For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मनोज अहसास
  • 40, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
Share on Facebook MySpace

मनोज अहसास's Friends

  • सीमा शर्मा मेरठी
  • Rajan Sharma
  • Samar kabeer
  • Rahul Dangi Panchal
  • Nilesh Shevgaonkar
  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • मिथिलेश वामनकर
  • वीनस केसरी
  • Saurabh Pandey

मनोज अहसास's Groups

 

मनोज अहसास's Page

Latest Activity

मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2×15कोशिश इतनी भी मत कीजे यादों को झुठलाने में ।आँखों मे आँसू भर जायेगे ज्यादा मुस्काने में।और भी कोई चीज़ बची है क्या तेरे मैखाने में,सारे ग़म तो मिला दिए तूने मेरे पैमाने में।बरस हज़ारों बीत गए हो जैसे तुझको देखे बिना,बीस साल की गिनती तो मैं गिनता हूँ अनजाने में।कोई फैसला लिखने बैठेगा तो उससे पूछूगा,सारी गवाही पूरी हैं या देर है उनके आने में।इतना पता मिल जाता बस वो सही सलामत रहते हैं,अब तो लाख तरीके हैं खबरें लाने ले जाने में।वो दिलकश मुस्कान निगाहों से ओझल होती ही नहीं,दुनिया ने तो कोई कसर न…See More
Jul 12
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"बहुत बहुत आभार आदरणीय श्याम जी सादर"
Jul 12
Shyam Narain Verma commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Jul 10
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

1222   1222  1222   1222वही इक ख्वाब तो अपनी निगाहों ने भी देखा था।हमारे पास कोशिश थी,तुम्हारे पास पैसा था।तुम्हारे हक़ में आया फैसला तो कैसा अचरज हो,मेरी आँखों में मिन्नत थी, तेरे कदमों का रुतबा था।कहीं से भी नहीं लगता तेरी हस्ती से अब संगदिल,यही वो शख्स है मैं जिसके ख़्वाबों में भी रहता था।तेरा रुख ऐसा होगा ये अगर महसूस हो जाता,कभी भी मैं नहीं कहता तू मुझसे प्यार करता था।रिहाई जाने कब होगी मेरी अनचाही दुनिया से,फलक पर पंछियों का झुंड मैंने उड़ते देखा था।सिमट कर रह गई है ज़िन्दगी छोटे से कमरे…See More
Jul 10
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मुसाफिर जी सादर नमस्कार  ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया और सुझाव देने हेतु हार्दिक आभार सादर"
Jun 22
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास :इस्लाह के लिए
"आदरणीय मुसाफिर जी  ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार सुझाव का स्वागत है सादर"
Jun 22
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय नीलेश जी ग़ज़ल पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आप आये हौसला बढ़ गया मेरा सादर"
Jun 22
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मिथिलेश जी, आदरणीय नीलेश जी,आदरणीय सौरभ पांडेय जी इस ग़ज़ल पर आप तीनों की उपस्थिति देखकर बहुत हर्ष हुआ obo के शुरुआती दिन याद आ गए जितना सीखा आप लोगों के सानिध्य में ही सीखा ग़ज़ल पर आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत सुधार की कोशिश जारी…"
Jun 22

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"भाई मनोज अहसास जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद।  गजल कही जाती है, लिखते तो हम आप हैं।   यह गजल कुछ और समय चाहती है।  शुभ-शुभ  "
May 22
Nilesh Shevgaonkar commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ. मनोज जी,मतले के दोनों मिसरों में अंतर्संबंध कम है ..  डगमगाते दौर... यह पहली बार पढ़ने में आया है .. आश्वस्त नहीं हूँ .कैसे कोई पढ़ सकेगा  मैं जो लिख पाया नहीं.अब अगर तुम आ भी जाओ तो भी क्या हो जाएगामैं नहीं मैं तुम नहीं तुम वक़्त…"
May 18
Nilesh Shevgaonkar commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ मनोज जी, अभी विस्तृत टिप्पणी नहीं कर पा रहा हूं। संक्षेप में यह कि बहर 11212, 11212, 11212, 11212 के करीब है। दूसरे, मुझे भूलने का ख़्याल क्यूं, यह आधा मिसरा पूरी ग़ज़ल में बढ़ा हुआ है। न भी होता तो भी ग़ज़ल पूरी हो जाती। सादर"
May 18

