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मनोज अहसास
  • 39, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Samar kabeer commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करे I  'कल रात तेरे शहर से गुज़रे तमाम रात'-- इस मिसरे को यूँ कर लें :- 'हम यूँ तुम्हारे शह्र से गुज़रे तमाम रात'  'मायूसी औ थकन के सिवा कुछ नहीं…"
Sep 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है। हार्दिक बधाई। भाई अमीरूद्दीन जी की बातों का संज्ञान लें। सादर.."
Sep 3
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज 'अहसास' जी आदाब, ख़ूबसूरत भाव पक्ष के साथ अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। 'कल रात तेरे शहर से गुज़रे तमाम रात'... मिसरे मेंं 'रात' शब्द का दोहराव खटक रहा है, इसके इलावा ऊला में 'तेरे' और…"
Aug 23
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

221   2121   1221   212 कल रात तेरे शहर से गुज़रे तमाम रात। ख़्वाबों में हमने देखे वो रस्ते तमाम रात।मायूसी औ थकन के सिवा कुछ नहीं मिला, बोझिल सहर की आस में जागे तमाम रात।जलती ज़मीं की प्यास बुझाने के वास्ते, तारे फ़लक की गोद में रोये तमाम रात।अब मिल रही है हमको सज़ा हर गुनाह की, ख़त तुझको एक उम्र लिखे थे तमाम रात।मैं शायरी को छोड़के भी खुश न रह सका, मिसरे महीनों आँखों में तड़पे तमाम रात।अपनी तमाम ख़्वाहिशों को छोड़कर सनम, हम भी बेहिसी के दश्त में भटके तमाम रात।सोचा बहुत मगर न कभी तुझसे कह सके,…See More
Aug 22
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई। भाई समर जी का सुझाव उत्तम है । मिसरे और निखर गये है। शेष इंगितों में भी बदलाव का प्रयास करें। सादर..."
May 17
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर प्रणाम आपकी बहुमूल्य इस्लाह से ग़ज़ल लाभान्वित हुई है आप सदैव यूं ही आशीर्वाद बनाए रखें आपका बहुत-बहुत आभार सादर"
May 16
Samar kabeer commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I  'पास तेरे रहने का हासिल नहीं है वक़्त पर' इस मिसरे को उचित लगे तो यूँ कहें :- 'वक़्त तेरे पास रहने का नहीं हासिल मगर ' 'याद आ जाता है मुझको तब तेरी…"
May 14
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास

2122    2122     2122     212है तेरे दम से ही रौशन मेरे जीवन की बहार।तू नहीं तो ज़िन्दगी में मिल नहीं सकता करार।पास तेरे रहने का हासिल नहीं है वक़्त पर ,मेरी साँसों में बसा है तेरी साँसों का खुमार।ज़िन्दगी की उलझनों से तंग आ जाता हूँ जब,याद आ जाता है मुझको तब तेरी बाहों का हार।हर घड़ी तेरी कमी महसूस होती है यहाँ,ये पराया शहर मुझको तोड़ता है बार बार।फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था,है सफर इक रात का बस पर लगे सागर के पारज़िन्दगी का कर्ज़ सारा कर नहीं पाया अदा,इसलिए लिक्खा गया है ज़िन्दगी में…See More
May 10
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आदरणीय मुसाफिर साहब ग़ज़ल पर उपस्थिति के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया सादर"
May 10
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब ग़ज़ल पर महत्वपूर्ण इस्लाह देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया मैं आपकी बात मानने का बहुत प्रयास करता हूं लेकिन मेरे अंदर कुछ कमियां ऐसी हैं जिन को सुधारने में वक्त लगेगा आप कृपया करके मुझ पर ध्यान देते रहें क्योंकि ऐसे एक दो लोग ही…"
May 10
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी साहब बहुत-बहुत शुक्रिया सादर"
May 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है। हार्दिक बधाई। भाई समर जी की बात का संज्ञान लें। "
May 1
Samar kabeer commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'सँभलना जितना भी हमने चाहा, हम उतने ज्यादा बुरे गिरे हैं' इस मिसरे में 'बुरे गिरे हैं' ठीक नहीं लग रहा है,दूसरी बात ग़ज़ल में 'ज़ियादा' शब्द को 122 पर ही…"
May 1
Sheikh Shahzad Usmani commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आदाब। बेहतरीन विचारोत्तेजक। हार्दिक बधाई आदरणीय मनोज अहसास साहिब।"
Apr 29
मनोज अहसास posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास

