For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वागीश्वरी सवैया  [सूत्र- 122×7+12 ; यगण x7+लगा]


करो नित्य ही कृत्य अच्छे जहां में सखे! बोल मीठे सभी से कहो।।
दिलों से दिलों का करो मेल ऐसा, न हो भेद कोई न दुर्भाव हो।।
बनो जिंदगी में उजाला सभी की, सभी सौख्य पाएं उदासी न हो।।
रखो मान-सम्मान माँ भारती का, सदा राष्ट्र की भावना में बहो।।



मत्तगयन्द सवैया [सूत्र-211×7+22 ; भगणx7+गागा]

यौवन ज्यों मकरन्द भरा घट, और सुवासित कंचन काया।
भौंह कमान कटार बने दृग, केश घने सम नीरद-छाया।।
देख छटा मुख की अति सुंदर, पूनम का रजनीश लजाया।
ओष्ठ खिली कलियाँ अति कोमल, देख हिया अलि का हरसाया।।

रचना-रामबली गुप्ता
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 1203

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 30, 2016 at 7:22pm

आ० सौरभ जी , मेरे भाव में कोई  कमी नहीं है और  झांसा शब्द मेरे शब्द्कोश  में नहीं है .  वाट्स की आपकी खिन्नता संभवत मेरे कारण तो नहीं होगी . मुझसे कोई  अपराध बन पडा  हो तो मुझे अवश्य बताएं,  मैं अवश्य क्षमा चाहूँगा  .मेरा मत है कि योग्यता सदैव समादृत होनी चाहिये . मैं इसी सिद्धांत पर चलता हूँ . दिनकर जी की  काव्य पंक्ति आप को समर्पित है -                                                                                                                                       पूज्यनीय को पूज्य मानने में जो बाधाक्रम है  ,

वही मनुज का अहंकार है वही मनुज का भ्रम है . ---- सादर .,

Comment by रामबली गुप्ता on October 29, 2016 at 6:12am
आद0 गोपाल नारायन जी आपकी आत्मीय प्रशंसा से दिल गदगद हो गया है। बहुत बहुत हार्दिक आभार। मत्तगयंद का अंतिम पद मुझे भी कुछ कमजोर लग रहा है। मैं इसे मूल में सुधार लूँगा। अपना आशीष बनाये रखें।सादर
Comment by रामबली गुप्ता on October 28, 2016 at 10:38pm
दिल से आभार भाई सतविंदर कुमार जी
Comment by Samar kabeer on October 27, 2016 at 11:05am
जी,बह्र का ज्ञान होने के बाद मेरी मुश्किल अस्सी फ़ीसदी कम हो जाती है,कल से इसी प्रयास में लगा हूँ,इधर मुशायरा नज़दीक आ गया है,इस कारण सवैया आज न पोस्ट कर पाऊंगा,मुशायरा ख़त्म होने के बाद पहला काम यही करना है ,आपने जो विश्वास मुझ पर किया है उस पर खरा उतरने का भरसक प्रयास करूंगा,आपके स्नेह और मार्गदर्शन का पुनः धन्यवाद ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 27, 2016 at 9:25am
आदरणीय रामबली भाई सादर!दोनों सवैया छंदों के लिए बहुत बहुत बधाई।आपकी यह कृति एक स्वस्थ चर्चा की साक्षी बनीं है जो निस्संदेह हमारे लिए भी लाभदायक है।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 26, 2016 at 11:10pm

आदरणीय समर भाई साहब, आप यदि छन्द का मर्म समझ गये, तो आपको बहर और छान्दसिक विन्यास में कहीं कोई अंतर नहीं दिखेगा. बस इसी भाव को आत्मसात करने भर की देर है. हम सभी को आपकी लगन और निष्ठा पर पूरा विश्वास है. आप सवैया ही नहीं अन्य वर्णिक छन्दों पर भी उतनी गहराई से रचनाकर्म कर सकेंगे. ज्ञात हो, कि ग़ज़ल का वैन्यासिक व्यवहार भी वर्णिक छन्दों का ही होता है.

सादर शुभकामनाएँ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 26, 2016 at 11:05pm

आदरणीय गोपाल नारायनजी, आप और समस्त सहयोगियों से करबद्ध ही नहीं, अब दण्डवत प्रार्थना है कि मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिए. बहुत गुरु और चेला आदि का झांसा हो गया. जो इस तरह की संज्ञा से कुप्पा हों, उन्हें यह संज्ञा मुबारक़ हो. जैसा कुछ वाट्स-ग्रुप में बरत दिया गया, उतने से ही मैं संतृप्त हो चुका हूँ. अलबत्ता, ओबीओ पर सभी सहयोगी और सहधर्मी हैं. इसी भाव की इज़्ज़त रखें हम, जीवन बीत जायेगा.

