For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज फिर वो मुझे याद आने लगे

212 212 212 212

आज फिर वो मुझे याद आने लगे ।

भूलने में जिसे थे ज़माने लगे ।।

कर गई है असर वो मिरे जख़्म तक ।

इस तरह क्यूँ ग़ज़ल गुनगुनाने लगे ।।

दिल जलाने की साज़िश बयां हो गयी ।

बेसबब आप जब मुस्कुराने लगे ।।

अब बता दीजिये क्या ख़ता हो गयी ।

ख़ाब में इस तरह क्यों सताने लगे ।।

जिनको चलना सिखाया था मैंने कभी ।

राह मुझको वही अब बताने लगे ।।

तेरे आने की उनको खबर क्या मिली।

असमा लोग सर पे उठाने लगे ।।

वो निभाएंगे कैसे मिरे इश्क़ को ।

कुछ ख़यालात उनके पुराने लगे।।

इक मुलाकत भी थी जरूरी सनम ।

मानता आपके सौ बहाने लगे ।।

मैकदा जाइये मैकदा खुल गया ।

देखिये होश में आप आने लगे ।।

जब भी देखा मैं दायां तो बायां दिखा।

आईने सच भला कब दिखाने लगे ।।

रुख से पर्दा हटा तो कयामत हुई ।

जुल्म फिर आशिकों पे वो ढाने लगे ।।

--नवीन मणि त्रिपाठी मौलिक अप्रकाशित

Views: 537

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on February 2, 2018 at 4:14pm

आ0 मु0 आरिफ साहब सादर आभार । कबीर सर आजकल ओबीओ में नहीं आ पा रहे हैं । बाकी कोई इस्लाह देने वाला व्यक्ति लगता है ओबीओ में नहीं है । यह ओबीओ की लोकप्रियता पर संकट का बादल है । 

Comment by narendrasinh chauhan on January 29, 2018 at 12:30pm

खूब सुन्दर रचना 

Comment by Mohammed Arif on January 29, 2018 at 11:16am

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,

                                        शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 29, 2018 at 8:55am

आ0 सुरेंद्र नाथ सिंह कुश क्षत्रप जी सादर आभार

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 29, 2018 at 8:55am

आ0 तेजवीर सिंह जी सादर आभार ।

Comment by नाथ सोनांचली on January 29, 2018 at 5:13am

आद0 नवीन जी सादर अभिवादन।बेहतरीन ग़ज़ल कहि आपने, बधाई आपको, इस प्रस्तुति पर।

Comment by TEJ VEER SINGH on January 28, 2018 at 10:27pm

हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल।

जिनको चलना सिखाया था मैंने कभी ।

राह मुझको वही अब बताने लगे ।।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
8 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
22 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service