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज अहसास जी, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने. शेर-दर-शेर दाद ओ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं.  प्रचलित हिंदी और देवनागरी में 'ज्यादा'  शब्द रूप घुल मिल गया है. अब तो ये स्थिति है कि अगर जियादः लिखेंगे तो साथ में अर्थ भी देने की…"
May 16
Rachna Bhatia commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज अहसास जी अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें। मतले में सहीह लफ़्ज़ जियाद: है जिसका वज़्न 122 होता है। 4 में अगर उचित लगे तो "अब तुम्हारे लौटकर आने से क्या हो जाएगा" भी कर सकते हैं "
Apr 26
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2122   2122    2122   212हमने तो मुद्दत से उनका ख्वाब भी देखा नहींलग रहा है इस दिए में तेल अब ज्यादा नहींज़िन्दगी का क्या भरोसा डगमगाते दौर मेंआप तक ले जाये ऐसा तो कोई रस्ता नहींशायरी भी बोझ दिल का बन गयी है दोस्तोवो कोई कैसे पढ़ेगा जो मैं लिख सकता नहींतुम अगर आ जाओ अब भी तो ही क्या हो जाएगामैं नहीं,तुम भी नहीं वो,वक़्त भी वैसा नहींएक सूरत लेकिन अब भी है मेरे उद्धार कीपर सिवा तेरे किसी में ध्यान भी लगता नहींटूटे हाथों से सजाऊँ कैसे घर के फर्श कोतुमने बरसों से कदम घर में मेरे रक्खा नहींआखिरी दीदार…See More
Apr 26
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

एक ताज़ा ग़ज़ल जो अधूरी लगती है122 122 1212 122 122 1212मेरे साथ लम्हें गुज़ार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों? मुझे इस भंवर से उबार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?भले आज तुझसे मैं दूर हूँ, किसी बेबसी का सुरूर हूँमुझे फिर से दिल में उतार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?मैं तेरी नज़र का करार था ,तेरे सूने मन की बहार था।मुझे गौर से तो निहार ले ,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?मुझे देख ले फिर उसी तरह,मेरे पास आजा किसी तरहमुझे चाँद कह के पुकार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?नहीं हो सका वो मिलन तो क्या,बुझी दिल से ग़म की…See More
Apr 18
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास :इस्लाह के लिए

2122 1122 1122 22उठ के चल राह में तू मेरी उजाले कर देया कि चुपचाप मुझे मेरे हवाले कर देतुझको पीना है मेरा खून अभी मुद्दत तकमेरे हिस्से में भी दो चार निवाले कर देअपनी तकदीर से ज्यादा तुझे शक है मुझपरमेरे पीछे तू कईं देखने वाले कर देये भी मुमकिन है बदल दे मुझे रस्तों का मिजाज़ये भी मुमकिन है तेरे पाँवों में छाले कर देतोड़ डाला है हवाओं ने भरम मेरा तो कहीं ये दौर तेरे हाथ न काले कर देमुझको मालूम है तू फिर से मुकर जाएगामेरी कश्ती को हवाओं के हवाले कर देछुप के बैठा हूँ मैं अपना यहाँ पे ग़म लेकरमेरे…See More
Apr 14

