For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - आँख जब भी कभी लड़ी होगी

बहरे ख़फ़ीफ़ मुसद्दस् मख़बून
फाइलातुन मुफाइलुन् फेलुन

2122 1212 22

उन अदाओं में तिश्नगी होगी ।
कोई खुशबू नई नई होगी ।।

यूं ही नाराजगी नही होती ।
बात उसने भी कुछ कही होगी ।।

होश आया कहाँ उसे अब तक ।
कुछ तबीयत मचल गई होगी ।।

बेकरारी का बस यही आलम ।
बे खबर नींद में चली होगी ।।

कर गया इश्क में तिज़ारत वह ।
शक है नीयत नहीं भली होगी ।।

वो बगावत की बात करता है ।
खबर शायद सही पढ़ी होगी ।।

फ़ितरत ए आइना मुकम्मल है ।
हर हक़ीक़त बुरी लगी होगी ।।

चाहतें जुर्म हैं ज़माने में ।
बे दखल आरजू पड़ी होगी ।।

दाग चूनर का धुल नही सकता ।
हो के मायूस चुप खड़ी होगी ।।

याद हर बार वो किया होगा ।
आँख जब भी कभी लड़ी होगी ।।

- नवीन मणि त्रिपाठी
अप्रकाशित एवम् मौलिक

Views: 811

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on September 27, 2016 at 10:44am
जनाब शेख शहजाद उस्मानी साहब बहुत शुक्रिया ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 27, 2016 at 10:42am
आ0 सुरेश कुमार कल्याण साहब आभार ।
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on September 27, 2016 at 8:52am
आदरणीय नवीन जी सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई प्रेषित है । सादर ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 26, 2016 at 4:22pm
आपकी अनुपम प्रस्तुति का आनंद भी लिया और वरिष्ठ जन की टिप्पणियों से सबक़ भी। सादर हार्दिक बधाई आपको आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी।
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 26, 2016 at 11:26am
आ0 आशीष सिंह जी हौसला आफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 26, 2016 at 11:25am
आ0 शकूर साहब मैंने मूल प्रति में आपकी सलाह कबूल कर ली है । तहे दिल से शुक्रिया ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 26, 2016 at 11:23am
आ0 कबीर सर सादर नमन । आपकी बात से सहमत हूँ ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on September 26, 2016 at 11:22am
आ0डॉ गोपाल नारायण साहब तहे दिल से शुक्रिया
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 25, 2016 at 7:36pm

आँख जब भी कभी लड़ी होगी

 नवीन भाई  बहुत अच्छा लिख रहे हैं आप . बधाई .

Comment by Samar kabeer on September 25, 2016 at 3:43pm
जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।
दूसरे शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ का दोष आ गया है देखियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
yesterday
Admin posted discussions
Tuesday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
Tuesday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
Tuesday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
Monday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
Monday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service