सादर प्रणाम.

Comment by Samar kabeer on October 26, 2016 at 8:35pm

जनाब सौरभ पाण्डेय जी,छन्द के बारे में कहूँ तो ये सही है कि इसकी प्रेरणा मुझे आप ही से मिली है,और जितना भी इसमें सीख पाया हूँ उसमें आपका मार्गदर्शन शामिल है,अब सवैया छन्द की तरफ़ क़दम बढ़ा रहा हूँ,उम्मीद नहीं पूरा यक़ीन है कि इसमें भी आपको और मंच को कामयाब हो कर दिखाऊंगा,आप मेरे दिल की बात बख़ूबी समझ लेते हैं,बस आपका आशीर्वाद चाहिये इस मैदान में भी ।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 26, 2016 at 7:31pm

आ ० राम बली जी , आप छंद रचना करें , सवैया रचे , बहुत साधुवाद हमारी पुरानी  परम्परा भी कायम रहे आवश्यक है . इसलिए मैं आपका फैन हूँ . आपकी रचना पर आ० सौरभ जी ने विस्तार से टिप्पणी की और वह गुरु वाणी है . शिल्प को लेकर उनकी चिंता भी दिखती है जो वाजिब है . आपकी छंद रचना अच्छी है  वागीश्वरी में यदि कहो बहो के साथ ही रहो सहो  अहो गहो होता तो कितना सुन्दर होता . मत्तगयंद  की आख़िरी  पंक्ति में ओष्ठ का क्या औचित्य है जैसा छंद व्यवहृत था उसमे होंठ शब्द फिट बैठता  देख हिया अली का हर्षाया --- अलि  के प्रयोग से तो आपकी सारी भूमिका ही गड़बड़ा गयी अगर केवल अंतिम पंक्ति प्रासंगिक रह गयी , यदि  ऐसा कहें कि ----  काम ने साज अनूप सजाया  ---तो शायद अधिक  उपयुक्त हो और आप इससे भी बेहतर सोच सकते हैं . आपके प्रयास की सराहने करते हुए पुनः शुभ शुभ . सादर

Comment by रामबली गुप्ता on October 26, 2016 at 6:36pm
आद0 समर भाई साहब सराहना के लिए हार्दिक आभार। सवैया छंद पर आपकी उत्सुकता और अभ्यास के प्रति लगन से दिल आशान्वित है। आपके सवैये की प्रतीक्षा रहेगी।सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

शिव भजन (पूर्वी छपरहिया धुन)

भोला की भजsनिया मेंमन हमार लागल जियुवा पागल भइलें भोला में ही मनs अनुरागल जियुवा पागल भइलें बिच्छू…See More
2 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ______ अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने…"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय तिलकराज कपूर जी, मुझे बड़े खेद के साथ कहना पड़ता है कि आपने मेरी रचना पर टिप्पणी नहीं की। आप…"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ( संशोधित ) ++++++++++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम…"
5 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"बाल-युवा मिल उधम मचाएं, रंग-गुलाल-अबीर उड़ाएं  वाह !!! अजय भाई इससे बढ़िया और क्या…"
5 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा पर अच्छा प्रयास हुआ है अखिलेश भाई। पढ़ने में रोचक तो है। विशेष टिप्पणी तो इस विधा के जानकार…"
6 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"छंदों पर अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार आदरणीय भाई अखिलेश जी।  मात्रा की…"
6 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई अखिलेश जी, आपको भी नववर्ष 2083 की अनेक शुभकामनाएं।  उपरोक्त चर्चा को आगे बढ़ाते हुए…"
6 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"वैसे आप मूल शेर में ही  दौलत-ए-ग़म मिली है क़िस्मत से // कर दें तो भी बह्र बरक़रार रहती है। और…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"अनुरोध - कर्कश स्वर को पंचम स्वर पढ़ें ...... धन्यवाद "
8 hours ago
amita tiwari posted a blog post

प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर

प्यादे : एक संख्या भरप्यादे— बेकसूर, बेख़बर, नियति और नीति से अनजान—अक्सर मान लिये जाते हैंमात्र एक…See More
11 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अच्छा है। "
19 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service