For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल -- लिखूं सच को सच ये हुनर शेष है ( दिनेश कुमार )

122___122___122___12

लिखूँ सच को सच, ये हुनर शेष है
अभी रोशनाई में डर शेष है

क़दम उठ रहे हैं इकट्ठे मगर
दिलों के मिलन का सफ़र शेष है

बुझाओ न तुम शम्अ उम्मीद की
फ़क़त रात का इक पहर शेष है

भले उनकी दस्तार है तार तार
वो ख़ुश हैं कि काँधे पे सर शेष है

चमन में लगी आग, लगती रहे
मुझे क्या, अभी मेरा घर शेष है

दशहरा मनाने का क्या फ़ाइदा
बुराई का ख़ूँ में असर शेष है

जो हातिम सा इमदाद सबकी करे
जहाँ में कहाँ वो बशर शेष है

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 919

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 26, 2017 at 11:33am

आ. दिनेश जी 
.
चमन में लगी आग, लगती रहे
मुझे क्या, अभी मेरा घर शेष है.. सारा वार्तालाप यहीं समेट दिया आपने ..बहुत बधाई 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 26, 2017 at 10:32am
जनाब दिनेश कुमार साहिब ,सुन्दर गज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें
Comment by दिनेश कुमार on September 25, 2017 at 8:57pm
जी आ. समर साहब। एडिट करता हूँ। शुक्रिया
Comment by Samar kabeer on September 25, 2017 at 8:40pm
अब मिसरा ठीक है,ऐडिट कर दीजिए ।
Comment by दिनेश कुमार on September 25, 2017 at 8:16pm
शुक्रिया आ महेंद्र जी। इनायत आपकी।
Comment by दिनेश कुमार on September 25, 2017 at 8:01pm
बहुत मेहरबानी आ. समर साहब। मुहब्बत है आपकी, जोआपने ग़लती बताई।
मतले का सानी कुछ यूं किया है ----
अभी दिल के कोने में डर शेष है।
Comment by Mahendra Kumar on September 25, 2017 at 7:59pm

चमन में लगी आग, लगती रहे
मुझे क्या, अभी मेरा घर शेष है ...वाह! यही हो रहा है आजकल.

इस उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. दिनेश जी. सादर.

Comment by दिनेश कुमार on September 25, 2017 at 7:57pm
बहुत बहुत शुक्रिया आ सुरेंद्र जी। आभार
Comment by दिनेश कुमार on September 25, 2017 at 7:56pm
तहे दिल से शुक्रिया आ आरिफ़ साहब।
Comment by Samar kabeer on September 25, 2017 at 5:58pm
जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
मतले के सानी मिसरे में 'रोशनाई'शब्द के साथ 'डर'क़ाफ़िया खटक रहा है,मुमकिन हो तो सानी मिसरा बदलने का प्रयास करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आपने खत लिखा उसका ही असर है साईंछोड़ दी अब बुरी संगत की डगर है साईं धर्म के नाम बताया गया भाई…"
2 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"ग़ज़ल पर अपनी बारीक़-नज़र से टिप्पणी करने के लिए आपका आभार आदरणीय तिलकराज जी।  एक प्रश्न है: इस…"
3 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"भूल जाता हूँ ये अक्सर कि उसे भूलना है अब किसी बात का भी होश किधर है साईं। इस पर एक उदाहरण देखें भूल…"
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" सुना ही था "बड़ी मुश्किल ये डगर है साईं"  राह-ए-ईमाँ का तो गुल तक भी शरर है…"
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोई  सुनता नहीं मेरी वो असर है साईं   अब तो दीदावर न कोई न वो दर है…"
13 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आरंभ से गिरह तक सभी शेर बहुत अच्छे हुए। उर्दू के दृष्टिकोण से 9वें शेर में 'बहर' तथा 10…"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गिरह के साथ गजल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई।"
16 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"शह्र में झूठ का कुछ ऐसा असर है साईं अब तलक सच की नहीं ख़ैर ख़बर है साईं याद है या कोई रूहानी असर है…"
16 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सुना ही था "बड़ी मुश्किल ये डगर है साईं"    राह-ए-ईमाँ का तो गुल तक भी शरर है…"
23 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" कोई  सुनता नहीं मेरी वो असर है साईं   अब तो दीदावर न कोई न वो दर है…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोख से मौत तलक रात अमर है साईंअपने हिस्से में भला कौन सहर है साईं।१।*धूप ही धूप मिली जब से सफर है…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सादर अभिवादन।"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service