नज़र में उलझन भरी हुई है, तमाम रस्ते उजड़ गये हैं ।सँभलना जितना भी हमने चाहा, हम उतने ज्यादा बुरे गिरे हैं।हमारे जैसा उदास कोई, हमें कहीं भी नहीं मिला पर,हमारे दुख से बड़े बहुत दुख ज़माने भर में भरे पड़े हैं।कभी नहीं वो कहेंगे हमसे, के उनके दिल में है प्यार अब भी,सकार को भी जिया था हमने नकार को भी समझ रहे हैं।ये ज़िन्दगी की उदास खुशबू ,जो बस गयी है मेरी रगों में,ज़रा सा खुश हूँ मैं इसमें क्योंकि तुम्हारें ग़म भी सजे हुए हैं।कहाँ हो तुम दो जहां के मालिक, हमारे दिल में अंधेरा करके।पुकार कर तेरा नाम कब से…See More
Apr 28
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी गजल पर आपकी उपस्थिति को देख कर मन बड़ा हर्षित हुआ एक समय वह था जब आप हमारी हर गजल पर इसी तरह इस्लाह करते थे लेकिन इस समय आप भी बिजी हैं हम भी बिजी हैं लेकिन आप आए तो बहुत अच्छा लगा मैं आपकी बात को पूरा पूरा मान देता हूं और इस…"
Apr 28

Profile Information

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Male
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saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

मनोज अहसास's Blog

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

221   2121   1221   212



कल रात तेरे शहर से गुज़रे तमाम रात।

ख़्वाबों में हमने देखे वो रस्ते तमाम रात।

मायूसी औ थकन के सिवा कुछ नहीं मिला,

बोझिल सहर की आस में जागे तमाम रात।

जलती ज़मीं की प्यास बुझाने के वास्ते,

तारे फ़लक की गोद में रोये तमाम रात।

अब मिल रही है हमको सज़ा हर गुनाह की,

ख़त तुझको एक उम्र लिखे थे तमाम रात।

मैं शायरी को छोड़के भी खुश न रह सका,

मिसरे महीनों आँखों में तड़पे तमाम…

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Posted on August 21, 2022 at 11:00pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास

2122    2122     2122     212

है तेरे दम से ही रौशन मेरे जीवन की बहार।

तू नहीं तो ज़िन्दगी में मिल नहीं सकता करार।

पास तेरे रहने का हासिल नहीं है वक़्त पर ,

मेरी साँसों में बसा है तेरी साँसों का खुमार।

ज़िन्दगी की उलझनों से तंग आ जाता हूँ जब,

याद आ जाता है मुझको तब तेरी बाहों का हार।

हर घड़ी तेरी कमी महसूस होती है यहाँ,

ये पराया शहर मुझको तोड़ता है बार बार।

फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था,

है सफर इक रात का…

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Posted on May 10, 2022 at 10:30pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास

नज़र में उलझन भरी हुई है, तमाम रस्ते उजड़ गये हैं ।

सँभलना जितना भी हमने चाहा, हम उतने ज्यादा बुरे गिरे हैं।

हमारे जैसा उदास कोई, हमें कहीं भी नहीं मिला पर,

हमारे दुख से बड़े बहुत दुख ज़माने भर में भरे पड़े हैं।

कभी नहीं वो कहेंगे हमसे, के उनके दिल में है प्यार अब भी,

सकार को भी जिया था हमने नकार को भी समझ रहे हैं।

ये ज़िन्दगी की उदास खुशबू ,जो बस गयी है मेरी रगों में,

ज़रा सा खुश हूँ मैं इसमें क्योंकि तुम्हारें ग़म भी सजे हुए…

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Posted on April 28, 2022 at 5:38pm — 6 Comments

अहसास की ग़ज़ल::; मनोज अहसास

2×15

दूर कहीं पर धुंआ उठा था दम घुटता था मेरा भी

ख़्वाब में मैंने देख लिया था दिल सुलगा था मेरा भी

एक अदद मिसरा जो दिल से निकले और पहुँचे दिल तक

हर सच्चे शाइर की तरहा ये सपना था मेरा भी

टुकड़े टुकड़े दिल है पर मरने की चाह नहीं होती

तेरे अहसानों के बदले इक वादा था मेरा भी

मेरी आँखों की लाचारी तुम भी समझ नहीं पाए

खारे पानी के दरिया में कुछ हिस्सा था मेरा भी

दिल को यही दिलासा देकर काट रहा हूँ तन्हाई

इस मिट्टी के…

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Posted on March 29, 2022 at 12:18am — 6 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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