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

मनोज अहसास's Blog

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2×15

कोशिश इतनी भी मत कीजे यादों को झुठलाने में ।

आँखों मे आँसू भर जायेगे ज्यादा मुस्काने में।

और भी कोई चीज़ बची है क्या तेरे मैखाने में,

सारे ग़म तो मिला दिए तूने मेरे पैमाने में।

बरस हज़ारों बीत गए हो जैसे तुझको देखे बिना,

बीस साल की गिनती तो मैं गिनता हूँ अनजाने में।

कोई फैसला लिखने बैठेगा तो उससे पूछूगा,

सारी गवाही पूरी हैं या देर है उनके आने में।

इतना पता मिल जाता बस वो सही सलामत रहते हैं,

अब तो…

Continue

Posted on July 12, 2023 at 12:02am

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

1222   1222  1222   1222

वही इक ख्वाब तो अपनी निगाहों ने भी देखा था।

हमारे पास कोशिश थी,तुम्हारे पास पैसा था।

तुम्हारे हक़ में आया फैसला तो कैसा अचरज हो,

मेरी आँखों में मिन्नत थी, तेरे कदमों का रुतबा था।

कहीं से भी नहीं लगता तेरी हस्ती से अब संगदिल,

यही वो शख्स है मैं जिसके ख़्वाबों में भी रहता था।

तेरा रुख ऐसा होगा ये अगर महसूस हो जाता,

कभी भी मैं नहीं कहता तू मुझसे प्यार करता था।

रिहाई जाने कब…

Continue

Posted on July 10, 2023 at 1:06am — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

2122   2122    2122   212

हमने तो मुद्दत से उनका ख्वाब भी देखा नहीं

लग रहा है इस दिए में तेल अब ज्यादा नहीं

ज़िन्दगी का क्या भरोसा डगमगाते दौर में

आप तक ले जाये ऐसा तो कोई रस्ता नहीं

शायरी भी बोझ दिल का बन गयी है दोस्तो

वो कोई कैसे पढ़ेगा जो मैं लिख सकता नहीं

तुम अगर आ जाओ अब भी तो ही क्या हो जाएगा

मैं नहीं,तुम भी नहीं वो,वक़्त भी वैसा नहीं

एक सूरत लेकिन अब भी है मेरे उद्धार की

पर सिवा तेरे किसी में ध्यान भी…

Continue

Posted on April 25, 2023 at 11:43pm — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

एक ताज़ा ग़ज़ल जो अधूरी लगती है

122 122 1212 122 122 1212

मेरे साथ लम्हें गुज़ार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?

मुझे इस भंवर से उबार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?

भले आज तुझसे मैं दूर हूँ, किसी बेबसी का सुरूर हूँ

मुझे फिर से दिल में उतार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?

मैं तेरी नज़र का करार था ,तेरे सूने मन की बहार था।

मुझे गौर से तो निहार ले ,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?

मुझे देख ले फिर उसी तरह,मेरे पास आजा किसी तरह

मुझे चाँद कह के पुकार ले,मुझे भूलने…

Continue

Posted on April 18, 2023 at 11:17pm — 2 Comments

Comment Wall (10 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:21pm on October 23, 2015, DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post बेटी दिवस पर दोहा ग़ज़ल. . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।  अबला बेटी करने से वाक्य रचना…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post डर के आगे (लघुकथा)
"आ. कल्पना बहन, सादर अभिवादन। अच्छी कथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शिवजी जैसा किसने माथे साधा होगा चाँद -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
11 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शिवजी जैसा किसने माथे साधा होगा चाँद -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत ही खूबसूरत सृजन हुआ है सर । हार्दिक बधाई"
13 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .राजनीति
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार ।सहमत देखता हूँ"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' left a comment for Radheshyam Sahu 'Sham'
"आ. भाई राधेश्याम जी, आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है।"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

शिवजी जैसा किसने माथे साधा होगा चाँद -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२२२ २२२२ २२२२ २**पर्वत पीछे गाँव पहाड़ी निकला होगा चाँद हमें न पा यूँ कितने दुख से गुजरा होगा…See More
14 hours ago
Radheshyam Sahu 'Sham' is now a member of Open Books Online
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दो चार रंग छाँव के हमने बचा लिए - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई आशीष जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार।"
20 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-102 (विषय: आरंभ)
"बहुत आभार इस बारीक़ विश्लेषण के लिए आदरणीय उस्मानी जी। आपकी बातों पर ग़ौर करके अवश्य इन्हें रचना…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-102 (विषय: आरंभ)
"आपका हार्दिक आभार आ. उस्मानी जी। "
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-102 (विषय: आरंभ)
"आदाब। आपकी पैनी दृष्टि से रचित यह कड़वे सच वाली रचना वाकई कुछ भिन्नता लिये हुए है। हार्दिक बधाई जनाब…"
yesterday

© 2023   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service