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मौसम कहाँ जाये बदल जानें कहाँ बरसात हो |

२२१२   २२१२   २२१२  2212
मौसम  कहाँ जाये  बदल जानें कहाँ बरसात हो |
दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो |
कैसे  करे दोस्ती कहीं  जा कर किसी भी  देश में ,
सहमें जमाना   मेल से  कोई   कहीं ना बात हो |
कोई करे   कोई भरे     बदनाम हो    कोई कहीं ,
आतंक के माहौल में जाने किसी घर  मात  हो |
जाकर कहीं अंजान दुनिया में  बसाते घर  सभी  ,
सपने सजाते  हैं उमर भर जैसा भी औकात  हो  | 
पाखी उड़े जब आसमां में हौसला कम ना हो कभी ,
वर्मा जहाँ में खुश रहें हर जन खुशी की  बात हो |
श्याम नारायण वर्मा 
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 546

Comment

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Comment by Shyam Narain Verma on March 12, 2015 at 4:06pm

आदरणीय सभी लोगों को  रचना भाव पसंद करने हेतु हार्दिक आभार , कृपया स्नेह बनाए रखे | सादर

आदरणीय शिज्जू  'शकूर' जी कौन सा शब्द उचित रहेगा , आप का बहुत बहुत आभार |
सादर ,

Comment by Hari Prakash Dubey on March 12, 2015 at 2:16pm
आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी, इस सुन्दर और सधी हुई ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई ! सादर
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 12, 2015 at 11:37am

दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो |

बहुत खूब कहा भाई श्याम जी हार्दिक बधाई .

Comment by khursheed khairadi on March 12, 2015 at 9:10am
मौसम  कहाँ जाये  बदल जानें कहाँ बरसात हो |
दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो |
कैसे  करे दोस्ती कहीं  जा कर किसी भी  देश में ,

सहमें जमाना   मेल से  कोई   कहीं ना बात हो |

आदरणीय श्याम जी ,उम्दा ग़ज़ल हुई है |सादर अभिनन्दन |

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 12, 2015 at 5:56am

दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो.....यही सच है आज की दुनियाँ का ..प्रभावी रचना ...बधाई श्याम नारायण वर्मा  जी 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 11, 2015 at 10:25pm

समसामयिक प्रस्तुति पपर हार्दिक बधाई आ० shyam नारायण जी!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 11, 2015 at 8:28pm

आदरणीय श्याम नारायण जी ग़ज़ल पर अच्छा प्रयास है बहुत बहुत बधाई। यहाँ इतना ध्यान रखियेगा कि दोस्ती का वज्न 212 है

Comment by Shyam Mathpal on March 11, 2015 at 7:40pm


Aadarniya Shyam Verma Ji,

Bahut sundar tarike se gazal ki suruwat ki hai. Bahut-2 badhai.

दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो |
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 11, 2015 at 7:08pm

आ० वर्मा जी

बहुत अच्छी गजल कही आपने i  सादर i

Comment by maharshi tripathi on March 11, 2015 at 5:26pm
पाखी उड़े जब आसमां में हौसला कम ना हो कभी ,
वर्मा जहाँ में खुश रहें हर जन खुशी की  बात हो |,,,,,,,,अतिसुन्दर ,,,,बहुत बधाई आपको आ.श्यामनारायण वर्मा जी |

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