For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सुबह जरूर आयेगी  -  लघुकथा   –

सुबह जरूर आयेगी  -  लघुकथा   –

वह रात सूरज और संध्या के जीवन की ऐसी रात थी कि दोनों की ही अग्नि परीक्षा की घड़ी आगयी थी। कौन खरा उतरेगा , यह तो ऊपर वाला ही तय करेगा ।

 दोनों की शादी को जुम्मे जुम्मे आठ दिन भी नहीं हुए थे कि दोनों ने अकेले पिक्चर देखने, वह भी नाइट शो, का प्रोग्राम बना लिया। शहर के बिगड़े माहौल को देखते हुए घर में कोई भी उनके इस फ़ैसले से खुश नहीं था। मगर सूरज की ज़िद और अति आत्मविश्वास के आगे सब चुप थे। क्योंकि वह एक फ़ौज़ी अफ़सर जो था।

फ़िल्म देखकर निकले तो सूरज की बाइक पंचर थी। रात को एक बजे बाइक को सुधरवा भी नहीं सकते थे और कहीं छोड़ने की भी व्यवस्था नहीं हो सकी। अतः बाइक को पकड़ कर दोनों पैदल ही घर चल दिये। इस समस्या के कारण दोनों ने एक छोटा मगर सुनसान रास्ता पकड़ लिया। यह उनके जीवन की भयंकर भूल साबित हुई।

रास्ते में कुछ बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया। सूरज को घायल कर हाथ पैर बांध दिये। और संध्या के साथ वह सब कुछ हुआ जो नहीं होना चाहिये था। वह भी उसके फ़ौज़ी पति सूरज की उपस्थिति में। बदमाश भाग गये।

संध्या ने हिम्मत कर सूरज के हाथ पैर खोले। दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए, अवाक स्थिति में बहुत देर तक रोते रहे। दोनों ने कुछ पल विचार विमर्श किया और घर चल दिये।

घर में सब सो चुके थे लेकिन दोनों की ऐसी अस्त व्यस्त दशा देखकर सब उठ गये। लेकिन वे दोनों मौन थे। घर वालों के तरह तरह के सवालों से त्रस्त हो रहे थे। घरवालों के प्रश्न अब क्रोध भरी झुंझलाहट में तब्दील हो रहे थे।

आखिरकार सूरज ने मुँह खोला,"कोई विशेष बात नहीं है। बाइक स्पीड में थी, पंचर होगयी। बेलेंस बिगड़ गया। बाइक स्लिप हो गयी| बस मामूली सी चोटें हैं"।

 मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 689

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on July 1, 2018 at 7:53am

हार्दिक आभार आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 29, 2018 at 12:27pm

आदरणीय तनवीर जी आपकी हर उम्दा लघु कथा की कड़ी में एक और शानदार रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर 

Comment by TEJ VEER SINGH on June 26, 2018 at 3:21pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।

Comment by Samar kabeer on June 26, 2018 at 12:10pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on June 26, 2018 at 12:03pm

हार्दिक आभार आदरणीय महेंद्र कुमार जी।

Comment by Mahendra Kumar on June 26, 2018 at 10:50am

उम्दा लघुकथा है आदरणीय तेज़ वीर सिंह जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर। 

Comment by TEJ VEER SINGH on June 26, 2018 at 6:01am

हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी साहब जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 25, 2018 at 7:47pm

बेहतरीन सृजन। हार्दिक बधाई जनाब तेजवीर सिंह साहिब।

Comment by TEJ VEER SINGH on June 25, 2018 at 3:07pm

हार्दिक आभार आदरणीय नीलम जी।आपकी विस्तार सहित विवेचनात्मक टिप्पणी पढ़कर अच्छा लगा।आपको लघुकथा का भाव और संदेश पसंद आया।मेरा प्रयास फ़लीभूत हो गया।

Comment by TEJ VEER SINGH on June 25, 2018 at 3:01pm

हार्दिक आभार आदरणीय सुशील सरना जी।आपकी शंका उचित है। रात को एक दो बजे कोई बाहर से आता है तो कोई ना कोई तो दरवाजा खोलेगा ही। फिर ऐसी दशा देखकर निश्चित ही शोर शराबा होगा तो दूसरे लोग भी जागेंगे।यह तो बहुत सामान्य सी बात है।अकसर घरों में होती है।शायद आपने कभी ध्यान नहीं दिया।सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Jan 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service