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ग़ज़ल (नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का )

(फाइलातुन -फ़इलातुन-फ़इलातुन-फेलुन )

जिन से आबाद हर इक गोशा है वीराने का |
नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का |

इंतज़ारी में कटी उम्र नहीं इसका गम
रंज है आपका वादे से मुकर जाने का |

कमसे कम मेरे ख़यालों में ही आ जाया करो
वक़्त कब मिलता है तुम को मेरे घर आने का |

लाख तू मेरी वफ़ाओं को भुला दे दिल से
अज़्म मुहकम है मेरा प्यार तेरा पाने का |

कोई इक बूँद को तरसे कोई भर भर के पिए
खूब दस्तूर है साक़ी तेरे मैखाने का |

जान लेने के लिए थोड़ी सी खातिर कर दी
रात मुँह चूम लिया शमअ ने परवाने का |

तुझ से बद ज़न हुआ तस्दीक़ जो तेरा दिलबर
ग़ैर को तू ने ही मौक़ा दिया बहकाने का |

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 23, 2017 at 5:29pm
जनाब अफ़रोज़ सहर साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Afroz 'sahr' on November 23, 2017 at 4:14pm
जनाब तस्दीक़ साहिब अच्छी ग़ज़ल कही आपने शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।,,,
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 23, 2017 at 2:25pm
मुहतरम विजय साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by vijay nikore on November 23, 2017 at 11:25am

इस अच्छी गज़ल के लिए बधाई।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 21, 2017 at 6:19pm
जनाब डॉक्टर आशुतोष साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 21, 2017 at 1:50pm
आदरणीय तस्दीक़ जी इस बढ़िया ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 20, 2017 at 8:24am
मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Mohammed Arif on November 20, 2017 at 8:10am
आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,
बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 19, 2017 at 8:50pm
मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Samar kabeer on November 19, 2017 at 8:13pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई,बधाई स्वीकार करें ।

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