For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अधूरे गीत(कहन)______________मनोज कुमार अहसास

मन के सारे गीत अधूरे,फिर से तुझ को अर्पण है
तुझको मन की बात कहूँ मैं,ऐसा अब फिरसे मन है

मर्यादा का एक महल है जिसमे विरह का आँगन है
ख़ामोशी की एक चिता है पल पल जलता जीवन है

संबंधो में प्रेम कहाँ है प्रेम की अब वो रीत कहाँ
मित्र नयन से जुदा है काजल और तरसता दर्पण है

दुःख,पीड़ा,अवसाद,तपस्या,करुणा,संयम और साहस
उस जीवन में नैसर्गिक है इस जीवन में आयोजन है

टूट गयी है डोर विरह की कैसे कहन का रूप सजे
जीवन की इस भाग दौड़ में बस बेकार का क्रंदन है
मौलिक और अप्रकाशित








आदरणीय संपादक जी
राजस्थान से प्रकाशित श्री अनिल अनवर जी द्वारा सम्पादित पत्रिका मरू भूमि नमक पत्रिका में प्रकाशित करने
यह रचना अर्थात कहन भेजी गयी थी
अभी तक हमारी जानकारी अनुसार प्रकाशित नहीं हुई है

Views: 505

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by मनोज अहसास on May 19, 2015 at 4:13pm
आप सभी को प्रणाम करता हूँ और आभार प्रगट करता हूँ
सादर
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 19, 2015 at 3:47pm

अच्छा प्रयास है . सादर .

Comment by babita choubey shakti on May 19, 2015 at 3:28pm
बहुत ही सुंदर कविता आदरणीय जी बधाई
Comment by Hari Prakash Dubey on May 18, 2015 at 11:54pm
Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 18, 2015 at 8:16am

आदरणीय मनोज कुमार अहसास जी भावपूर्ण रचना के लिये बधाई ...सादर 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 17, 2015 at 5:49pm

बहुत खूब ..हार्दिक बधाई ..

Comment by मनोज अहसास on May 17, 2015 at 2:50pm
बहुत आभार सर
Comment by Sushil Sarna on May 17, 2015 at 2:32pm

अंतर्मन के भावों को चित्रित करता बहुत सुंदर प्रेम  है। हार्दिक बधाई। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
9 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service