For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विमल और सौरभ कॉलेज के समय से ही प्रतिद्वंधि थे । हर स्पर्धा में आगे पीछे रहते थे । कभी विमल प्रथम स्थान प्राप्त करता तो कभी सौरभ । इनकी दोस्ती एक मिसाल थी , लोगों ने बहुत चाहा की दोनों में फूट पड़ जाये , पर यह सम्भव न हो पाया ।
कॉलेज के बाद भी दोनों एक साथ दिखायी दे जाते थे , यहाँ तक की दोनों की नौकरियां भी एक साथ एक ही कंपनी में लगी । दोनों बेहद ख़ुश थे , अब भी दोनों में प्रतिस्पर्धा होती रहती थी , दोनों का ही प्रमोशन ड्यू था , अटकले थी कि विमल को प्रमोशन मिलने की संभावनाएं ज्यादा है क्योंकि आख़िर वह बॉस का दामाद था , सौरभ को यकीं था कि प्रोमशन के लिए वही चयनित होगा , कम्पनी को उसने गत वर्षो में अच्छे प्रोजेक्टस लाकर दिए थे , बहुत फायदा करवाया था , उसको अपनी मेहनत पर भरोसा था ।
ब्रेक में दोस्तों के साथ लंच करते हुए विमल बोला ," यार सौरभ, कुछ चिंतित दिखाई दे रहे हो , क्या बात है ? गर तुम प्रमोशन के लिए चिंतित हो तो भूल जाओ , ये तुमको ही मिलेगी , यार बहुत खुश हूँ कि तुमने अपनी मेहनत और लगन से मुझे पीछे छोड़ दिया , इतनी मेहनत कैसे कर लेते हो , मैं तो सोचकर कर भी नहीं कर पाया ।"
विमल की बातें सुनकर सौरभ ने उत्तर दिया - " यार , तुम ऐसा क्यों सोच रहे हो , तुमने भी खूब मेहनत की है , कंपनी के इंटरनल रिलेशनशिप को मेन्टेन करने में तुम्हारा योगदान काबिले तारीफ़ है । और रही प्रमोशन की बात तो पोस्ट तो एक ही है । " कहते हुए फिर उसने विमल की तरफ देखा ।
विमल कुछ न कह पाया , पर दोस्तों के बीच इस चर्चा ने तूल पकड़ लिया था , दो अलग ख़ेमे बन चुके थे । नतीजे का बस इंतज़ार था ।
आख़िर वो घड़ी भी आ गयी और अटकले जीत गयी ।
सौरभ आज अपने एल्बम में अतीत के पन्नों में अपनी दोस्ती तलाश रहा था ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 682

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 15, 2017 at 10:57pm

आदाब भाई जी , जी लिखती रहूंगी पर मन में है जो लिखूं सार्थक हो ,और सही हो , अभी कहाँ हूँ इस बात का एहसास है भाई जी मुझे भी | जहाँ दिक्कत आती है , वहां  उलझ जाती हूँ | सच कहा आपने खुद के सृजन पर शंका होती है और डर लगता है | 

Comment by Samar kabeer on August 15, 2017 at 10:51pm
आपकी सबसे बड़ी कमजोरी है,'अहसास-ए-कमतरी'सृजन से पहले ही शंकाएं घेर लेती हैं कि मेरा ये सृजन कैसा होगा ,ये सब भूल कर सृजन करती रहें,आप ओबीओ पर हैं,ये हमेशा याद रखें,ग़लती होगी तो सुधार भी हो जायेगा,बस ये ध्यान रखें,और लिखती रहें ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 15, 2017 at 10:30pm

आदरणीय रवि सर ,नमस्कार जी सर इस कथा पर पुनः प्रयास करुँगी , आपके मार्गदर्शन के लिए दिल से आभारी हूँ |इस तरह का मार्गदर्शन सिर्फ और सिर्फ ओ बी ओ में ही मिलता है वरना यह कह दिया जाता है गलतियाँ है और कहने वाला फुर्र्र्रर्र्र्रर्र्र | ओ बी ओ जिंदाबाद |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 15, 2017 at 10:17pm

