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'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन

१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२


ख़ुलूस-ओ-प्यार की उनसे उमीद कैसे हो
जो चाहते हैं कि नफ़रत शदीद कैसे हो

छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में
तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो

बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के
शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो

हमेशा घेर कर कुछ लोग बैठे रहते हैं
अदब पे आपसे गुफ़्त-ओ-शुनीद कैसे हो

इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर
अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो
----
शदीद-सख़्त
क़ल्ब-दिल
कलीद्-चाबी
कशीद्-खींचना
गुफ़्त-ओ-शुनीद-बात चीत
पलीद-गन्दा,ग़लीज़
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 14, 2017 at 2:04pm
आ. भाई समर जी,बेहतरीन गजल हुई है ।हार्दिक बधाई ।
Comment by Gurpreet Singh jammu on July 14, 2017 at 9:21am
जी सर शुक्रिया
Comment by Samar kabeer on July 13, 2017 at 10:08pm
जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,'उमीद'को 121 भी ले सकते हैं और 'उम्मीद'221 भी ले सकते हैं ।
सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 13, 2017 at 10:04pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 13, 2017 at 10:02pm
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Gurpreet Singh jammu on July 13, 2017 at 9:30pm
वाह आदरणीय समर सर जी..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने..
सर जी उमीद(121) को क्या उम्मीद(221)की तरह भी लिया जा सकता है या नहीं.
Comment by Sushil Sarna on July 13, 2017 at 5:28pm

बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के
शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो

वाह आदरणीय समर कबीर साहिब मज़ा आ गया .... दिल से बधाई स्वीकार करें इस शानदार ग़ज़ल के लिए।

Comment by Mohammed Arif on July 13, 2017 at 12:56pm
छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में
तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो। वाह!वाह!!
इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर
अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो । आज के शाइरों को पर अच्छा तंज़ है ।
आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब आदाब,एक और धमाकेदार ग़ज़ल की सौग़ात । हर शे'र बेजोड़ है । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।

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