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" अस्पृश्य" - लघुकथा :अर्पणा शर्मा

मालकिन ने रसोई के एक कोने में रखी थोड़ी पिचकी सी , घिसी थाली, कटोरी , ग्लास और चम्मच उठा,  उसमें खाना सजाया और खाना बनाने वाली को रसोई के बाहर एक कोने में जमीन पर बिठाकर उसके सामने थाली रख दी।

खाना बनाने वाली का आज उस घर में पहला ही दिन था। जल्दी से खाना खाकर जूठे बर्तन सिंक में रख दिये क्योंकि बर्तन मलने वाली भी आती थी।

मालकिन ने देखा तो उसे कड़क शब्दों में निर्देश मिले -
" खाना खाकर अपने बर्तन धोकर वहाँ उस कोने में रखना। दूसरे बर्तनों से छूना नहीं चाहिए ।"

वह हक्की-बक्की सी रह गई । उसके जी में आया कि पलट कर उत्तर दे -
"मालकिन आप लोग मेरे हाथ का बना खाना तो खालेते हैं ना, फिर....???"!
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Arpana Sharma on June 8, 2017 at 11:32pm
आदरणीया कल्पना जी - बहुत धन्यवाद आपने ये लघुकथा पसंद कर मेरी हौसला अफजाई की । देरी के लिए क्षमा।
Comment by Mahendra Kumar on June 3, 2017 at 8:27am

क्षमा चाहता हूँ आ. अर्पणा जी. पता नहीं कैसे गलती हो गयी. आगे से ध्यान रखूँगा. सादर.

Comment by Arpana Sharma on June 2, 2017 at 11:21pm
महेन्द्र कुमार जी - बहुत आभार आपकी सराहना का। मेरा नाम अर्पणा है कल्पना नहीं
Comment by Mahendra Kumar on May 15, 2017 at 11:26am

बढ़िया लघुकथा है आदरणीया कल्पना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on April 26, 2017 at 10:22pm
बहुत अच्छी लघुकथा हुई है आदरणीया अर्पणा जी । हार्दिक बधाई ।
Comment by Arpana Sharma on April 26, 2017 at 10:01pm
आदरणीया प्रतिभा जी - आपकी सह्रदय सराहना के लिए बहुत शुक्रिया ।
Comment by pratibha pande on April 26, 2017 at 8:36pm

  बहुत अच्छी लघु कथा  कसावट के साथ कही गई   ...ढेरों बधाई प्रिय अर्पणा  जी 

Comment by Arpana Sharma on April 26, 2017 at 5:30pm
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'जी - आपकी सराहना का बहुत आभार ।
Comment by Arpana Sharma on April 26, 2017 at 5:29pm
आदरणीय जनाब समर कबीर साहब जी - आपकी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया । आपने बिल्कुल सही कहा कि मुझे मंच की अन्य रचनाओं को भी समय देना चाहिए । मैं निश्चय ही मंच की अन्य रचनाओं को पढ़कर अपनी अकिंचन टिप्पणी देने का प्रयास करूँगी ।
Comment by नाथ सोनांचली on April 20, 2017 at 8:46am
आद0 अपर्णा शर्मा जी सादर अभिवादन, उचित कथानक के साथ उम्दा लघुकथा।बधाई।

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