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ऐ दिल ……


ऐ दिल तू क्यूँ व्यर्थ में परेशान  होता है
हर किसी के आगे क्यूँ  व्यर्थ में रोता है
कौन भला यहां  तेरा दर्द समझ पायेगा
हर अरमान यहां अश्क के साथ सोता है

ऐ दिल तू क्यूँ व्यर्थ में परेशान  होता है ……

ये सांझ नहीं अपितु सांझ का  आभास है
पल पल क्षरण होते रिश्तों  का आगाज़ है
भावों की कन्दराओं में बोलता सन्नाटा है
पाषाणों में कहाँ  प्यार  का सृजन होता है

ऐ दिल  तू क्यूँ  व्यर्थ  में परेशान होता है ……

ऐ शलभ तू क्यूँ किसी लौ पे आसक्त होता है
क्यूँ  अन्धकार  में अपना अस्तित्व खोता है
ये दुनिया तो  बस इक स्वार्थ की महफ़िल है
खुशी के आवरण में यहाँ तो साथ ग़म होता है

ऐ दिल ! तू  क्यूँ  व्यर्थ  में  परेशान  होता है
हर  किसी  के  आगे  क्यूँ  व्यर्थ  में  रोता है

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 680

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Comment by Sushil Sarna on February 4, 2015 at 11:26am

आदरणीय    गिरिराज भंडारी जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल शुक्रिया। 

Comment by Sushil Sarna on February 4, 2015 at 11:26am

आदरणीय    somesh kumar जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल शुक्रिया। 

Comment by Sushil Sarna on February 4, 2015 at 11:25am

आदरणीय    मिथिलेश वामनकर जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल शुक्रिया। 

Comment by Sushil Sarna on February 4, 2015 at 11:25am

आदरणीय   Dr. Vijai Shanker  जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल शुक्रिया। 

Comment by Sushil Sarna on February 4, 2015 at 11:20am

आदरणीय  Hari Prakash Dubey जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल शुक्रिया। 

Comment by Sushil Sarna on February 4, 2015 at 11:20am

आदरणीय   Er. Ganesh Jee "Bagi" जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल शुक्रिया। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 3, 2015 at 6:12pm

आदरणीय सुशील भाई , बहुत सुन्दर समझाइश देती हुई आपकी रचना के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by somesh kumar on February 2, 2015 at 10:30pm

ये सांझ नहीं अपितु सांझ का  आभास है 
पल पल क्षरण होते रिश्तों  का आगाज़ है 
भावों की कन्दराओं में बोलता सन्नाटा है 
पाषाणों में कहाँ  प्यार  का सृजन होता है

ऐ दिल  तू क्यूँ  व्यर्थ  में परेशान होता है

dil preshan na ho ,sunder bhav aadrniy


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 2, 2015 at 8:15pm

आदरणीय सुशील सरना जी, सुन्दर कविता के लिए बधाई, सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on February 2, 2015 at 7:43pm
दिल को समझाती बहुत सुन्दर कविता बनी , आदरणीय सुशील सरना जी , बधाई, सादर।

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