For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आशिक़ों की आँखो का रुख़ बदलने लगता है
जब किसी जवानी का चाँद ढलने लगता है

इब्तिदा ख़ुशामद से इल्तिजा से होती है
और फिर ये होता है,नाम चलने लगता है

सब्र की नसीहत भी काम कुछ नहीं करती
जब किसी की चाहत में दिल मचलने लगता है

हमने दिल को ले जाकर उस जगह पे रख्खा है
जिस जगह पे ख़्वाहिश का दम निकलने लगता है

जब भी मैं अंधेरों से हमकलाम होता हूँ
इक चराग़ सा मेरे दिल में जलने लगता है

आख़िरत के बारे में जब भी सोचता हूँ मैं
रूह कांप जाती है दिल दहलने लगता है

किस लिये हो अफ़सुर्दा ,क्यूँ "समर" परीशाँ हो
रात जब गुज़रती है दिन निकलने लगता है

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकशित

Views: 717

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on February 18, 2015 at 10:05pm
जनाब परी एम श्लोक जी,आदाब,हौसला अफ़ज़ाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया |
Comment by Samar kabeer on February 18, 2015 at 10:01pm
जनाब लक्ष्मण धामी जी,आदाब,बहुत बहुत शुक्रिया |
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 18, 2015 at 12:07pm

आ0 भाई समर जी, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है , हार्दिक बधाइयाँ कुबूलें l

Comment by Pari M Shlok on February 18, 2015 at 10:13am
वाह वाह क्या बात ...
किस लिये हो अफ़सुर्दा ,क्यूँ "समर" परीशाँ हो
रात जब गुज़रती है दिन निकलने लगता है

सुन्दर सन्देश है ग़ज़ल के आखिरी अशआर में ......

बाकी सभी अशआर उम्दा ..बधाई आपको
Comment by Samar kabeer on February 17, 2015 at 10:31pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी ,आदाब, हौसला अफ़ज़ाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया |

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 17, 2015 at 8:26pm

आदरणीय समर भाई , खूबसूरत ग़ज़ल हुई है , हार्दिक बधाइयाँ कुबूल करें ॥

सब्र की नसीहत भी काम कुछ नहीं करती
जब किसी की चाहत में दिल मचलने लगता है

किस लिये हो अफ़सुर्दा ,क्यूँ "समर" परीशाँ हो
रात जब गुज़रती है दिन निकलने लगता है
इन दो अशआर के लिये बहुत बहुत बधाइयाँ , आदरणीय ॥

Comment by Samar kabeer on February 17, 2015 at 10:27am
जनाब मिथिलेश वामनकर जी ,आदाब,आप ख़ुद भी अच्छे फ़नकार हैं इस्लिये दूसरों का दर्द फ़ौरन समझ लेते
हैं,तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on February 17, 2015 at 10:21am
जनाब दिनेश कुमार जी,आदाब,
"दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है"
ग़ज़ल आप को पसंद आई महनत वसूल हुई,तहे दिल से शुक्रिया |
Comment by दिनेश कुमार on February 17, 2015 at 6:09am
आदरणीय समर कबीर सर जी, बेहतरीन ग़ज़ल हुई है। हर एक शेर गुनगुनाने के साथ दिल से खुद ब खुद वाह वाह निकलती है। सभी अशआर बहुत बढ़िया हैं। इस लय में वाकई कोई जादू है जो अपनी तरफ आकर्षित करता है। अच्छे शब्द और अच्छी लय ने मिलकर मन मोह लिया है। वाह वाह

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 17, 2015 at 1:52am

आदरणीय समर कबीर जी, वाह वाह वाह, क्या लय है  ग़ज़ल की ... एक एक अशआर मोती जैसा... बस गुनगुनाते हुए आनंद ले रहा हूँ..... बह्र को क्या खूब निभाया है... फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन.... वाह वाह वाह ... शेर दर शेर दिल से दाद कुबूल फरमाए.

सब्र की नसीहत भी काम कुछ नहीं करती
जब किसी की चाहत में दिल मचलने लगता है

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
21 hours ago
Admin posted discussions
22 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
22 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
Friday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
Friday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
Thursday
amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
Mar 17

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service