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1212 1122 1212 22

गरीब खाने तलक रोटियां नहीं जातीं ।

तेरे जहान से क्यूँ सिसकियाँ नहीं जातीं ।।

कतर रहे हैं वो पर ख्वाहिशों का अब भी बहुत।

नए गगन में अभी ,बेटियां नहीं जातीं ।।

वो तोड़ सकता है तारे भी आसमाँ से मग़र ।

मुसीबतो की ये परछाइयां नहीं जातीं ।।

यकीं करूँ मैं कहाँ तक जुबान पर साहब ।

लहू से आपके खुद्दारियाँ नहीं जातीं ।।

तमाम दे के रियायत हुजूर देख लिया ।

खराब कौम से गद्दारियाँ नहीं जातीं ।।

सियासतों का ये मंजर न पूछ अब हमसे ।

सियासतों से यहाँ खामियाँ नहीं जातीं ।।

नए निज़ाम से उम्मीद और क्या करना ।

चमन से आज भी दुश्वारियां नहीं जातीं ।।

नज़र का फेर था या फिर था हादसा कोई ।

दिलो दिमाग से रानाइयाँ नहीं जातीं ।।

न जाने क्या हुआ है आपकी निगाहों को ।

मेरे वजूद से रुस्वाइयाँ नहीं जातीं ।।

जरा सँभल के रहो दुश्मनों की फितरत से ।

मिले तो हाथ मगर खाइयां नहीं जातीं ।।

मैं भूल जाऊं सभी जख़्म कोशिशें हैं मेरी ।

मगर ज़िगर की ये मजबूरियां नहीं जातीं ।।

चले गए हैं मेरी जिंदगी से जब से वो ।

मेरे दयार से खामोशियाँ नहीं जातीं ।।

-- नवीन मणि त्रिपाठी

मौलिक अप्रकाशित

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Comment by Naveen Mani Tripathi on January 29, 2018 at 9:18am

आ0 तेजवीर सिंह जी सप्रेम आभार

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 29, 2018 at 9:14am

आ0 राम अवध विश्वकर्मा जी सप्रेम आभार

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 29, 2018 at 9:00am

आ0 विजय निकोरे साहब तहे दिल से आभार 

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 29, 2018 at 8:59am

आ0 मुहम्मद आरिफ़ साहब तहे दिल से शुक्रिया

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 29, 2018 at 8:58am

आ0 सुरेंद्र नाथ सिंह कुश क्षत्रप जी सप्रेम आभार ।

Comment by नाथ सोनांचली on January 29, 2018 at 5:17am

आद0 नवीन जी अच्छी ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद। सादर

Comment by TEJ VEER SINGH on January 28, 2018 at 10:30pm

हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल।

नए निज़ाम से उम्मीद और क्या करना ।

चमन से आज भी दुश्वारियां नहीं जातीं ।।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 28, 2018 at 4:25pm

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है। बधाई

Comment by Mohammed Arif on January 28, 2018 at 7:52am

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,

                         बहुत कसे हुए अश'आरों से सजी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के ब थ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

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