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आएगा नया साल
खिलेंगे नये फूल
उगेगा नया सूरज
फैलेगी नयी रौशनी
छंटेगा अँधेरा
सजेगी महफ़िल
गायेंगी वादियाँ
बजेंगी चूड़ियाँ
झूमेगा आसमाँ
नाचेगी धरती
उड़ेगा आँचल
हँसेगा बादल
सच होंगे सपने
मिलेंगी ख़ुशियाँ
मुड़ेंगी राहें
आएगी मंज़िल
मगर...
सिर्फ औरों के लिए
मेरे लिए
तो अब भी वही साल है
कई सालों बाद भी
सड़न और सीलन से युक्त
दुर्गन्ध से भरा हुआ
तड़पता
उदास
बीमार
और बोझिल
पुराना साल
बिलकुल मेरे जैसा
और ठीक वैसा
जैसा गए थे तुम छोड़कर
किसी और की ज़िन्दगी में
बनकर उसके लिए
नया साल!

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 485

Comment

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Comment by Mahendra Kumar on December 29, 2016 at 8:22am
आदरणीय समर सर, सादर आदाब। कविता को पसंद करने के लिए आपका हृदय से आभार। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।
Comment by Samar kabeer on December 28, 2016 at 3:36pm
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,नये साल की आमद पर अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mahendra Kumar on December 28, 2016 at 12:25pm
हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र जी। बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर।
Comment by नाथ सोनांचली on December 28, 2016 at 9:38am
आदरणीय महेन्द्र जी सादर अभिवादन, नए साल के परिपेक्ष्य में बढ़िया भावाभियक्ति, बहुत खूब
बधाई निवेदित है, सादर
Comment by Mahendra Kumar on December 28, 2016 at 3:34am

आदरणीय मिथिलेश सर, रचना पर प्रतिक्रिया दे कर मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। हार्दिक आभार। सादर।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 27, 2016 at 12:10pm

आदरणीय महेन्द्र जी, बहुत बढ़िया भावाभिव्यक्ति हुई है. इस प्रस्तुति पर आपको हार्दिक बधाई. सादर 

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