, 2018 at 11:18am

आद० विजय निकोर जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया मेरी ग़ज़ल आपको पसंद आई .

Comment by vijay nikore on June 12, 2018 at 10:09am

इस प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 11, 2018 at 7:43pm

आद० नीलम जी आपको ग़ज़ल पसंद आई तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 11, 2018 at 7:42pm

आद० तेजवीर सिंह जी आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ तहे दिल से शुक्रिया आपका 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 11, 2018 at 7:41pm

आद० महेंद्र कुमार जी आपने सच कहा इस रदीफ़ ने बहुत पकाया बहुत बार लिख लिख कर मिसरे फाड़े तब जाकर बहुत मुश्किल से बन पाई क्यूंकि रदीफ़ के साथ न्याय होना बहुत जरूरी था .आपको पसंद आई बहुत बहुत शुक्रिया को सकता है कुछ वक्त के बाद बेहतर मतला दिमाग में आ जाए 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 11, 2018 at 7:38pm

आद० रक्षिता जी तहे दिल से शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 11, 2018 at 7:38pm

आद० सत्यनारायण सिंह जी आपको ग़ज़ल पसंद आई बहुत बहुत शुक्रिया .



सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 11, 2018 at 7:37pm

आद० मोहम्मद आरिफ जी आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से शुक्रगुज़ार हूँ 

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