आदाब आदरणीय समर भाई जी | जो कमी रही इस कथा में उस बिंदु को इंगित कर अवगत कराने हेतु सादर धन्यवाद | जब यह कथा लिखी थी तब कुछ खटक तो रहा था पर अपनी गलती नहीं समझ आ रही थी , वैसे डरते डरते ही पोस्ट की है , मुझे लग रहा था रिजेक्ट हो जाएगी , पर जब पटल पर यह कथा देखी तो विश्वास था इन कमजोरियों को आप सब मुझे बताएँगे , और देखिये न हुआ भी यही , आप ने , जनाब मोहम्मद आरिफ साहब ने और आदरणीय रवि सर भैया ने अपनी सूक्ष्म दृष्टि से मुझे इससे अवगत भी कराया और दिशा भी दिखाई  | सादर धन्यवाद आप तीनों को | 

Comment by Ravi Prabhakar on August 15, 2017 at 6:40pm

आदरणीय कल्‍पना भट्ट जी, प्रेषित लघुकथा बहुत जल्‍दबाजी में लिखी गई मालूम होती है । विमल के बॉस का दामाद होने के कथ्‍य ने लघुकथा को काफी कमजोर बना दिया । प्राइवेट सैक्‍टर में प्रबंधक लोग बहुत कूटनीति से काम लेते हैं, चूंकि विमल बॉस का दामाद था तो उसे बॉस वैसे भी भरमा लेगा और पदोन्‍नति का झुनझुना सौरव के हिस्‍से में आएगा - इस तथ्‍य को आधार बनाकर लघुकथा को लिखना चाहिए था जिससे विजेता शीर्षक भी अच्‍छे से परिभाषित होता और विजेता शब्‍द में छिपा तीक्ष्‍ण व्‍यंग्‍य भी अच्‍छे से उभर का आता । टंकण त्रुटियों की ओर जनाब मोहम्‍द आरिफ साहिब बता चुके हैं, कसावट के बारे में जनाब समर कबीर जी से मेरी राय उल्‍ट है । प्रस्‍तुत लघुकथा में कसावट की कोई कम नहीं लग रही बल्‍िक मुझे तो लग रहा है कि कसावट के चक्‍कर में आदरणीय कल्‍पना जी ने लघुकथा का कुछ गला सा घोंट दिया है जिस वजह से दोनों मित्रों के बीच के अलगाव जिस वजह से चर्चा ने तूल पकड़ा को लिखा नहीं गया । सादर

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 14, 2017 at 9:51pm
इस रचना पर हार्दिक बधाई आदरणीया कल्पना जी सादर
Comment by Nita Kasar on August 14, 2017 at 4:55pm
दोस्ती का एक रूप एेसा भी उम्दा कथा है,आगे बढ़ने की दौड़ कहाँ से कहाँ लाकर खड़ा कर देती है ।बधाई आद० कल्पना जी ।
Comment by Mohammed Arif on August 13, 2017 at 6:12pm
आदरणीया कल्पना भट्ट जी आदाब, बहुत बेहतरीन दोस्ती को रेखांकित करती लघुकथा कही आपने । कभी-कभी हमारा दोस्त हमसे आगे नकल जाता है । विद्वेषवश हम अपने दोस्ती से फिर वंचित हो जाते हैं । कथा जिज्ञासा का संचार करने में सफल रही ।अत: सफल लघुकथा बन पड़ी ।हार्दिक बधाई स्वीकार करेंं । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ इस प्रकार है:-प्रतिद्वंधि/प्रतिद्वंदी ,संभावनाएं/संभावनाएँ ,यकी/यक़ी ,प्रोजेक्टस/प्रोजेक्ट्स आदि ।
Comment by Samar kabeer on August 13, 2017 at 6:10pm
बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,लघुकथा का कथानक अच्छा है,दोनों दोस्तों की चर्चा के दौरान क्या संवाद हुए जो बात तूल पकड़ गई, कसावट की कमी है,बहरहाल इस प्रयास पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
23 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
23 hours ago
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service