For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तुम जो आए

पत्ते हरे हो गए

पतझड़ में ।  

 

सूखे गुलाब

किताब में अब भी

खुशबू भरे ।

 

 

माँ तो सहती

एक सा दर्द, पर  

बेटी पराई ?

 

 

बढ़ती उम्र

घटती हुई सांसें

जिये जा रहे ।

 

 

.... मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 549

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Neelam Upadhyaya on May 22, 2018 at 2:12pm

आदरणीय उस्मानी  जी, नमस्कार ।  बहुत बहुत आभार ।  आप सभी गुणीजनों के मार्गदर्शन की हमेश आकांक्षी रहूंगी। 

Comment by Neelam Upadhyaya on May 22, 2018 at 2:10pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी, नमस्कार ।  बहुत बहुत आभार । 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on May 14, 2018 at 12:55pm

बेहतरीन सृजन। इशारों में संदेश। हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आदरणीया नीलम उपाध्याय जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on May 11, 2018 at 1:01pm

हार्दिक बधाई आदरणीय नीलम जी।बेहतरीन हाइकू।

Comment by Neelam Upadhyaya on May 11, 2018 at 12:23pm

आदरणीय समर कबीर जी, बहुत बहुत आभार। 

Comment by Neelam Upadhyaya on May 11, 2018 at 12:22pm

आदरणीय मुहम्मद आरिफ जी, हाइकू की तारीफ के लिए आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Neelam Upadhyaya on May 11, 2018 at 12:20pm

आदरणीया बबिता जी, आपका बहुत आभार। 

Comment by Samar kabeer on May 11, 2018 at 11:01am

मोहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,अच्छे हाइकू हुए हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on May 10, 2018 at 6:40pm

आदरणीया नीलम उपाध्याय जी आदाब,

                                प्रेम की व्यंजना , एक माँ की पीड़ा और ढलती उम्र के दर्द की बेबसी को रेखांकित करते बेहतरीन हाइकु । हार्दिक बधाई स्वीकार करेंं ।

Comment by babitagupta on May 10, 2018 at 6:14pm

आदरणीया दी,बहुत ही उम्दा रचना,बधाई स्वीकार कीजिएगा.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
8 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
8 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
19 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service