For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल -कहीं वही तो’ नहीं वो बशर दिल-ओ-दिलदार

काफिया :अर ; रदीफ़ :दिल –ओ- दिलदार

बहर : १२१२  ११२२  १२१२  २२(१ )

कहीं वही तो’ नहीं वो बशर दिल-ओ-दिलदार

जिसे तलाशती’ मेरी नज़र दिल-ओ-दिलदार |

हवा के’ झोंके’ ज्यों’ आते सदा सनम मेरे  

नसीम शोख व महका मुखर दिल-ओ-दिलदार |

सूना उसे कई’ गोष्टी में’, फिर भी’ प्यासा मन

अज़ीज़ है वही आवाज़ हर दिल-ओ-दिलदार |

कभी हुई न समागम, कभी नहीं कुछ बात

हिजाब में सदा रहती मगर दिल-ओ–दिलदार |

गए विदेश को’ महबूब छोड़कर मुझको

ख़याल में बसे’ चारो पहर दिल-ओ-दिलदार |

कभी नहीं सके’ हम भूल, वर्ष कई बीते

शरीर मेरा’ उसी का जिगर दिल-ओ-दिलदार |

सनम मेरे है’ निराला, अनन्य दुनिया में

जवाहरों में’ अनूठा, गुहर दिल-ओ-दिलदार |

विरह के’ शोक में. डूबी है’ प्रेयसी ‘काली’

उसे नहीं पता’ कुछ, वज्द बेखबर दिलो दिलदार |

शब्दार्थ : नसीम = मृदुल हवा ; वज्द = आत्म विस्मृत

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 724

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Kalipad Prasad Mandal on October 17, 2017 at 9:54am

सादर आभार आ सलीम जी 

Comment by SALIM RAZA REWA on October 16, 2017 at 10:24am
आप सही हैं. सादर
Comment by Kalipad Prasad Mandal on October 15, 2017 at 10:12am

आद मुहम्मद आरिफ जी ,आदाब  हौसला अफजाई के लिए थे दिल से शुक्रिया , सादर 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on October 15, 2017 at 10:10am

आदरणीय सलीम रज़ा रेवा साहिब ,आदाब हौसला अफजाई केलिए सादर आभार | आपने जो बहर का खंड बताया है वह मेरे लिए नया है | मेरे पास जो बहरों की लिस्ट है उसमे यह नहीं है | मेरे पास १२१२  ११२२  १२१२  २२/२२१  था | अगर इसको १२१२१  १२२१  २१२   २२/२२१  करे तो क्यों करे या रचना में किस प्रकार का अंतर होगा ? क्रपया थोड़ा विस्तार से बताइए | सादर

Comment by Mohammed Arif on October 15, 2017 at 7:39am
आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब, बहुत ही ख़ूबसूरत अहसासों का चमन ग़ज़ल बन के खिल गया । आदरणीय सलीम रज़ा साहब की बात पर गौर करेंं ।दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।
Comment by SALIM RAZA REWA on October 14, 2017 at 9:07pm

आदरणीय काली प्रसाद जी ,
वाह. क्या खूब ग़ज़ल हुई है, रदीफ़ की जितनी तारीफ़ की जाए कम है। बहुत बहुत मुबारक़बाद।
बहर का खंड आपने ग़लत अंकित किया है,,,, यूँ कर लें
१२१२१ // १२२१ //२१२ // २२

Comment by Kalipad Prasad Mandal on October 14, 2017 at 8:16pm

आदरणीय शेख साहजाद उस्मानी जी  ,आदाब , हौसला अफजाई के लिए  तहे दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 14, 2017 at 7:34pm
बढ़िया रदीफ़ और काफ़ियों के साथ दिलचस्प भावपूर्ण ग़ज़ल। तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब कालीप्रसाद मण्डल साहब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service