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बरसात ....

मेघों की गर्जना
चपला की अटखेलियां
फुहारों में भीगी तेज हवाएँ
वातायन के पटों का शोर
करवटों की रात
लो फिर आ गई
वस्ल की यादें लिए
फिर
आज बरसात

वो चेहरे से उसका
बूंदे हटाना
लटें सुलझाना
हौले से मुस्कुराना
सच कहाँ भूलेगी
वो शर्मीली सी बात
कि याद ले आई
फिर
आज बरसात

बारिश की बूंदों की
अजब सी अगन
स्पर्शों की आहट से
घबराया मन
न और हां की हो गयी साज़िश
समर्पण के भावों की हो गई बारिश
ले आई आज फिर
करीब तुझको मेरे
बुझती नहीं है आतिश ये दिल की
करने लगी ताज़ा
रुख़सत के लम्हे
रुला गई आँखों को
फिर
आज बरसात


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on June 21, 2018 at 1:06pm

आदरणीय विजय निकोर साहिब सृजन आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on June 21, 2018 at 1:06pm

आदरणीय तस्दीक अहमद ख़ान साहिब , आदाब ... सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। सर आपको सपरिवार ईद मुबारक. बिलम्ब के लिए क्षमा।

Comment by Sushil Sarna on June 21, 2018 at 1:05pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... प्रस्तुति के भावों को अपनी आत्मीय प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 21, 2018 at 1:05pm

आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सृजन आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on June 21, 2018 at 1:05pm

आदरणीया रक्षिता सिंह जी सृजन की गहनता को अपनी स्नेहिल प्रशंसा से मान देने का दिल से आभार।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 19, 2018 at 7:01pm

जनाब सुशील सरना साहिब, बरसात के मौसम के स्वागत में सुन्दर कविता हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |

Comment by Samar kabeer on June 17, 2018 at 12:05pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बारिश के मौसम के स्वागत में अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Neelam Upadhyaya on June 16, 2018 at 6:23pm

आदरणीय सुशिल सरना जी। सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।

Comment by रक्षिता सिंह on June 15, 2018 at 10:09pm

आदरणीय सुशील जी,

शब्दों की बौछारों से मन को भिगो देने वाली बहुत ही सुन्दर रचना । बधाई स्वीकार करें ।

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