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मैं अपनी मुहब्बत को …

मैं अपनी मुहब्बत को …एक रचना 


मैं अपनी मुहब्बत को इक मोड़ पे छोड़ आया हूँ
इक ज़रा सी ख़ता पे मैं हर क़सम तोड़ आया हूँ


जाने कितने लम्हे मेरी साँसों की ज़िंदगी थे बने
मैं तमाम ख़्वाब उनकी पलकों में छोड़ आया हूँ


जिसकी मौजूदगी  में खामोशी भी बतियाती थी
अब्र की  चिलमन में वो माहताब छोड़ आया हूँ


बन के  हयात  वो हमसे क्यों बेवफाई .कर गए
उनकी  दहलीज़ पे  मैं  हर  आहट छोड़ आया हूँ


हिज्र का  दर्द  चश्मे  सागर में न सिमट पायेगा
कश्ती कागज़ की  मैं  साहिल  पर छोड़ आया हूँ


हर सलवट से बयां गुज़री रात के अफ़साने होंगे
मैं उनके लबों पे महकते अहसास छोड़ आया हूँ

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 765

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Comment by Sushil Sarna on February 9, 2015 at 4:40pm

आदरणीय   Hari Prakash Dubey जी प्रस्तुति पर आपकी नज़र ने रचना को सराहा इसके लिए बन्दे का तहे दिल से शुक्रिया । 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 7, 2015 at 11:02pm
आदरणीय सुशील सरना जी ..
मैं अपनी मुहब्बत को इक मोड़ पे छोड़ आया हूँ
इक ज़रा सी ख़ता पे मैं हर क़सम तोड़ आया हूँ.....वाह
जिसकी मौजूदगी में खामोशी भी बतियाती थी
अब्र की चिलमन में वो माहताब छोड़ आया हूँ.......शानदार , हार्दिक बधाई सर ! सादर
Comment by Sushil Sarna on February 7, 2015 at 5:54pm

आदरणीय   Er. Ganesh Jee "Bagi" जी प्रस्तुति पर आपकी नज़र ने रचना को सराहा इसके लिए बन्दे का तहे दिल से शुक्रिया । 

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2015 at 5:52pm

आदरणीय  गिरिराज भंडारी जी प्रस्तुति पर आपकी दिलकश तारीफ़  का तहे दिल से शुक्रिया । 

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2015 at 5:51pm

आदरणीय   khursheed khairadi जी प्रस्तुति पर आपकी नज़रे- करम  का तहे दिल से शुक्रिया । 

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2015 at 5:49pm

आदरणीय सर्वेश कुमार मिश्र जी प्रस्तुति पर आपकी खूबसूरत वाह  का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2015 at 5:48pm

आदरणीय विजय शंकर जी प्रस्तुति पर आपकी स्नेहाशीष  का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2015 at 5:47pm

आदरणीय अजय शर्मा  जी प्रस्तुति पर आपकी ऊर्जावान  प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2015 at 5:46pm

आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया  जी प्रस्तुति पर आपकी मधुर  प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on February 7, 2015 at 5:44pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर  जी प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

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